भागीरथपुरा कांड में अधिकारियों पर गैर इरादतन हत्या केस के परिवाद, लेकिन टेंडर को लेकर तथ्य गलत
INDORE. इंदौर भागीरथपुरा में गंदे पानी से अब तक 20 की मौत की बात सामने आ चुकी है। वहीं अस्पताल में 446 लोग भर्ती हो चुके हैं, जिसमें से 396 ठीक हो गए और 50 अभी भी भर्ती है।
इस मामले में विविध मुद्दों को लेकर हाईकोर्ट में अलग-अलग जनहित याचिकाएं दायर है। इसमें सुनवाई जारी है और सीएस (मुख्य सचिव) से जवाब मांगा गया है। भागीरथपुरा के रहवासी ने अब अधिकारियों की जिम्मेदारी बताते हुए जिला कोर्ट में परिवाद दायर किया है।
किसने दायर किया परिवाद
यह परिवाद मूल रूप से गंजबासौदा जिला विदिशा निवासी और अभी भागीरथपुरा में रह रहे रामू सिंह ने लगाया गया है। अधिवक्ता दिलीप नागर के जरिए यह केस लगाया गया है। इसमें इन मौतों और घटना के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर केस की मांग की गई है।
परिवाद में कलेक्टर शिवम वर्मा, तत्कालीन निगमायुक्त दिलीप यादव, रोहित सिसोनिया, संजीव श्रीवास्तव और अन्य अधिकारी शामिल हैं। इन पर बीएनएस धारा 105, 106, 125 व 271 का केस करने की मांग है। यह धाराएं हत्या, गैर इरादतन हत्या, लापरवाही काम जैसे अपराधों की है।
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यह कहा गया है केस में
इस केस के परिवाद में कहा गया है कि तीन साल से इस क्षेत्र में दूषित पानी की समस्याएं हैं। इसके लिए 25 नवंबर 2022 को 2.38 करोड़ से पानी के पाइपलाइन काम का एमआईसी में प्रस्ताव पास हुआ था। लेकिन इसके बाद भी समय पर कदम नहीं उठाए गए, जिससे घटना हुई और लोगों की जान गई। यह जिम्मेदारों द्वारा की गई लापरवाही, आपराधिक उपेक्षा की गई है।
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टेंडर को लेकर तथ्य सही नहीं, दो अलग काम
दरअसल टेंडर को लेकर एक तथ्य गलत जा रहा है। जो पाइपलाइन का काम 2.38 करोड़ का MIC में 25 नवंबर 2022 में पास हुआ, वह तो टेंडर हो चुका है और काम भी।
भागीरथपुरा में दो चरणों में काम होना था। इसमें पाइपलाइन बदलनी थी, क्योंकि यह लाइन 1997 से लगी थी और खराब हो रही थी। पहले चरण में जिसका संकल्प प्रस्ताव नंबर 106, नवंबर 2022 में हुआ था। इसमें 3 फरवरी 2023 को तत्कालीन अपर आयुक्त और फिर 6 फरवरी 2023 में महापौर ने मंजूर कर लिया था। यह काम हो भी गया।
इसके बाद दूसरे चरण में एरिया के 40 फीसदी लाइन को और बदलने का काम होना था। यह भी 2.40 करोड़ का था। इसके लिए 8 अगस्त 2025 को टेंडर हुए जो 15 सितंबर 2025 में ओपन होना था। लेकिन इसी दौरान बात आई कि अमृत 2.0 आ रहा है, इसमें केंद्र से राशि मिलेगी। इसमें बड़े ठेकेदार के जरिए काम कराया जा सकता है। इसलिए ओवरलेपिंग नहीं हो इस टेंडर को रोक लिया गया।
भागीरथपुरा की डीपीआर अमृत 2.0 के तहत स्वीकृत होकर टेंडर स्तर की कार्रवाई प्रचलन में होकर स्वीकृती की स्टेज पर थी। लेकिन जब यह प्रोजेक्ट में देरी हुई तो महापौर ने कहा कि टेंडर को किया जाए। इसी बीच प्रभारी अधिकारी अभिलाष मिश्रा ट्रांसफर हुए और सितंबर में आईएएस रोहित सिसोनिया आए। अमृत 2.0 योजना के कारण फाइल अटकी रही। लेकिन 29 दिसंबर को जब घटना सामने आई तो फिर आननफानन में फाइल तेजी से चली और दो दिन में टेंडर ओपन कर वर्कआर्डर जारी किए गए।