बरगी हादसे में आयोग से क्रूज के इंजन और अवशेषों की तकनीकी जांच कराने की मांग

Neel Tiwari | Jun 15, 2026, 17:20 IST
बरगी हादसे में आयोग से क्रूज के इंजन
बरगी बांध में 13 लोगों की मौत वाले दर्दनाक बोट हादसे की जांच में बड़ा तथ्य सामने आया है। आयोग के समक्ष बयान देने पहुंचे याचिकाकर्ता अखिलेश त्रिपाठी ने बड़ी मांग की है। उन्होंने कहा है कि हादसे में शामिल क्रूज के इंजन और बचे हुए हिस्सों की जांच कराई जाए।

समझें क्या है पूरा मामला

  • बरगी बांध हादसे की जांच कर रहे आयोग के समक्ष अखिलेश त्रिपाठी के विस्तृत बयान दर्ज हुए।
  • याचिकाकर्ता ने स्वतंत्र विशेषज्ञ एजेंसी से क्रूज के इंजन और अवशेषों की तकनीकी जांच कराने की मांग की।
  • आवेदन में कहा गया कि हादसे के बाद क्रूज को डिस्मेंटल कर दिया गया है।
  • विमान, ट्रेन और मरीन दुर्घटनाओं की तरह विस्तृत तकनीकी जांच की आवश्यकता बताई गई।
  • आयोग को एएमसीए मरीन कंसल्टेंट्स सहित अन्य विशेषज्ञ एजेंसियों के नाम भी सुझाए गए।

आयोग के समक्ष दर्ज हुए विस्तृत बयान

बरगी बांध में 30 अप्रैल 2026 को हुए दर्दनाक क्रूज हादसे में 13 लोगों की जान चली गई थी। इसकी जांच कर रहे आयोग के के अध्यक्ष रिटायर्ड जस्टिस संजय द्विवेदी है। आयोग के समक्ष सोमवार को याचिकाकर्ता अखिलेश त्रिपाठी के विस्तृत बयान दर्ज किए गए।



तकनीकी तथ्यों से सामने आएगा सच

याचिकाकर्ता की ओर से अलग आवेदन प्रस्तुत किया गया और आयोग से क्रूज इंजन तथा उसके बचे हुए हिस्सों की स्वतंत्र तकनीकी जांच की मांग की गई। आवेदन में कहा गया कि हादसे में शामिल क्रूज के अवशेषों की वैज्ञानिक जांच जरूरी है। साथ ही यह भी कहा गया कि केवल प्रत्यक्षदर्शियों के बयान पर्याप्त नहीं होते। तकनीकी साक्ष्य और विशेषज्ञों की रिपोर्ट से ही दुर्घटना के वास्तविक कारण सामने आते हैं।



विमान और ट्रेन दुर्घटनाओं का दिया उदाहरण

याचिकाकर्ता ने आयोग के समक्ष तर्क रखा कि जब किसी विमान दुर्घटना, रेल हादसे या समुद्री दुर्घटना की जांच होती है। विशेषज्ञों की टीम इंजन, मशीनरी, संरचना और तकनीकी खामियों का विस्तृत परीक्षण करती है। उसी प्रकार बरगी हादसे में भी यह जानना आवश्यक है कि कहीं इंजन, संरचना, क्षमता, संतुलन या संचालन से जुड़ी कोई तकनीकी कमी तो दुर्घटना की वजह नहीं बनी। उनका कहना है कि बिना ऐसी जांच के जिम्मेदारी तय करना अधूरा रहेगा।



क्रूज को डिस्मेंटल किए जाने से बढ़े सवाल

बयान और आवेदन में यह भी कहा गया है कि हादसे में शामिल जलयान को इंजन सहित कथित रूप से डिस्मेंटल कर दिया गया है। ऐसे में अब जो हिस्से उपलब्ध हैं, उनका वैज्ञानिक और तकनीकी परीक्षण और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है। याचिकाकर्ता का कहना है कि पूरे मामले में अलग-अलग पक्षों द्वारा अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। इससे कई सवाल खड़े हो गए हैं। इन सवालों का जवाब केवल स्वतंत्र तकनीकी जांच से ही मिल सकता है।



आयोग को सुझाए विशेषज्ञ संस्थानों के नाम

याचिकाकर्ता ने अपने आवेदन में आयोग को कुछ स्वतंत्र विशेषज्ञ एजेंसियों के नाम भी सुझाए हैं। इनमें मरीन क्षेत्र में कार्य करने वाली एएमसीए मरीन कंसल्टेंट्स प्राइवेट लिमिटेड जैसी एजेंसी का उल्लेख किया गया है। हालांकि आवेदन में यह भी कहा गया है कि आयोग जिस किसी स्वतंत्र और सक्षम विशेषज्ञ संस्था को उचित समझे, उससे तकनीकी राय प्राप्त कर सकता है। उद्देश्य केवल इतना है कि दुर्घटना के तकनीकी पहलुओं की निष्पक्ष जांच हो और किसी भी संभावित लापरवाही या खामी का सत्य सामने आ सके।



अहम हो सकती है रिपोर्ट

याचिकाकर्ता का कहना है कि आयोग का गठन केवल दोष तय करने के लिए नहीं है। इसका उद्देश्य जल गतिविधियों के लिए सुरक्षा मानक तय करना भी है। यह पर्यटन संचालन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है। विशेषज्ञों की तकनीकी रिपोर्ट से वास्तविक कारण सामने आ सकते हैं। इससे हादसे की सही वजह स्पष्ट होगी। रिपोर्ट से भविष्य की सुरक्षा नीति मजबूत हो सकती है। बरगी और अन्य जलाशयों में संचालन के लिए मानक तय होंगे। नौकाओं और क्रूज की सुरक्षा व्यवस्था बेहतर हो सकेगी। अब आयोग के फैसले पर सभी की नजर है।



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