रिटायर्ड अधिकारी शोभाराम धारीवाल और सिंघानिया ग्रुप ने बनाई बेनामी संपत्ति, भोपाल कोर्ट में चार केस दर्ज
News In Short
- आयकर विभाग ने भोपाल की विशेष कोर्ट में चार बेनामी संपत्ति केस दायर किए।
- रिटायर्ड कृषि अधिकारी शोभाराम धारीवाल और उनके परिवार पर तीन केस हैं।
- सिंघानिया ग्रुप के पदम सिंघानिया पर नौकर के नाम संपत्ति खरीदने का आरोप है।
- कुल 75 बेनामी संपत्तियों की पहचान जांच में हुई है।
- अगली सुनवाई की तारीख 19 मई 2026 तय की गई है।
News In Detail
75 बेनामी संपत्तियों का मामला
आयकर विभाग ने बेनामी संपत्ति के मामले में भोपाल की विशेष न्यायालय (सीबीआई) में चार केस दर्ज किए हैं। इनमें तीन मामले रिटायर्ड कृषि विकास अधिकारी शोभाराम धारीवाल और उनके परिवार से जुड़े हैं। एक मामला शहडोल के सिंघानिया ग्रुप के मुखिया पदम सिंघानिया और उनके नौकर सुखलाल बैगा के खिलाफ दर्ज किया गया है।
चारों मामलों में एक बात सांझी है। किसी और के नाम पर संपत्ति खरीदी गई, जबकि असली पैसा किसी और का था। यही बेनामी लेनदेन कहलाता है और यह कानूनी रूप से अपराध है।
5 करोड़ की संपत्ति, दिखाई थी सिर्फ 63 लाख की
शोभाराम धारीवाल मध्यप्रदेश सरकार में कृषि विकास अधिकारी के पद पर तैनात थे। नौकरी से रिटायर होने के बाद जांच हुई तो चौंकाने वाला सच सामने आया। उनकी घोषित संपत्ति केवल 63 लाख रुपए होनी चाहिए थी। वहीं, जांच में करीब पांच करोड़ रुपए की संपत्ति मिली है।
आयकर विभाग की जांच में पता चला कि शोभाराम ने नौकरी के दौरान हुई अवैध कमाई को छुपाने के लिए परिवार के सदस्यों के नाम पर संपत्तियां खरीदी थी। उनके बेटे कोमेंद्र के नाम 29 संपत्तियां दर्ज हैं। बेटे सोमेंद्र के नाम 19 और पत्नी कपूरी देवी के नाम छह संपत्तियां खरीदी गईं। इस तरह कुल 54 संपत्तियां परिवार के नाम पर बेनामी तरीके से खरीदी गईं।
जब नाबालिग बेटों के नाम हुई खरीदारी
जांच में एक और अहम तथ्य सामने आया है। जब ये संपत्तियां बेटों के नाम पर खरीदी गईं, तब दोनों बेटे नाबालिग थे। यानी उनकी खुद की कोई आमदनी या साधन नहीं था। फिर भी उनके नाम दर्जनों संपत्तियां दिखाई गईं।
साफेमा (SAFEMA - Smugglers and Foreign Exchange Manipulators (Forfeiture of Property) Act) यानी अपीलीय ट्रिब्यूनल ने साल 2024 में इस मामले में फैसला सुनाया था। ट्रिब्यूनल ने माना कि शोभाराम धारीवाल ही इन सभी संपत्तियों के असली मालिक हैं। बेटे सोमेंद्र, कोमेंद्र और पत्नी कपूरी देवी को इन संपत्तियों का बेनामीदार (Benamidaar) घोषित किया गया।
नौकर के नाम 21 संपत्ति, फिर बेटे को ट्रांसफर
सिंघानिया ग्रुप का मामला थोड़ा अलग और और दिलचस्प है। शहडोल स्थित तिरुपति बिल्डकॉन के प्रमुख पदम सिंघानिया पर आरोप है कि उन्होंने अपने नौकर सुखलाल बैगा के नाम पर कुल 21 बेनामी संपत्तियां खरीदीं।
इनमें से 16 संपत्तियां शहडोल में और छह उमरिया जिले में हैं। इसके अलावा पांच और संपत्तियां सुखलाल के नाम पर खरीदीं और बाद में उन्हें अपने बेटे के नाम ट्रांसफर करवा लिया। आयकर विभाग ने इस मामले में पदम सिंघानिया को असली मालिक और सुखलाल बैगा को बेनामीदार बताया है।
कोर्ट में दर्ज हुए चारों केस
आयकर विभाग की ओर से विशेष लोक अभियोजक स्वप्निल चतुर्वेदी इन मामलों में पैरवी कर रहे हैं। भोपाल की विशेष न्यायालय (सीबीआई) ने चारों केस रजिस्टर कर लिए हैं। अब अगली सुनवाई 19 मई 2026 को होगी।
बेनामी कानून क्या है?
बेनामी लेनदेन निरोधक कानून के तहत, यदि कोई व्यक्ति किसी दूसरे के नाम पर संपत्ति खरीदता है और उसके लिए खुद पैसे देता है, तो यह बेनामी लेनदेन माना जाता है। ऐसी संपत्ति सरकार जब्त कर सकती है। इसमें दोषी पाए जाने पर सात साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है।
यह कानून उन लोगों पर लगाम लगाने के लिए बनाया गया है जो काले धन को छुपाने के लिए दूसरों के नाम पर संपत्ति खरीदते हैं। इस मामले में दोनों आरोपियों पर यही जुर्म है।
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