भोपाल में लगा देश का पहला एल्गी ट्री, एक अकेली मशीन देगी 25 पेड़ों जितनी ऑक्सीजन

Anjali Dwivedi | May 11, 2026, 18:45 IST
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भोपाल में प्रदूषण से लड़ने के लिए भारत का पहला एल्गी ट्री लगाया गया है। यह आधुनिक मशीन हवा से कार्बन सोखकर शुद्ध ऑक्सीजन छोड़ती है। घनी आबादी वाले इलाकों के लिए यह तकनीक एक बड़ा वरदान साबित होगी।

झीलों के नगरी भोपाल ने पर्यावरण बचाने की दिशा में एक नया कमाल किया है। राजधानी के अशोका गार्डन में भारत का पहला एल्गी ट्री लगाया गया है। यह अनोखा पेड़ स्वामी विवेकानंद पार्क में लगाया गया है। यह तकनीक शहर की हवा को शुद्ध करने में जादुई भूमिका निभाएगी। देखने में यह मशीन काफी आधुनिक और अलग नजर आती है। लेकिन इसका असली काम प्रदूषण को जड़ से मिटाना है।



एल्गी ट्री कैसे काम करता है?

एल्गी ट्री कोई मिट्टी में उगने वाला सामान्य पेड़ नहीं है। विज्ञान की भाषा में इसे फोटो-बायोरिएक्टर कहा जाता है। इसके भीतर कांच का एक बड़ा टैंक लगा होता है। इस टैंक में खास किस्म के शैवाल और पानी भरा है। यह मशीन सूर्य की रोशनी का उपयोग कर हवा साफ करती है। यह प्रकाश संश्लेषण की प्राकृतिक प्रक्रिया को बहुत तेज कर देती है।



यह मशीन केवल गैस ही नहीं बल्कि धूल भी साफ करती है। यह हवा से हानिकारक सूक्ष्म कणों (PM2.5) को सोख लेती है। बढ़ते शहरीकरण के कारण हवा लगातार जहरीली (वायु प्रदूषण) होती जा रही है। ऐसे में एल्गी ट्री लोगों को शुद्ध हवा देने का काम करेगा। भोपाल की इस सफलता को अब पूरे देश में सराहा जा रहा है। जल्द ही इसे अन्य बड़े शहरों में भी लगाया जाएगा।



स्मार्ट सिटी भोपाल की नई पहल: हवा से जहर सोखेगा 'एल्गी ट्री - Haribhoomi

इममें छिपी है 25 बड़े पेड़ों की ताकत

एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह मशीन बहुत ज्यादा शक्तिशाली है। एक एल्गी ट्री 25 बड़े पेड़ों के बराबर काम करता है। यह साल भर में करीब 1.5 टन कार्बन डाइऑक्साइड सोख सकता है। यह हवा में मौजूद जहरीली गैसों को तुरंत खत्म कर देता है। शहर के घने इलाकों में पेड़ लगाने की जगह कम होती है। ऐसी जगहों के लिए यह तकनीक सबसे अच्छा विकल्प है।



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कैसे चलता है यह ईको-फ्रेंडली पेड़

भोपाल स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत इसे तैयार किया गया है। इसे बनाने में 50 एक्सपर्ट्स की टीम ने कड़ी मेहनत की है। इस प्रोजेक्ट को पूरा करने में करीब 2 साल का समय लगा। यह मशीन पूरी तरह से सौर ऊर्जा पर आधारित है। इसमें बिजली की खपत की कोई भी चिंता नहीं है। यह पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना उसे बचाने का काम करती है।



भोपाल हमेशा से पर्यावरण के प्रति काफी सजग रहा है। इस नई पहल ने शहर का गौरव और बढ़ा दिया है। अब दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों में भी इसे लगाने की चर्चा है। यह भविष्य के स्मार्ट शहरों के लिए एक शानदार शुरुआत है। राजधानी के लोग इस नए पेड़ को देखने पार्क पहुंच रहे हैं। यह विज्ञान और प्रकृति के मिलन का एक अद्भुत उदाहरण है।



FAQ

  1. एल्गी ट्री असल में क्या है और यह सामान्य पेड़ों से कैसे अलग है?
    एल्गी ट्री एक कृत्रिम फोटो-बायोरिएक्टर है जिसमें सूक्ष्म शैवाल (Algae) का उपयोग किया जाता है। सामान्य पेड़ों को बढ़ने में सालों लगते हैं और उन्हें मिट्टी व अधिक जगह चाहिए होती है। इसके विपरीत, एल्गी ट्री बहुत कम जगह घेरता है और प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया को कई गुना तेजी से पूरा करता है। यह एक ही स्थान पर खड़े होकर 25 मैच्योर पेड़ों जितनी ऑक्सीजन पैदा करने की क्षमता रखता है।
  2. एल्गी ट्री शहरी प्रदूषण को कम करने में कितनी प्रभावी है?
    यह तकनीक शहरी इलाकों के लिए अत्यंत प्रभावी है क्योंकि यह सालाना लगभग 1.5 टन कार्बन डाइऑक्साइड को हवा से हटा सकती है। इसके अलावा, यह हवा में तैरते धूल के सूक्ष्म कणों (PM2.5 और PM10) को भी सोख लेती है। घनी आबादी वाले क्षेत्रों या औद्योगिक इलाकों में जहां जगह की कमी है, वहाँ यह मशीन शुद्ध हवा का एक स्थायी स्रोत बन सकती है।

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