भोपाल मास्टर प्लान का ड्राफ्ट सितंबर में आने की उम्मीद, इस बार विधायकों की राय जरूरी
यह आपसे क्यों जुड़ा है?
अगर आप भोपाल में घर या दुकान के मालिक हैं, तो यही ड्राफ्ट तय करेगा कि आपकी जमीन का इस्तेमाल आगे कैसे होगा। रिहायशी इलाका कमर्शियल बनेगा या नहीं, सड़क कहां चौड़ी होगी, ग्रीन बेल्ट कहां रहेगी, यह सब इसी प्रारूप में लिखा जाएगा। यही वजह है कि विधायकों की राय लेने की यह प्रक्रिया सिर्फ राजनीति नहीं, आपके रोजमर्रा के फैसलों का आधार भी है।
पहले क्या था
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान करीब 18 साल एमपी के मुख्यमंत्री रहे। कमलनाथ सिर्फ 15 महीने के लिए कुर्सी पर रहे। मोहन यादव दिसंबर 2023 से मुख्यमंत्री हैं। तीनों के कार्यकाल में मास्टर प्लान बार-बार बना और अटका।
फरवरी 2024 में शहरी प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मौजूदा ड्राफ्ट को पूरी तरह रद्द कर दिया था। वजह थी, खुद बीजेपी के विधायक रामेश्वर शर्मा और मंत्री कृष्णा गौर की नाराजगी। उनकी शिकायत थी कि उनके सुझाव ड्राफ्ट में शामिल ही नहीं हुए।
क्या हुआ और क्यों
तो सवाल यह है, इस बार सरकार क्या अलग कर रही है? जवाब है, इस बार सुझाव प्रक्रिया को ड्राफ्ट आने से पहले ही पूरा करने की कोशिश हो रही है। पिछली बार गलती उलटी हुई थी। ड्राफ्ट पहले बना, विधायकों को बाद में दिखाया गया, और फिर विरोध में पूरा प्लान रद्द करना पड़ा। यह ठीक वैसा ही है जैसे कोई घर बनाने के बाद परिवार से पूछे कि कमरे कैसे चाहिए थे।
अब सरकार ने 74 सदस्यों की एक कमेटी बनाई है, जिसमें सांसद, विधायक, महापौर और जनपद अध्यक्ष तक शामिल हैं। मकसद है, ड्राफ्ट आने से पहले हर आपत्ति सुन ली जाए। लेकिन 10 जुलाई 2026 को हुई दिशा समिति की बैठक में उल्टा हुआ। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद और विधायक आतिफ अकील ने देरी को लेकर सरकार को घेरा, और बीजेपी विधायक के साथ उनकी तीखी बहस भी हो गई।
यहीं वो जगह है जहां चीजें दिलचस्प होती हैं। शहरी विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय पहले ही कह चुके हैं कि ड्राफ्ट तैयार है, फैसला सिर्फ मुख्यमंत्री के स्तर पर बाकी है। फिर भी अब विधायकों से अलग बैठक बुलाई जा रही है। इससे साफ है कि सरकार पिछली गलती नहीं दोहराना चाहती।
और यही वो पल है जब हर विधायक की अपनी मांग सामने आ सकती है।
कौन-कौन शामिल है
मुख्यमंत्री मोहन यादवBhopal Master Plan को अंतिम मंजूरी देंगे। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ड्राफ्ट को अंतिम रूप दे रहे हैं। भोपाल के सभी विधायक, जिनमें कांग्रेस के आरिफ मसूद और आतिफ अकील भी शामिल हैं, सुझाव देने वाले हैं। योजना विभाग के अधिकारी बैठक आयोजित करने की तैयारी में हैं।
दोनों तरफ की बात
सरकार का तर्क है कि विधायकों से पहले राय लेना पारदर्शिता की कोशिश है, ताकि ड्राफ्ट बनने के बाद विरोध न हो। दूसरी तरफ ये भी है कि हर विधायक अपने क्षेत्र के हिसाब से जमीन के इस्तेमाल में बदलाव चाहेगा। ऐसे में सबकी मांगें मिलाना आसान नहीं है, और इसी टकराव में पहले भी एक पूरा ड्राफ्ट रद्द हो चुका है।
आगे क्या होगा
सूत्रों के मुताबिक ड्राफ्ट सितंबर के पहले हफ्ते में आ सकता है, लेकिन यह तारीख अभी आधिकारिक रूप से कन्फर्म नहीं हुई है। विधायकों की बैठक कब होगी, इसकी तारीख भी सामने नहीं आई है। असली सवाल यह है कि क्या यह सुझाव प्रक्रिया समय पर पूरी हो पाएगी, या फिर पिछली बार जैसा टकराव दोहराया जाएगा।
एक बात जो आप नहीं जानते थे
पिछला ड्राफ्ट किसी विपक्षी दबाव से नहीं, बल्कि सत्ता पक्ष के अपने ही विधायकों की नाराजगी से रद्द हुआ था। यानी भोपाल के मास्टर प्लान की सबसे बड़ी अड़चन विपक्ष कभी नहीं रही, बल्कि हमेशा अपनी ही पार्टी के भीतर की खींचतान रही है।
अब आप क्या करें
- अब आप क्या करें: भोपाल नगर निगम और योजना विभाग की आधिकारिक घोषणाओं पर नजर रखें।
- क्यों अभी: ड्राफ्ट में तय जमीन का इस्तेमाल सीधे आपकी संपत्ति पर असर डाल सकता है।
- आगे देखें: विधायकों की बैठक की तारीख और सितंबर में आने वाला ड्राफ्ट।
FAQ
- भोपाल मास्टर प्लान का ड्राफ्ट कब आएगा?
सूत्रों के मुताबिक भोपाल मास्टर प्लान के सितंबर के पहले हफ्ते में आने की संभावना है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है। - भोपाल मास्टर प्लान को लेकर मुख्यमंत्री ने विधायकों से सुझाव क्यों मांगे हैं?
पिछला ड्राफ्ट सत्ता पक्ष के ही विधायकों की नाराजगी से 2024 में रद्द हुआ था। इस बार सरकार वही गलती दोहराना नहीं चाहती।
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