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इंदौर के भागीरथपुरा में गंदे पानी का कांड सामने आने के बाद 20 की मौत हो चुकी हैं। वहीं 429 अस्पताल में भर्ती हो चुके हैं। नगर निगम की टीम बीते 10 दिनों से वहां लीकेज पता करने, सुधार के लिए और क्लोरिनेशन करने में जुटी है। अब इसमें विविध जांच के बाद सामने आया है कि यह पानी आखिर जहर बना कैसे। द सूत्र इसका खुलासा कर रहा है।
पानी में फैक्ट्री का दूषित केमिकल नहीं
पहले आशंका थी कि पानी में फैक्ट्री का दूषित पानी हो सकता है। इसमें कोई केमिकल होगा जिसके कारण यह जहर बन गया। लेकिन निगम द्वारा जो पानी के सैंपल की जांच कराई गई है इसमें, हैवी मैटल्स नहीं आए हैं।
इसका मतलब यह कारण साफ है कि इसमें कोई केमिकल नहीं है। न ही पीएच लेवल, क्लोराइड, टीडीएस स्तर पर सैंपल फेल हुए, यह सभी मानक सही पाए गए।
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बोरिंग ने पानी को ऐसे बनाया जहर
पानी की जांच में बैक्टीरिया पाया गया है। यह दूषित पाया गया है। एरिया में 400 निजी और 116 सरकारी कुल 516 बोरिंग हैं। इसमें करीब 60 की जांच की गई तो 35 के सैंपल फेल हुए हैं। इसमें घातक फीकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया पाया गया। लेकिन जांच में सबसे बड़ी एक चौंकाने वाली बात दूसरी थी।
यदि किसी बोरिंग में पानी खराब था तो उस एरिया के ही लोगों को ही बीमार होना था, फिर यह महामारी की तरह पूरे एरिया में क्यों फैला। इसका कारण है कि कई बोरिंग के कनेक्शन में पाया गया कि इसकी लाइन नर्मदा की मेन पाइपलाइन से जुड़ी हुई थी। जैसे ही यह बोरिंग का पानी किसी सीवरेज लाइन के संपर्क में आने से दूषित हुआ है।
वहीं इन बोरिंग ने नर्मदा की मेन लाइन से हो रही नर्मदा सप्लाई को भी दूषित कर दिया। इसके चलते इन बोरिंग के जल ने पूरे नर्मदा पानी को ही दूषित कर मारा। इसके चलते यह घातक कोलिफार्म बैक्टीरिया पूरे एरिया में फैल गया। जिसका पानी पीकर हजारों लोग बीमार हुए और कई की मौत हो गई।
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पार्षद की गली की बोरिंग में भी मिला बैक्टीरिया
एरिया के जिन बोरिंग में घातक बैक्टीरिया मिला है। इसमें खुद जोन 4 के वार्ड 11 भागीरथपुरा के पार्षद कमल बाघेला की गली की बोरिंग भी है। पार्षद की गली में बोरिंग के सैंपल में कोलिफर्म बैक्टीरिया की संख्या 86 आई है जो जीरो होना चाहिए थी।
वहीं सबसे ज्यादा घातक बोरिंग का पानी एरिया के मकान नंबर 1026 न्यू बस्ती, पटेल किराना वाली गली की बोरिंग में मिला। इसमें बैक्टीरिया की संख्या 350 मिली है। यानी यहां के पानी का एक घूंट ही बीमार करने के लिए काफी था। विविध सैंपल में यह बैक्टीरिया की संख्या 20 से लेकर 360 तक आई जो जीरो होना चाहिए थी। इसी बोरिंग के पानी ने ही पूरे नर्मदा के पानी को खराब किया।
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इसके साथ ही मैन लाइन के ऊपर बना चौकी का टॉयलेट
इसके पहले एक और कारण सामने आ चुका था। वह था मेन टंकी के पास ही बनी पुलिस चौकी का टॉयलेट। यह चौकी अवैध थी, फिर यहां टॉयलेट बनाया गया और वह भी बिना सैप्टिक चैंबर के।
इसके चलते चौकी का पूरा मल-मूत्र नीचे जा रही मेन लाइन में कहीं लीकेज होने पर लगातार मिलता रहा और यह भी विविध लाइन से होकर घरों मे पहुंच गया।
घरों में पहुंच रहे नर्मदा के पानी के सैंपल में भी बैक्टीरिया पाया गया है। यानी यह पानी भी सीवरेज के कारण दूषित हो रहा था। इन कारणों ने पानी को जहरीला बना दिया, जिसके कारण यह त्रासदी हुई।
बोरिंग के कनेक्शन काट रहे हैं
इंदौर जिला प्रशासन ने पहले इन बोरिंग पर रेड मार्क कर इनके पानी के उपयोग पर रोक लगा दी। फिर इसे साफ करने के लिए क्लोरीन का फ्लश किया। लेकिन अभी भी यह पानी पीने योग्य नहीं है। बचाव के लिए इन बोरिंग के कनेक्शन काटे जा रहे हैं और जिन बोरिंग के सैंपल घातक आए थे उन सभी के कनेक्शन काट दिए गए हैं। इसके साथ ही इनके नर्मदा लाइन में जुड़ने की लाइन को भी काटा गया है। जिससे भविष्य में भी यह नर्मदा के पानी को किसी तरह से दूषित नहीं कर पाएं। भागीरथपुरा में दूषित पानी की सप्लाई | नगर निगम इंदौर
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