भोपाल के सेंट्रल विस्टा का बदला प्लान, 1600 करोड़ का प्रोजेक्ट बिना सरकारी खर्च के होगा तैयार
Aman Vaishnav | Oct 20, 2026, 11:19 IST
भोपाल सेंट्रल विस्टा के तहत सतपुड़ा-विंध्याचल की जगह बनेंगे नए सी-टाइप और आधुनिक कमर्शियल टावर
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में बनने वाले सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के पुराने प्लान में बड़ा बदलाव किया गया है। अब इस पूरे प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड पहली बार एक एसपीवी (Special Purpose Vehicle) बनाएगा। इस नए मॉडल की खास बात यह है कि सरकार को प्रोजेक्ट के लिए अपनी जेब से पैसा खर्च नहीं करना पड़ेगा।
बता दें कि नगरीय विकास विभाग (Urban Development Department) और मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड(MP Housing Board) ने मिलकर इस प्रोजेक्ट की नई डीपीआर (DPR) तैयार कर ली है। इसे बहुत जल्द मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली साधिकार समिति के सामने मंजूरी के लिए रखा जाएगा। मंजूरी मिलते ही एसपीवी का गठन होगा और टेंडर जारी कर दिए जाएंगे।
इस प्रोजेक्ट (Bhopal Central Vista Project) की सबसे खास बात यह है कि 1600 करोड़ रुपए के इस काम के लिए सरकार को अपने बजट से एक भी रुपया खर्च नहीं करना पड़ेगा। इसके लिए मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड पहली बार कंपनी एक्ट के तहत एक अलग कंपनी बनाएगा। इसे स्पेशल पर्पज व्हीकल (Special Purpose Vehicle) कहा जाता है। यही कंपनी प्रोजेक्ट के निर्माण और संचालन का काम संभालेगी।
• फंडिंग मॉडल: पहले सारा पैसा सरकार खर्च करने वाली थी। अब यह पूरा काम एसपीवी अपने दम पर करेगी।
• टावरों की संख्या: पहले दो चरणों में 13 टावर बनने थे। अब पहले 2 सी-टाइप टावर और फिर 2 कमर्शियल टावर बनेंगे।
• कनेक्टिविटी: पहले ऊपर स्काई वॉक और परगोला बनना था, जिसे हटाकर अब जमीन के नीचे सब-वे बनाया जाएगा।
• हरियाली का दायरा: इलाके में ग्रीन कवर को 5.84 हेक्टेयर से बढ़ाकर सीधे 20 हेक्टेयर तक किया जाएगा।
वर्तमान में विंध्याचल और सतपुड़ा भवनों का कुल निर्मित क्षेत्र 76 हजार 500 वर्ग मीटर है। नए प्लान में इसे योजनाबद्ध तरीके से बदला जाएगा।
पहले चरण में दो नए सी-टाइप भवन बनाए जाएंगे। इनका क्षेत्रफल मौजूदा भवनों से लगभग डेढ़ गुना यानी 1 लाख वर्ग मीटर से भी ज्यादा होगा। सतपुड़ा और विंध्याचल भवनों के सभी सरकारी दफ्तरों को बिना किसी रुकावट के पहले इन दोनों भवनों में शिफ्ट किया जाएगा। दोनों भवनों को जोड़ने के लिए स्काई वॉक की जगह अंडरग्राउंड सब-वे बनेगा जो सीधे मंत्रालय से भी जुड़ा रहेगा।
जब सारे दफ्तर नए भवनों में शिफ्ट हो जाएंगे, उसके बाद ही सतपुड़ा और विंध्याचल भवनों को तोड़ा जाएगा। इनकी जगह पर एसपीवी दो बड़े कमर्शियल टावर बनाएगी। इन दोनों इमारतों का मुंह वल्लभ भवन (Vallabh Bhawan Bhopal) या डायरेक्टोरेट की तरफ न होकर पीछे की ओर रहेगा।
