पढ़ें मशहूर शायर बशीर बद्र के वो शेर जो बॉलीवुड फिल्मों में हुए सुपरहिट
Bashir Badr Passed Away: साहित्य और सिनेमा जगत से आज (28 मई) एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। उर्दू गजल को अपनी सादगी से सजाने वाले मशहूर शायर पद्मश्री डॉ. बशीर बद्र का 91 वर्ष की उम्र में इंतकाल हो गया है। उन्होंने भोपाल में आखिरी सांस ली। डॉ. बशीर बद्र का जन्म 15 फरवरी 1935 को हुआ था।
शायर पद्मश्री डॉ. बशीर बद्र ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की थी। वे मेरठ कॉलेज में लंबे समय तक प्रोफेसर भी रहे। साल 1987 के मेरठ दंगों में उनका घर जलने के बाद वे हमेशा के लिए भोपाल आ गए थे। सरकार ने उन्हें पद्मश्री सम्मान से भी नवाजा था।
डॉ. बशीर बद्र के जाने से उनके लाखों प्रशंसकों में शोक की लहर है। बशीर बद्र साहब की कलम में एक ऐसा जादू था, जो सीधे दिल पर असर करता था।
इसी वजह से भारतीय सिनेमा (बॉलीवुड) के बड़े-बड़े डायरेक्टर्स और राइटर्स ने उनकी शायरी को अपनी फिल्मों का हिस्सा बनाया। आइए जानें उनके कौन-से शेर फिल्मों में सुपरहिट हुए।
मसान
साल 2015 में आई निर्देशक (Bollywood) नीरज घेवान की फिल्म मसान को लोगों ने खूब पसंद किया था। इस फिल्म में विक्की कौशल का किरदार एक बेहद भावुक सीन में बद्र साहब का शेर बोलता है। वह शेर आज भी इंटरनेट पर युवाओं के बीच बहुत ज्यादा पॉपुलर है। वह शेर कुछ इस तरह से है:
"कोई हाथ भी न मिलाएगा जो गले मिलोगे तपाक से,
ये नए मिज़ाज का शहर है ज़रा फ़ासिले से मिला करो।"
हमारी अधूरी कहानी
इस रोमांटिक ड्रामा फिल्म के टाइटल ट्रैक की शुरुआत में इमरान हाशमी का किरदार बशीर बद्र साहब की एक बेहद खूबसूरत गजल का अंश बैकग्राउंड वॉइस-ओवर (शायरी) के रूप में पढ़ता है:
"तुम तसल्ली न दो सिर्फ़ बैठे रहो,
वक़्त कुछ मेरे चेहरे को पढ़ जाएगा।
आँखों में आँसू की बूंदें रुकी हैं अभी,
ज़रा सी ठेस लगी और घड़ा फूट जाएगा।"
जीरो
आनंद एल. राय की फिल्म 'ज़ीरो' में शाहरुख खान का किरदार (बउआ सिंह) अपनी आशिकी और जिंदगी के फलसफे को बयां करने के लिए बशीर बद्र साहब के इस मशहूर शेर का सहारा लेता है:
"कोई फूल धूप के पास है, कोई फूल साए में पल रहा,
यहाँ हर किसी का नसीब है, कोई जल रहा कोई खिल रहा।"
कुछ कुछ होता है
इस ब्लॉकबस्टर फिल्म में सीधे तौर पर शेर नहीं पढ़ा गया, लेकिन करण जौहर ने फिल्म का सबसे आइकॉनिक और डायलॉग बशीर बद्र साहब के एक बहुत ही मशहूर शेर के विचार से प्रेरित होकर लिखा था।
"मोहब्बत एक खुशबू है हमेशा साथ चलती है,
कोई इंसान तन्हा ज़िंदगी गुज़ार नहीं सकता।"
गानों और एल्बम्स में बद्र साहब का जादू
फिल्मों के अलावा, संगीत की दुनिया के बेताज बादशाह जगजीत सिंह और चित्रा सिंह ने गजल सम्राटबशीर बद्र साहब की कई गजलों को गाकर अमर कर दिया। कई फिल्मों में बैकग्राउंड स्कोर के रूप में भी गूंजीं। इनमें सबसे लोकप्रिय हैं:
- "उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो, न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए।"
- "परखना मत परखने में कोई अपना नहीं रहता।"
- "कुछ तो मजबूरियां रही होंगी, यूं कोई बेवफ़ा नहीं होता।"
सिनेमा में जगजीत सिंह और पंकज उधास जैसे दिग्गजों ने उनकी कई गजलों को अपनी आवाज दी। उनका यह शेर हमेशा याद रखा जाएगा:
"उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो,
न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए।"
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