अविवाहित बेटी के नवजात को नाना ने जिंदा दफनाया, पोल खुली तो खुद भी जहर खाया

Pawan Modiya | Aug 02, 2026, 16:47 IST
नवजात को दफनाया
मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में अविवाहित बेटी से जन्मे नवजात को गोबर के ढेर में दफनाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि नाना ने बच्चे को दफनाया, फिर खुद जहर खा लिया। पुलिस जांच कर रही है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • बालाघाट जिले में अविवाहित बेटी ने चुपचाप एक बच्चे को जन्म दिया।
  • परिवार ने राज छिपाने के लिए नवजात को दफना दिया।
  • आरोप है कि नाना ने बच्चे को गोबर के ढेर में गाड़ा।
  • घटना के बाद नाना ने खुद जहर खा लिया।
  • पुलिस ने शव बरामद कर मामले की जांच शुरू की।

मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां अविवाहित बेटी ने चुपचाप एक बच्चे को जन्म दिया। आरोप है कि नाना ने बच्चे को गोबर के ढेर में दफना दिया। यह घटना वारासिवनी थाना क्षेत्र के नांदगांव पंचायत में हुई। घटना के बाद नाना ने खुद कीटनाशक पी लिया। उनकी हालत फिलहाल गंभीर बनी हुई है।



पुलिस को घटना की जानकारी 31 जुलाई को मिली थी। तेज बारिश और अंधेरे के कारण शव उसी रात नहीं निकाला जा सका। अगले दिन यानी 1 अगस्त को नवजात का शव बाहर निकाला गया। पुलिस ने शव बरामद कर मामले की जांच शुरू कर दी है।



पड़ोसियों को हुआ शक

घटना से एक रात पहले आसपास के लोगों ने कुछ सुना। उन्हें बच्चे के रोने जैसी आवाज सुनाई दी थी। पड़ोसियों ने परिवार से इस बारे में पूछा। परिवार वाले हर बार टालमटोल करने लगे। साफ जवाब न मिलने पर ग्रामीणों को शक हुआ। गांव के सरपंच ने एक बैठक बुलाई। बैठक में आशा कार्यकर्ता ने अहम जानकारी दी। उन्होंने बताया कि परिवार की बेटी कुछ दिनों से गर्भवती थी। इसके बाद सरपंच ने वारासिवनी पुलिस को सूचना दी।



मुंह और गले में कपड़ा बांधा

नायब तहसीलदार चंद्रकिशोर ककोडिया की मौजूदगी में शव निकाला गया। इस दौरान डॉक्टर और पुलिस टीम भी मौजूद रही। नवजात के गले और मुंह में कपड़ा बंधा हुआ मिला। इससे शक जताया जा रहा है कि हत्या की गई होगी। पुलिस का कहना है कि यह आरोप अभी जांच का विषय है। दोष सिद्ध होना अभी बाकी है।



नाना ने भी खाया जहर, हालत गंभीर

घटना के बाद मृत नवजात के नाना धारासिंह मड़ावी ने कीटनाशक खा लिया। उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों के मुताबिक उनकी हालत अभी भी गंभीर है। वारासिवनी पुलिस ने बताया कि मामले की जांच जारी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई होगी।



गांव में मामले की चर्चा

वारासिवनी बालाघाट जिले की एक तहसील है। यह इलाका महाराष्ट्र सीमा के पास स्थित है। यहां ज्यादातर लोग खेती और मजदूरी पर निर्भर हैं। नांदगांव पंचायत भी इसी तहसील के अंतर्गत आती है। यहां की आबादी मुख्य रूप से ग्रामीण है।



इस घटना के बाद गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है। ग्रामीण इस पूरे मामले से स्तब्ध हैं। कई लोगों का कहना है कि परिवार ने डर के कारण यह कदम उठाया। समाज में बदनामी के डर से ऐसे मामले अक्सर छिपाए जाते हैं। पुलिस अब परिवार के अन्य सदस्यों से भी पूछताछ कर सकती है।



आशा कार्यकर्ता की जानकारी से खुला राज

गांव में आशा कार्यकर्ता महिलाओं और बच्चों की सेहत पर नजर रखती है। वह गर्भवती महिलाओं की जानकारी स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाती है। इस मामले में भी आशा कार्यकर्ता की जानकारी से राज खुला। इससे पता चलता है कि सामुदायिक निगरानी कितनी जरूरी है। गांव के लोग और स्वास्थ्य कर्मी मिलकर ऐसी घटनाएं रोक सकते हैं।



सामाजिक दबाव बना वजह

पुलिस के मुताबिक परिवार पर सामाजिक दबाव भारी रहा होगा। बेटी के अविवाहित होने के कारण परिवार ने राज छुपाने की कोशिश की। इसी डर में परिवार ने गलत रास्ता चुन लिया। विशेषज्ञ कहते हैं कि ऐसे हालात में परिवार को सहारा देना चाहिए। डांटने या छिपाने के बजाय मदद लेना बेहतर रास्ता है। इससे मासूम बच्चों की जान बचाई जा सकती है।



पहले भी सामने आए मामले

देश के अलग-अलग राज्यों से ऐसी घटनाएं पहले भी सामने आई हैं। समाज में बदनामी के डर से परिवार अक्सर सच छुपाते हैं। कई बार इसका खामियाजा मासूम बच्चों को भुगतना पड़ता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह की सोच बदलनी जरूरी है। सुरक्षित प्रसव और परामर्श केंद्र इस समस्या का हल हो सकते हैं।



कानूनी पहलू पर नजर

भारतीय कानून में नवजात की हत्या को गंभीर अपराध माना गया है। सबूत छिपाने पर भी अलग से मामला दर्ज हो सकता है। पुलिस जांच पूरी होने पर ही आरोपों की पुष्टि होगी। फिलहाल किसी के खिलाफ दोष साबित नहीं हुआ है।



आगे की जांच पर टिकी नजर

फिलहाल पूरे मामले की जांच वारासिवनी पुलिस कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मौत की असली वजह सामने आएगी। पुलिस परिवार के अन्य सदस्यों के बयान भी दर्ज करेगी। जरूरत पड़ने पर आगे और लोगों से पूछताछ की जा सकती है। जांच पूरी होने तक कोई निश्चित निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। पुलिस ने ग्रामीणों से भी सहयोग की अपील की है।



यह मामला अभी शुरुआती जांच के दौर में है। पुलिस हर पहलू को बारीकी से देख रही है। परिवार के बयान और मेडिकल रिपोर्ट दोनों अहम होंगे। सच्चाई सामने आने में अभी कुछ समय लग सकता है। तब तक पूरा गांव इस घटना को लेकर चिंतित है।



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