सतपुड़ा की जगह बनने वाले भवन के सामने एक कनेक्टिंग रोड बनेगी। जबकि विंध्याचल के पीछे जेल रोड होने की वजह से वहां कोई नई सड़क नहीं बनाई जाएगी। इस बात का विशेष ध्यान रखा जाएगा कि किसी भी नई इमारत की ऊंचाई वल्लभ भवन से ज्यादा न हो।
भविष्य की जरूरतों को देखते हुए कार्यालयों के लिए दो नए ब्लॉक और बनाए जाएंगे। साथ ही चौथे चरण में दो और ब्लॉक खड़े करने के लिए पर्याप्त जमीन सुरक्षित रखी जाएगी।
इस पूरे प्रोजेक्ट (भोपाल सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट) में पर्यावरण और खूबसूरती का खास ध्यान रखा गया है। क्षेत्र में हरियाली का दायरा 5.84 हेक्टेयर से बढ़ाकर सीधे 20 हेक्टेयर किया जाएगा। मंत्रालय के सामने बने गार्डन के स्तर को और ऊंचा उठाकर इसे पूरी तरह वर्ल्ड क्लास बनाया जाएगा।
इस गार्डन को मैसूर के प्रसिद्ध वृंदावन गार्डन की तर्ज पर तैयार किया जाएगा। इसमें दुर्लभ पेड़-पौधे लगाए जाएंगे। चारों तरफ घनी हरियाली होगी और आकर्षक म्यूजिकल फाउंटेन लगाए जाएंगे। सबसे अच्छी बात यह है कि यह खूबसूरत गार्डन आम नागरिकों के घूमने के लिए भी खुला रहेगा।
बिना सरकारी पैसे के कैसे बनेगा 1600 करोड़ का प्रोजेक्ट?
- बैंक से लोन: एसपीवी बैंकों और वित्तीय संस्थानों से किस्तों में लोन लेगी। इसे 30 साल में चुकाया जाएगा।
- किराया और बिक्री से कमाई: पहले चरण के सी-टाइप भवनों में आने वाले सरकारी दफ्तरों से किराया लिया जाएगा। इसके बाद बनने वाले दो कमर्शियल टावरों में ऑफिस स्पेस को बेचा जाएगा और किराए पर दिया जाएगा।
- देखरेख के लिए अलग व्यवस्था: एक खास सोसायटी बनाई जाएगी, जो सभी सरकारी कार्यालयों और कॉर्पोरेट कंपनियों से तय शुल्क लेकर पूरे परिसर की देखरेख करेगी।
पुराने और नए प्लान में मुख्य अंतर
• टावरों की संख्या: पहले दो चरणों में 13 टावर बनने थे। अब पहले 2 सी-टाइप टावर और फिर 2 कमर्शियल टावर बनेंगे।
• कनेक्टिविटी: पहले ऊपर स्काई वॉक और परगोला बनना था, जिसे हटाकर अब जमीन के नीचे सब-वे बनाया जाएगा।
• हरियाली का दायरा: इलाके में ग्रीन कवर को 5.84 हेक्टेयर से बढ़ाकर सीधे 20 हेक्टेयर तक किया जाएगा।
तीन चरणों में ऐसे बदलेगी पूरे इलाके की तस्वीर
पहला चरण: नए टावर का निर्माण
दूसरा चरण: कमर्शियल टावर और नई सड़कें
सतपुड़ा की जगह बनने वाले भवन के सामने एक कनेक्टिंग रोड बनेगी। जबकि विंध्याचल के पीछे जेल रोड होने की वजह से वहां कोई नई सड़क नहीं बनाई जाएगी। इस बात का विशेष ध्यान रखा जाएगा कि किसी भी नई इमारत की ऊंचाई वल्लभ भवन से ज्यादा न हो।
तीसरा और भविष्य का चरण: आगे का विस्तार
मंत्रालय के सामने मैसूर के वृंदावन जैसा वर्ल्ड क्लास गार्डन
इस गार्डन को मैसूर के प्रसिद्ध वृंदावन गार्डन की तर्ज पर तैयार किया जाएगा। इसमें दुर्लभ पेड़-पौधे लगाए जाएंगे। चारों तरफ घनी हरियाली होगी और आकर्षक म्यूजिकल फाउंटेन लगाए जाएंगे। सबसे अच्छी बात यह है कि यह खूबसूरत गार्डन आम नागरिकों के घूमने के लिए भी खुला रहेगा।
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