भोपाल के कोहेफिजा की करोड़ों की जमीन पर हाईकोर्ट सख्त, वन सचिव तलब
समझें क्या है पूरा मामला
- भोपाल के पॉश कोहेफिजा इलाके में सरकार ने केवल 3.36 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया था।
- आरोप है कि इसके बाद करीब 1.48 एकड़ अतिरिक्त जमीन भी सरकारी कब्जे में चली गई।
- कई साल तक यह मामला राजस्व अदालतों और फिर हाईकोर्ट में चलता रहा।
- सीमांकन में अतिरिक्त जमीन पर सरकारी कब्जे के दावे को बल मिला।
- अब हाईकोर्ट ने जमीन लौटाने की प्रक्रिया पर जवाब मांगते हुए वन सचिव को तलब किया है।
भोपाल की जमीन अब हाईकोर्ट की निगरानी में
भोपाल का कोहेफिजा इलाका राजधानी के सबसे महंगे और वीआईपी क्षेत्रों में गिना जाता है। वीआईपी रोड, बड़े सरकारी संस्थान और प्रीमियम संपत्तियों के बीच स्थित इस जमीन की कीमत करोड़ों रुपए बताई जाती है।
इसी जमीन को लेकर वर्षों से कानूनी लड़ाई चल रही है। अब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इस मामले में सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने वन विभाग के सचिव को 10 अगस्त 2026 को अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है। अदालत यह भी देखेगी कि अतिरिक्त कब्जे वाली जमीन को असली मालिकों को लौटाने की प्रक्रिया कितनी आगे बढ़ी है।
कोहेफिजा की जमीन कैसे आई विवाद में
पूरा जमीन विवाद भोपाल के कोहेफिजा स्थित सर्वे नंबर 19/1, 20 और 27 की जमीन से जुड़ा है। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक, केवल 3.36 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया गया था। लेकिन बाद में दावा किया गया कि मौके पर कुल 4.48 एकड़ जमीन सरकारी कब्जे में है।
इसमें बड़ा हिस्सा एमपी वन विभाग की फेंसिंग के भीतर चला गया। वहीं कुछ जमीन पर वीआईपी रोड (VIP Road) का निर्माण भी हो गया। इसी अतिरिक्त जमीन को लेकर भू-स्वामियों ने कानूनी लड़ाई शुरू की।
पहले राजस्व अदालतों ने माना अतिरिक्त कब्जा
मामला सबसे पहले तहसीलदार के सामने पहुंचा। जांच में सामने आया कि सरकार के कब्जे में अधिग्रहित जमीन से ज्यादा भूमि मौजूद है। तहसीलदार ने माना कि अतिरिक्त जमीन पर कब्जा है। लेकिन अलग प्रक्रिया अपनाने की सलाह दी।
बाद में एसडीओ ने इस फैसले में बदलाव किया। बदलाव करते हुए अतिरिक्त 1.48 एकड़ जमीन भू-स्वामियों को लौटाने का आदेश दिया। यह आदेश आगे की पूरी कानूनी लड़ाई की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बना।
सरकार को राहत मिली, फिर खत्म भी हो गई
एसडीओ के आदेश को अपर आयुक्त ने रद्द करते हुए नए सीमांकन की बात कही। मामला इसके बाद राजस्व मंडल पहुंचा। राजस्व मंडल ने रिकॉर्ड, सीमांकन और पंचनामा देखने के बाद माना कि अतिरिक्त जमीन पर कब्जे की बात सही है। मंडल ने अपर आयुक्त का आदेश रद्द कर दिया और एसडीओ का फैसला बहाल रखा। इसके बाद राज्य सरकार ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
2019 में हाईकोर्ट ने सरकार की याचिका खारिज की
बता दें कि, 19 सितंबर 2019 को जस्टिस विशाल धगट ने राज्य सरकार की रिट याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि सरकार ने कभी यह दावा नहीं किया कि 4.48 एकड़ जमीन का अधिग्रहण हुआ था।
रिकॉर्ड साफ बताता है कि अधिग्रहण केवल 3.36 एकड़ का था। ऐसे में अतिरिक्त जमीन पर कब्जा सही नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भू-स्वामी अपनी जमीन वापस मांगने के हकदार हैं।
अपील में सरकार को मिली थी केवल अंतरिम राहत
