भोपाल और उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन में नए स्टाफ की तैयारी तेज, डेपुटेशन, सीधी भर्ती और आउटसोर्सिंग से भरे जाएंगे इतने पद

Aman Vaishnav | Oct 21, 2026, 10:26 IST
भोपाल और उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र में विकास कार्यों और नई भर्तियों की तैयारी तेज।
भोपाल और उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन में काम तेजी से पूरा करने के लिए 250 नए पदों पर भर्ती की जाएगी। इन पदों पर डेपुटेशन, सीधी भर्ती और आउटसोर्सिंग के जरिए नियुक्तियां करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसके अलावा, दोनों रीजन में सीईओ के पद पर अलग आईएएस अधिकारियों को तैनात करने पर भी विचार किया जा रहा है।

मध्य प्रदेश के दोनों बड़े मेट्रोपॉलिटन रीजन को जल्द मिलेगा नया स्टाफ

बता दें कि इस स्टाफ में सबसे बड़े पद यानी (CEO) से लेकर इंजीनियर तक शामिल होंगे। इसके लिए पूरा प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। अब बस कैबिनेट से हरी झंडी मिलने की देर है। इसके तुरंत बाद भर्ती की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।



किन तरीकों से होगी कर्मचारियों की भर्ती?

सरकार नए कर्मचारियों को काम पर रखने के लिए तीन आसान रास्ते अपनाने जा रही है।



  • डेपुटेशन (Deputation): यानी दूसरे सरकारी महकमों से अनुभवी कर्मचारियों को यहां बुलाना।
  • सीधी भर्ती (Direct Recruitment): नए योग्य उम्मीदवारों को सीधे नौकरी देना।
  • आउटसोर्सिंग (Outsourcing): निजी एजेंसियों के जरिए जरूरत के हिसाब से स्टाफ रखना।

इंजीनियरिंग वर्ग के जानकारों को नगरीय विकास एवं आवास विभाग (Urban Development and Housing Department) और लोक निर्माण विभाग यानी पीडब्ल्यूडी (PWD) से यहां लाया जा सकता है। हाल ही में इस पूरे मामले पर बड़े अधिकारियों की बैठक हुई थी। इसमें तय हुआ कि सभी विकल्पों को मिलाकर जल्द कैबिनेट में मंजूरी के लिए भेजा जाए।



सीईओ के पद को लेकर क्या है ताजा अपडेट?

उच्च स्तर की बैठक में इस बात पर काफी चर्चा हुई कि मेट्रोपॉलिटन रीजन का सीईओ किसे बनाया जाए। पहले यह विचार था कि संभागीय आयुक्त को ही यह जिम्मेदारी सौंप दी जाए, लेकिन इस पर पूरी सहमति नहीं बन पाई।



खासतौर पर उज्जैन-इंदौर रीजन में यह सवाल उठा कि सीईओ इंदौर के अधिकारी को बनाएं या उज्जैन के अधिकारी को। इस उलझन को सुलझाने के लिए यह रास्ता निकाला गया कि किसी आईएएस अधिकारी को अलग से सीधे सीईओ के पद पर बैठा दिया जाए। नगरीय विकास एवं आवास विभाग के सूत्रों के अनुसार, इस नए विकल्प पर सहमति बन सकती है।



2,523 गांवों में तलाशे जा रहे नए प्रोजेक्ट्स

अमले की मंजूरी मिलते ही भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन में नए प्रोजेक्ट्स की तलाश तेज होगी। इस रीजन में कुल 2 हजार 523 गांव और कस्बे शामिल हैं।



भोपाल रीजन के दायरे में आने वाले जिले

  • भोपाल (Bhopal)
  • सीहोर (Sehore)
  • रायसेन (Raisen)
  • विदिशा (Vidisha)
  • राजगढ़ (Rajgarh)
  • नर्मदापुरम (Narmadapuram)

भोपाल विकास प्राधिकरण (Bhopal Development Authority) ने इसके लिए एक कंसल्टेंट की नियुक्ति भी कर दी है। यह कंसल्टेंट इन इलाकों में औद्योगिक क्षेत्र, नई सड़कें और पर्यटन से जुड़े नए प्रोजेक्ट्स की पहचान करेगा।



उज्जैन-इंदौर रीजन का क्या है हाल?

उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन इस काम में अभी थोड़ा पीछे चल रहा है। इस रीजन के तहत इंदौर और उज्जैन के अलावा चार अन्य जिले शामिल हैं।



  • धार (Dhar)
  • देवास (Dewas)
  • रतलाम (Ratlam)
  • शाजापुर (Shajapur)

इन सभी छह जिलों में भी आने वाले दिनों में नए प्रोजेक्ट्स की पहचान का काम शुरू किया जाएगा।



2027 में जमीन पर उतरेगा पहला बड़ा प्रोजेक्ट

शासन स्तर से भोपाल विकास प्राधिकरण और इंदौर विकास प्राधिकरण दोनों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि वे अपनी तैयारी पूरी रखें। दोनों संस्थाओं को यह लक्ष्य दिया गया है कि साल 2027 तक मेट्रोपॉलिटन रीजन के तहत नए प्रोजेक्ट्स को हर हाल में शुरू कर दिया जाए। फिलहाल कंसल्टेंट जो भी काम कर रहे हैं, उसकी नियमित रिपोर्ट सीधे शासन स्तर पर जांची जा रही है।



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