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Photograph: (THESOOTR)
BHOPAL. इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में सरकारी नल से सप्लाई हो रहे दूषित पानी ने 16 लोगों की जान ले ली। यह हादसा सिर्फ एक शहर की नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश की जल व्यवस्था पर बड़ा सवाल है। इसके बावजूद यह जनहित का मुद्दा राजनीति में वह जगह नहीं बना सका, जिसकी उम्मीद थी।
मौके से नदारद रहे कांग्रेस के बड़े चेहरे
भागीरथपुरा कांड की इतनी बड़ी घटना के बाद भी कांग्रेस के दिग्गज नेता इंदौर नहीं पहुंचे। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, कमलनाथ और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की गैर मौजूदगी साफ दिखी। जनता से जुड़े मुद्दे पर जमीन पर उतरने के बजाय कांग्रेस नेतृत्व दूर ही नजर आया।
प्रदेश अध्यक्ष की भूमिका भी सवालों के घेरे में
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी की सक्रियता भी केवल औपचारिकता तक सीमित दिखी। 16 लोगों की मौत के बाद जिस आक्रामकता की जरूरत थी, वह नजर नहीं आई। ऐसा लगा मानो यह मामला पार्टी की प्राथमिकता में ही नहीं है।
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मंत्री विजयवर्गीय तक सिमटी कांग्रेस की राजनीति
कांग्रेस ने पूरे मामले को सरकार को घेरने के बजाय मंत्री कैलाश विजयवर्गीय तक सीमित कर दिया, जबकि दूषित पानी की सप्लाई सिर्फ इंदौर नहीं, पूरे प्रदेश की शहरी और ग्रामीण समस्या है। पानी की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें पहले भी सुर्खियों में रही हैं।
दिग्विजय सिंह आमतौर पर इंदौर के हर छोटे-बड़े मुद्दे पर सक्रिय रहते हैं। कैलाश विजयवर्गीय से उनकी व्यक्तिगत मित्रता किसी से छिपी नहीं है। ऐसे में इस गंभीर मामले पर उनकी खामोशी कई सवाल खड़े कर रही है।
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राहुल गांधी के ट्वीट के बाद हरकत में आई कांग्रेस
कांग्रेस की सक्रियता राहुल गांधी के ट्वीट के बाद दिखी। इस देरी ने पार्टी की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। जनता के साथ खड़े होने का “गोल्डन चांस” कांग्रेस के हाथ से निकलता दिखा।
कई नेताओं ने सोशल मीडिया पर पोस्ट डालकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान ली, लेकिन इससे जमीनी स्तर पर पीड़ित परिवारों को कोई राहत नहीं मिली। राजनीति सिर्फ ट्वीट तक सिमट कर रह गई।
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भाजपा के दिग्गज नेता भी कटघरे में
कांग्रेस ने पलटवार करते हुए भाजपा पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि भाजपा के कई प्रदेश और केंद्रीय स्तर के जिम्मेदार नेता भी मौके पर नहीं पहुंचे। सोशल मीडिया पर संवेदना तक व्यक्त नहीं की गई।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि भाजपा की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती सहित कुछ नेताओं ने सिर्फ औपचारिक पोस्ट कर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया, जबकि 16 मौतों जैसी घटना पर ठोस पहल की जरूरत थी।
क्या जनता के मुद्दों पर साथ हैं दोनों दल?
इंदौर हादसे के बाद कांग्रेस और भाजपा, दोनों की भूमिका सवालों के घेरे में है। न विपक्ष आक्रामक दिखा, न सत्ता पक्ष संवेदनशील। ऐसे में जनता के बीच यह धारणा मजबूत हो रही है कि बड़े मुद्दों पर राजनीतिक चुप्पी एक जैसी है।
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राजनीति हावी, संवेदना गायब
इंदौर की घटना ने सरकार, सिस्टम और विपक्ष- तीनों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। जनता को उम्मीद थी कि कोई तो सड़क पर उतरेगा, आवाज बनेगा, लेकिन इस त्रासदी में सबसे ज्यादा जो गायब रहा, वह था राजनीतिक संकल्प और संवेदना।
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