भागीरथपुरा की घटना को लेकर केंद्र सरकार ने संभाला मोर्चा, आईसीएमआर के कोबो टूल से 5 हजार घरों का मैपिंग सर्वे

Rahul Dave | Jan 05, 2026, 13:15 IST
bhagirathpura icmr digital survey kobo tool
भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से फैली बीमारी और मौतों के बाद हालात गंभीर हैं। स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार और आईसीएमआर ने मोर्चा संभाल लिया है। पूरा मामला जानने के लिए खबर आखिरी तक पढ़ें।

5 पॉइंट में पूरा मामला समझें...



  • भागीरथपुरा में दूषित पानी से फैली बीमारी को देखते हुए केंद्र सरकार और आईसीएमआर ने मोर्चा संभाला है।
  • आईसीएमआर (ICMR) ने बीमारी ट्रैक करने के लिए डिजिटल सिस्टम एक्टिव किया।
  • कोबो टूल के जरिए 5 हजार घरों का डिजिटल सर्वे होगा।
  • अब बीमारी और इलाज का डेटा सीधे आईसीएमआर सर्वर पर पहुंचेगा।
  • दिल्ली स्तर से हर एक केस की रियल टाइम निगरानी होगी।

INDORE. भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से फैली बीमारी और मौतों की घटना को लेकर हालात गंभीर हो गए हैं। इसे देखते हुए केंद्र सरकार ने भी मोर्चा संभाल लिया है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्चने इस आउटब्रेक को ट्रैक करने के लिए अत्याधुनिक डिजिटल सिस्टम सक्रिय किया। इसका नाम कोबो टूल है।आज से क्षेत्र में युद्धस्तर पर डिजिटल सर्वे शुरू किया जा रहा है, जिसमें करीब 5 हजार घरों को कवर किया जाएगा।



बीमारी की सही तस्वीर सामने आएगी

इस सर्वे की खास बात यह है कि पहली बार बीमारी से जुड़े हर पहलू को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्ज किया जाएगा। अब तक जानकारी कागजों, फाइलों और अलग-अलग विभागों में बिखरी रहती थी। अब सीधे आईसीएमआर के सर्वर तक रियल टाइम में पहुंचेगी। इससे न सिर्फ बीमारी की सही तस्वीर सामने आएगी, बल्कि भविष्य में किसी भी चूक या लापरवाही को भी आसानी से पकड़ा जा सकेगा।



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इस तरह होगा सर्वे

कोबो टूल एक ऑनलाइन मोबाइल एप्लीकेशन है। इसे खासतौर पर स्वास्थ्य आपात स्थितियों के लिए डिजाइन किया गया है। सर्वे टीम जब किसी घर में पहुंचेगी तो मोबाइल ऐप के जरिए यह दर्ज करेगी कि घर में कोई सदस्य बीमार है या नहीं। साथ ही उसका इलाज, मरीज की स्थिति और पानी का क्लोरीनेशन दर्ज करेगी। ओआरएस व जिंक जैसी जरूरी दवाएं दी या नहीं, यह भी लिखेगी।



दिल्ली स्तर पर हर केस की निगरानी

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, एक टीम औसतन एक घंटे में तीन से चार घरों का सर्वे करेगी। इस तरह पूरे इलाके की स्वास्थ्य स्थिति को बारीकी से रिकॉर्ड किया जाएगा। यह डेटा सीधे आईसीएमआर के सिस्टम में अपलोड होगा, जिससे दिल्ली स्तर पर भी हर केस की निगरानी संभव हो सकेगी।



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600 लोगों की फोर्स

इस बड़े अभियान के लिए कुल 600 लोगों की फोर्स तैनात की गई है। इनमें 200 डॉक्टर, 200 नर्स और 200 आशा कार्यकर्ता शामिल हैं। इन सभी को 200 टीमों में बांटा गया है, जो अलग-अलग सेक्टरों में जाकर घर-घर सर्वे करेंगी। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि यह सर्वे सिर्फ आंकड़े जुटाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मौके पर ही जरूरी मेडिकल सलाह और प्राथमिक उपचार भी उपलब्ध कराया जाएगा।



भविष्य के लिए एक मॉडल

भागीरथपुरा में फैली इस बीमारी ने स्वास्थ्य तंत्र की तैयारियों पर भी सवाल खड़े किए हैं। ऐसे में आईसीएमआर का यह डिजिटल हस्तक्षेप भविष्य के लिए एक मॉडल माना जा रहा है। उम्मीद की जा रही है कि इस सर्वे से प्रशासन को बीमारी की असली वजह समझने और हालात सुधारने में मदद मिलेगी।



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