अस्पताल में बदबू में मरीज, मंत्री राकेश शुक्ला के लिए खुशबु का इंतजाम, वीडियो वायरल
शॉर्ट में समझें क्या है पूरा मामला
- मध्यप्रदेश के अशोकनगर जिला अस्पताल में प्रभारी मंत्री राकेश शुक्ला औचक निरीक्षण पर पहुंचे।
- मंत्री को देखते ही अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया और कर्मचारी रूम फ्रेशनर लेकर दौड़ पड़े।
- वार्डों और शौचालयों की असहनीय बदबू छिपाने के लिए मंत्री के आगे-आगे स्प्रे किया गया।
- यह पूरा नजारा कैमरे में कैद हो गया और अब सोशल मीडिया पर वायरल है।
- कांग्रेस ने इसे सरकार का आईना बताते हुए तीखा हमला बोला है।
मंत्री पहुंचे, अस्पताल में मचा हड़कंप
मध्यप्रदेश के अशोकनगर में जिला अस्पताल का हाल किसी से छिपा नहीं था। लेकिन जब नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला औचक निरीक्षण पर पहुंचे तो जो दृश्य सामने आया, उसने पूरे सिस्टम की पोल खोलकर रख दी।
मंत्री को देखते ही अस्पताल प्रशासन में अफरा-तफरी मच गई। ऊपर से नजर आने वाली हर अव्यवस्था को तुरंत छिपाने के निर्देश दे दिए गए।
आगे स्प्रे, पीछे मंत्री जी
जो हुआ वह हैरान करने वाला था। श्योपुर प्रभारी मंत्री राकेश शुक्लाअस्पताल के वार्डों का निरीक्षण करते हुए आगे बढ़ रहे थे और उनके ठीक आगे एक कर्मचारी रूम फ्रेशनर (Room Freshener) का छिड़काव करता हुआ चल रहा था।
यह पूरा नजारा कैमरे में कैद हो गया। दरअसल अस्पताल के वार्डों और शौचालयों से इतनी असहनीय बदबू आती है कि मरीज और उनके परिजन हर दिन इससे परेशान रहते हैं।
लेकिन मंत्री जी को यह सच पता न चले इसलिए बदबू हटाने की बजाय उसे सिर्फ ढकने की कोशिश की गई।
एक बेड पर दो मरीज
औचक निरीक्षण के दौरान और भी शर्मनाक हकीकत सामने आई। अस्पताल में एक बेड पर दो-दो मरीज लेटे हुए मिले। संक्रमण (Infection) के खतरे और मरीजों की निजता को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा था।
बुनियादी ढांचे पर बढ़ते दबाव और संसाधनों की भारी कमी ने सरकारी दावों की हवा निकाल दी।
गर्मी में पंखे तक नहीं
मध्यप्रदेश में इन दिनों भीषण गर्मी है। ऐसे में अस्पताल के गलियारों में पड़े मरीजों का हाल और भी बुरा था। वार्डों में वेंटिलेशन (Ventilation) की कमी तो थी ही, पंखे और कूलर तक नदारद थे।
मरीज और उनके परिजन अखबार और गत्तों से खुद को हवा करने पर मजबूर थे। एक तरफ चिलचिलाती गर्मी, दूसरी तरफ बदबू और भीड़, यह है मप्र के सरकारी अस्पताल की असली तस्वीर।
मंत्री ने दिए निर्देश, पर सवाल बाकी
निरीक्षण के बाद प्रभारी मंत्री राकेश शुक्ला ने अधिकारियों को सफाई व्यवस्था दुरुस्त रखने के निर्देश दिए। गर्मी में मरीजों के लिए पर्याप्त हवा के संसाधन चालू रखने को भी कहा गया।
लेकिन सवाल यह है कि जब मंत्री जी नहीं होंगे तो क्या यही हाल फिर से लौट आएगा? जब बदबू छिपाने के लिए रूम फ्रेशनर काफी समझा जाए, तो निर्देशों का असर कितने दिन रहेगा?
कांग्रेस का तीखा हमला
कांग्रेस इस पर हमला बोला है। कहा कि मरीज बदबू झेलते रहें, मंत्री जी के लिए फूल खुशबू छिड़की जाएगी! अशोकनगर अस्पताल के यह दृश्य सरकार का आईना है।
कर्मचारी आगे-आगे रूम फ्रेशनर छिड़कते रहे, और प्रभारी मंत्री राकेश शुक्ला पीछे-पीछे “निरीक्षण” का दिखावा करते रहे! सिस्टम की सच्चाई यही है। बदबू हटाने के बजाय उसे सिर्फ़ छुपाया जा रहा है!
खानापूर्ति बना दौरा
यह औचक निरीक्षण खानापूर्ति बनकर रह गया। अगर अस्पताल प्रबंधन वाकई सुधार चाहता तो यह काम मंत्री के आने से पहले होता, न कि उनके आगे-आगे स्प्रे करके।
यही वह सोच है जो सरकारी व्यवस्था को अंदर से खोखला करती है। रूम फ्रेशनर से बदबू नहीं जाती, बस कुछ देर के लिए छिप जाती है। मरीजों को जरूरत है ठोस बदलाव की, दिखावे की नहीं।
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