1000 करोड़ से बन रहा सेंट्रल विस्टा, फिर भी कई विभागों के लिए 13 नए भवन बनाने की तैयारी
News In Short
- भोपाल के अरेरा हिल्स में 1000 करोड़ रुपए से सेंट्रल विस्टा जैसा कॉम्प्लेक्स बनेगा।
- इसके बावजूद 13 विभाग अलग-अलग 672 करोड़ रुपए के नए भवन बनाने की तैयारी में हैं।
- 33 विभागों के 59 कार्यालय ही सेंट्रल विस्टा में शिफ्ट होने को राजी हैं।
- वन, पंचायत और उद्योग जैसे बड़े विभाग पहले ही नए भवनों में जा चुके हैं।
- एसीएस संजय दुबे ने कहा कि 9 विभागों के नए भवन प्रस्ताव रोके जाएंगे।
News In Detail
भोपाल में बनेगा MP का सेंट्रल विस्टा
भोपाल के अरेरा हिल्स में मध्यप्रदेश सरकार एक बड़ा प्रशासनिक कॉम्प्लेक्स बनाने जा रही है। इसे दिल्ली के सेंट्रल विस्टा की तर्ज पर तैयार किया जाएगा। करीब एक लाख 60 हजार वर्गमीटर में फैले इस स्टेट एडमिनिस्ट्रेटिव कॉम्प्लेक्स पर 1000 करोड़ रुपए खर्च होंगे।
सरकार का दावा है कि इस कॉम्प्लेक्स में ज्यादातर सरकारी दफ्तर एक ही छत के नीचे होंगे। इससे प्रशासनिक कामकाज आसान होगा और आम नागरिकों को अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
672 करोड़ के 13 नए भवन पर उठे सवाल
यहीं से असली सवाल शुरू होता है। एक तरफ 1000 करोड़ का मेगा कॉम्प्लेक्स बन रहा है। दूसरी तरफ विभिन्न विभागों के लिए 672 करोड़ रुपए से 13 अलग भवन भी प्रस्तावित हैं। इन दोनों खर्चों को एक साथ देखें तो सवाल उठता है कि क्या यह सरकारी पैसे का सही इस्तेमाल है।
प्रस्तावित 13 भवनों में खनिज भवन पर 35 करोड़ रुपए, खाद्य भवन पर 51 करोड़ रुपए, शिक्षा भवन पर 100 करोड़ रुपए, वल्लभ भवन नवीनीकरण पर 86 करोड़ रुपए और बाकी 9 भवनों पर करीब 400 करोड़ रुपए खर्च होने हैं।
33 विभाग राजी, बड़े विभाग नहीं आएंगे
जुलाई 2025 में सरकार ने हाउसिंग बोर्ड को यह प्रोजेक्ट सौंपा था। साथ ही, 15 दिन में जानकारी मांगी थी कि कौन-कौन से विभाग शिफ्ट होंगे। जीएडी (General Administration Department) को 58 विभागों के 84 कार्यालयों से पत्र मिले। इनमें से 33 विभागों के 59 कार्यालय शिफ्ट होने को तैयार हैं। इन्होंने कुल एक लाख तीन हजार वर्गमीटर जगह मांगी है।
लेकिन छह कार्यालय रेनोवेशन और प्रस्तावित भवन के कारण सहमत नहीं हुए। 19 अन्य विभागों के पास पहले से ही अपने स्वतंत्र और पर्याप्त दफ्तर हैं।
शिफ्ट होने को तैयार हैं ये विभाग
जो विभाग सेंट्रल विस्टा में जाने को राजी हैं उनमें विधि, कृषि, जेल, हॉर्टिकल्चर, उच्च शिक्षा, सहकारिता, राजस्व, नापतौल, रेशम, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, वक्फ बोर्ड, हज कमेटी, एससी-विकास और पिछड़ा वर्ग व अल्पसंख्यक कल्याण जैसे विभाग शामिल हैं।
लेकिन वन, पंचायत व ग्रामीण विकास, उद्योग यानी एमपीआईडीसी (Madhya Pradesh Industrial Development Corporation), महिला एवं बाल विकास, पीडब्ल्यूडी (Public Works Department), पीएचई (Public Health Engineering) और स्टेट जीएसटी (Goods and Services Tax) जैसे बड़े विभाग पहले ही अपने नए भवनों में जा चुके हैं। इन्हें अब वापस लाना संभव नहीं।
मंत्रालय में करोड़ों खर्च, जगह फिर भी खाली
यह पहली बार नहीं है जब सरकारी इमारतों पर इतना पैसा खर्च हुआ हो। हाल के वर्षों में वन भवन पर 180 करोड़ रुपए, विकास भवन यानी पंचायत विभाग पर 78 करोड़ रुपए, नगर निगम मुख्यालय पर 40 करोड़ रुपए और एमपीआईडीसी अरेरा हिल्स पर 38 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं।
इसके अलावा 19 विभागों के लिए मंत्रालय की पुरानी बिल्डिंग के आधुनिकीकरण पर 86 करोड़ रुपए और लग रहे हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि मंत्रालय के दो नए ब्लॉक में अभी भी काफी जगह खाली पड़ी है।
9 भवनों के प्रस्ताव रोकेंगे- ACS
अपर मुख्य सचिव नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग संजय दुबे ने इस मामले पर अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि यह सही है कि कई सरकारी विभाग खुद के दफ्तरों में हैं। इन्हें यहां लाना संभव नहीं है। लेकिन ऐसे नौ विभागों के प्रस्ताव रोकेंगे जिनके नए भवन बनने हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि सतपुड़ा और विंध्याचल के सभी दफ्तर कॉम्प्लेक्स में आएंगे। जनता की सुविधा के लिए बैंक, वित्तीय संस्थाएं और व्यावसायिक संस्थान भी यहां लाने की योजना है। शिक्षा की नई इंटीग्रेटेड बिल्डिंग भी इसी कॉम्प्लेक्स में बनाने की बात उन्होंने कही।
सबसे बड़ा सवाल...
बड़े विभाग पहले ही जा चुके हैं। जो बचे हैं उनमें से भी कई नए दफ्तर बनाने में लगे हैं। ऐसे में यह मेगा कॉम्प्लेक्स आखिर किससे भरेगा? 1000 करोड़ रुपए का यह ढांचा तभी सार्थक होगा जब इसमें वाकई में सभी जरूरी विभाग एक साथ काम करें। वरना यह सिर्फ एक और खाली सरकारी इमारत बनकर रह जाएगी।
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