भटक रहे जरूरतमंद, ओल्ड एज होम में लग्जरी सुविधा का दिखावा

Sanjay Sharma | Feb 12, 2026, 20:01 IST
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मध्य प्रदेश के भोपाल में बना लक्जरी ओल्ड एज होम 50 हजार रुपए किराए के कारण खाली पड़ा है। सरकार ने 24 करोड़ खर्च किए, लेकिन वृद्धजन इस महंगे आश्रम में नहीं रह रहे।

BHOPAL. सामाजिक न्याय और सरोकार पर मध्य प्रदेश सरकार ने 24 करोड़ रुपए पानी में बहा दिए हैं। वृद्धजनों के लिए भोपाल के लिंक रोड नंबर 2 पर बनाया गया ओल्ड एज होम दो महीने से खाली पड़ा है। लोकार्पण के बाद यहां केवल एक दंपती ही रहने पहुंचे हैं। ओल्ड एज होम का अत्यधिक किराया इसकी वजह बना है।



यह मध्य प्रदेश का पहला पेड वृद्धाश्रम है। इसके लिए वृद्धजन को हर माह करीब 50 हजार रुपए किराया चुकाना होगा। सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के ओल्ड एज होम में फाइव स्टार होटल जैसी सुविधाएं हैं।



महंगा किराया बड़ी चुनौती

भोपाल में बने इस लक्जरी ओल्ड एज होम में सिंगल बेड रूम का मासिक किराया 45 हजार 990 से 49 हजार 990 रुपए है। डबल बेड रूम का किराया 38 हजार 490 से 43 हजार 490 रुपए है। ओल्ड एज होम 5 एकड़ भूमि पर बना है, जिसमें 56 बुजुर्गों के रहने की व्यवस्था है। कमरों में बालकनी, बाथरूम, एयर कंडीशनर, टीवी, फ्रिज, माइक्रोवेब, ड्राई किचन जैसी सुविधाएं दी गई हैं। वहीं फिजियोथैरेपी सेंटर, पंचकर्म, आपातकालीन चिकित्सा 24 घंटे डॉक्टर की सेवा भी उपलब्ध है।



प्रदेश में चल रहे 5 फ्री वृद्धाश्रम

ओल्ड एज होम का संचालन सेवा भारती द्वारा किया जा रहा है जबकि पहले से 5 वृद्धाश्रम निशुल्क चल रहे हैं। इन्हें सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत संचालित किया जा रहा है। वहीं राजधानी में शुरू किए गए ओल्ड एज होम में रहने भारी भरकम किराया रखा गया है। इस वजह से कोई आगे नहीं आ रहा और आश्रम पर भारी भरकम खर्च हो रहा है।



किराया सुनकर हट रहे पीछे

भोपाल में सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के ओल्ड एज होम में 12 सिंगल बेड और 22 डबल बेड रूम हैं। इनमें 56 बुजुर्ग रह सकते हैं। वृद्धाश्रम में रहने के लिए कई वृद्धजन जानकारी लेने आ चुके हैं, लेकिन किराया सुनकर वापस ही नहीं लौटते। ओल्ड एज होम प्रबंधन के अनुसार 25 से अधिक वृद्धजन प्रबंधन के संपर्क में हैं।



विभाग की करोड़ों की बर्बादी

सामाजिक न्याय विभाग ने पहले वृद्धाश्रम बनाने पर 24 करोड़ रुपए खर्च कर दिए हैं। अब हर महीने इसकी व्यवस्थाओं पर लाखों का खर्च आ रहा है। इसके बावजूद वृद्धजन इस आश्रम में रहने में दिलचस्पी ही नहीं दिखा रहे हैं।



यानी करोड़ों की लागत का आश्रम और सुविधाएं धूल खा रही हैं। जबकि सैंकड़ों बेसहारा वृद्ध भोपाल में स्टेशन, बस स्टैंड और सड़कों पर जीवन काट रहे हैं। इस स्थिति में ओल्ड एज होम बनाने का अदूरदर्शी निर्णय सरकारी खजाने की बर्बादी बनकर रह गया है।



आश्रम में केवल एक दंपती

सामाजिक न्याय विभाग के सहायक संचालक रामविलास सैमिल का कहना है कि ओल्ड एज होम में सभी सुविधा उपलब्ध हैं। यहां वृद्धजनों की देखरेख के सभी इंतजाम उपलब्ध हैं। इसका संचालन एक संस्था के माध्यम से किया जा रहा है। सुविधाओं के नजरिए से किराया ज्यादा नहीं है। हांलाकि वे इतना अधिक किराया तय करने के पीछे का आधार नहीं बता सके। वहीं भारी भरकम लागत से बने वृद्धाश्रम में डेढ़ महीने से किसी वृद्ध के नहीं आने के सवाल पर भी वे जानकारी नहीं दे सके।



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