भागीरथपुरा जांच रिपोर्ट के लिए अभी और इंतजार, अब 28 सितंबर को होगी सुनवाई

Sanjay Gupta | Sept 23, 2026, 18:50 IST
भगीरथपुरा जांच रिपोर्ट का इंतजार
भागीरथपुरा में दूषित पानी कांड से हुई मौतों की रिपोर्ट सार्वजनिक होने पर अभी फैसला नहीं हुआ है। इस मामले में बुधवार 23 सितंबर को सुनवाई टल गई।

Indore. इंदौर के वार्ड 11 में भागीरथपुरा में दूषित पानी के चलते हुई 36 मौतों को लेकर जनहित याचिकाएं लगी हुई है। इसमें बुधवार को सुनवाई के लिए कुल सात याचिकाएं लिस्ट थी, लेकिन सुनवाई आगे बढ़ गई। अब यह केस 28 सितंबर को लिस्ट हुआ है। फिलहाल मुख्य मुद्दा हाईकोर्ट के रिटायर जस्टिस द्वारा की गई जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करने या नहीं करने का है।



जांच रिपोर्ट अगस्त माह में हुई जमा

भागीरथपुरा कांड की जांच के लिए हाईकोर्ट बेंच ने हाईकोर्ट के रिटायर जस्टिस सुशील गुप्ता की अध्यक्षता में एक सदस्यीय जांच आयोग बनाया था। जनवरी में आयोग बना था और अगस्त में उन्होंने 600 पन्ने की रिपोर्ट दे दी।



जब सुनवाई हुई तो इसमें शासन व अन्य पक्ष द्वारा जांच रिपोर्ट सार्वजिक नहीं करने की मांग कर दी गई। इसे मानते हुए हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि याचिकाकर्ता से जुड़े वकील रजिस्ट्रार के पास रिपोर्ट देख सकते हैं और बिंदु नोट कर सकते हैं। अभी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की जा रही।



जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की हुई मांग

इस फैसले के खिलाफ अधिवक्ता मनीष यादव और अधिवक्ता रितेश इनानी के जरिए इंटरविनर याचिका दायर की गई। इसमें मांग की गई है कि रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए और कॉपी दी जाए। इस मामले में सुनवाई बाकी है। केस बुधवार 23 सितंबर को लिस्ट हुआ, लेकिन सुनवाई नहीं हुई और अब केस 28 सितंबर को लिस्ट हुआ है।



यह है कुल सात याचिकाएं

इस मामले में कुल सात जनहित याचिकाएं दायर है। यह याचिकाएं रितेश ईनानी, महेश गर्ग राकेश बैस प्रभात पांडे, पूनम गुप्ता विनोद द्विवेदी, पुनीत शर्मा द्वारा दायर की है। इसमें वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागडिया के साथ ही अधिवक्ता कुलदीप पाठक, मनीष यादव, रितेश ईनानी, केके गुप्ता, गजेंद्र सिंह चौहान मंजेश शर्मा, अनिल ओझा पैरवी कर रहे हैं।



'द सूत्र' कर चुका पूरी रिपोर्ट का खुलासा

गौरतलब है कि 'द सूत्र' ने ही सबसे पहले खुलासा किया था कि 600 पन्ने की रिपोर्ट जमा हो चुकी है। फिर 'द सूत्र' ने ही इस रिपोर्ट के अहम तथ्य और फिर लगभग पूरी रिपोर्ट का खुलासा किया था। इसमें अहम बात है कि तत्कालीन इंजीनियर, टेंडर कमेटी में शामिल अधिकारियों के साथ ही पूर्व के कुछ अधिकारियों को भी लापरवाह बताया गया है। वहीं मुआवजा राशि 20 लाख की अनुशंसा की गई है।



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