घोटाले, जमीन और मुआवजा..एमपी विधानसभा में सरकार चार मोर्चों पर घिरी
समझें क्या है पूरा मामला
- आदिवासी जमीनों के कथित अवैध हस्तांतरण का मुद्दा सदन में उठा।
- सरकार ने पूरे मामले की जांच कराने का भरोसा दिया।
- केन-बेतवा परियोजना के मुआवजे पर विपक्ष ने सवाल उठाए।
- मुख्यमंत्री ने एक महीने में समाधान कराने का आश्वासन दिया।
- सिंचाई परियोजना और विश्वविद्यालय विधेयक पर विपक्ष ने विरोध जताया।
एमपी विधानसभा केमानसून सत्र के तीसरे दिन विपक्ष ने सिर्फ NEET ही नहीं, बल्कि आदिवासी जमीन, केन-बेतवा परियोजना, चंबल सूक्ष्म सिंचाई योजना और शिक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दों पर भी सरकार को घेरा। कई मामलों में सरकार को जांच और कार्रवाई का भरोसा देना पड़ा।
आदिवासी जमीन पर सरकार से जवाब
कांग्रेस विधायक हीरालाल अलावा ने आदिवासी जमीनों के कथित अवैध हस्तांतरण का मामला उठाया। राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने कहा कि यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी और कानून के अनुसार भूमि पुनर्बहाली भी होगी।
केन-बेतवा परियोजना पर उठे सवाल
उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि कई प्रभावित परिवारों को अब तक पूरा मुआवजा नहीं मिला है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यदि कोई पात्र व्यक्ति छूटा है या कहीं अनियमितता हुई है तो एक महीने के भीतर जांच कर समाधान किया जाएगा।
सिंचाई परियोजना पर भी विवाद
कांग्रेस विधायक बाबू जंडेल ने चंबल सूक्ष्म सिंचाई परियोजना में कथित गड़बड़ी का आरोप लगाया। मंत्री कृष्णा गौर ने आरोपों से इनकार किया, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने पूरे मामले की विभागीय जांच कराने के निर्देश दिए।
शिक्षा विधेयक पर नई बहस
निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक को लेकर विपक्ष ने सरकार पर शिक्षा के निजीकरण और छात्रों के भविष्य से समझौता करने का आरोप लगाया। सरकार की ओर से विधेयक को आवश्यक सुधार बताया गया, जबकि विपक्ष इसे शिक्षा व्यवस्था के लिए चुनौती मान रहा है।
सरकार को घेरने की रणनीति
इस बार विपक्ष ने अलग-अलग मुद्दों को जोड़कर सरकार को घेरने की रणनीति बनाई। जमीन, मुआवजा, सिंचाई और शिक्षा जैसे विषयों को एक साथ उठाकर जवाबदेही की मांग की गई। सरकार ने अधिकांश मामलों में जांच और समाधान का आश्वासन दिया, लेकिन राजनीतिक बहस अभी थमती नहीं दिख रही।
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