सरकार ने इस फैसले के खिलाफ रिट अपील दायर की। 19 दिसंबर 2022 को तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश रवि मलीमठ और जस्टिस विशाल मिश्रा की खंडपीठ ने अपील स्वीकार कर ली थी। अदालत ने फिलहाल जमीन की स्थिति नहीं बदलने का आदेश दिया। इसे यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश कहा गया। हालांकि अदालत ने अंतिम फैसला नहीं दिया और मामले की नियमित सुनवाई जारी रखी।
नए सीमांकन ने बदल दी पूरे केस की दिशा
सुनवाई के दौरान अदालत को लगा कि जमीन की वास्तविक स्थिति फिर से साफ होना जरूरी है। इसके बाद 20 मार्च 2025 को तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश सुरेश कुमार कैत और जस्टिस विवेक जैन की पीठ ने नए सीमांकन का आदेश दिया। भोपाल कलेक्टर को निर्देश दिया गया कि सभी पक्षों को बुलाकर पूरी पारदर्शिता से सीमांकन कराया जाए। यह आदेश पूरे मामले का सबसे अहम मोड़ साबित हुआ।
रिपोर्ट में सामने आया बड़ा खुलासा
हाईकोर्ट के आदेश के बाद 8 मई 2025 को सीमांकन पूरा हुआ। इसकी रिपोर्ट बाद में हाईकोर्ट में पेश की गई। रिपोर्ट में बताया गया कि 4.79 एकड़ जमीन वन विभाग की फेंसिंग के भीतर है। वहीं 0.74 एकड़ जमीन पर वीआईपी रोड बनी हुई है। इस रिपोर्ट के बाद भू-स्वामियों ने अदालत से अतिरिक्त जमीन वापस दिलाने की मांग और तेज कर दी।
सरकार की चुप्पी पर अदालत ने दिखाई सख्ती
29 जून 2026 को सुनवाई (MP High Court) के दौरान सरकार की ओर से स्पष्ट जवाब पेश नहीं किया गया। इस पर एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि इतने पुराने मामले में अब और देरी स्वीकार नहीं होगी। कोर्ट ने संकेत दिया कि जिम्मेदार अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से जवाब देना होगा।
अब 1.43 एकड़ जमीन लौटाने की प्रक्रिया शुरू
20 जुलाई 2026 की सुनवाई में अतिरिक्त महाधिवक्ता ब्रह्मदत्त सिंह ने अदालत को बताया कि वन विभाग के सचिव ने भोपाल कलेक्टर और डीएफओ को पत्र भेज दिया है। पत्र में 1.43 एकड़ जमीन की पहचान कर उसे मूल भू-स्वामियों को लौटाने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। अदालत ने सरकार को यह प्रक्रिया पूरी करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है।
10 अगस्त की सुनवाई पर सबकी नजर
हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई 10 अगस्त 2026 तय की है। अदालत ने वन विभाग के सचिव को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है। सचिव को पूरी प्रगति रिपोर्ट भी देनी होगी। अदालत यह भी देखेगी कि जमीन का मार्किंग पूरा हुआ या नहीं। साथ ही वास्तविक मालिकों को कब्जा लौटाने की प्रक्रिया कितनी आगे बढ़ी है।
ये फैसला क्यों बन सकता है बड़ी मिसाल
यह मामला केवल कोहेफिजा की जमीन तक सीमित नहीं है। यह सरकारी अधिग्रहण और निजी संपत्ति के अधिकारों से जुड़ा बड़ा कानूनी सवाल भी है। अगर अदालत के निर्देश के मुताबिक अतिरिक्त जमीन लौटाई जाती है तो भविष्य में ऐसे दूसरे मामलों पर भी इसका असर पड़ सकता है। यही वजह है कि इस मामले पर प्रशासन, कानूनी विशेषज्ञों और भू-स्वामियों की नजर बनी हुई है।
ये खबरें भी पढ़ें...
एमपी के 1900 स्कूलों में शिक्षक नहीं: हाईकोर्ट ने पूछा, बिना टीचर कैसे हो रही पढ़ाई
नीट-यूजी 2026 रिजल्ट में 241 अंकों का अंतर, NTA की कार्यप्रणाली को हाईकोर्ट में चुनौती
अपराध साबित करने वाली DNA रिपोर्ट में गड़बड़ी, हाईकोर्ट ने डायरेक्टर FSL को किया तलब
राज्यसभा नामांकन रद्द होने के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंची मीनाक्षी नटराजन, दायर की पिटिशन