भोपाल नगर निगम में बिना काम करोड़ों का भुगतान, BMC अपर आयुक्त पर एफआईआर दर्ज

Amresh Kushwaha | Mar 14, 2026, 09:02 IST
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भोपाल नगर निगम में बिना काम किए करोड़ों रुपए के फर्जी भुगतान का खुलासा हुआ है। लोकायुक्त पुलिस ने अपर आयुक्त गुणवंत सेवतकर के खिलाफ FIR दर्ज कर निगम के दस्तावेजों को जब्त कर लिया है।

BHOPAL. मध्यप्रदेश की राजधानी के नगर निगम (BMC) में भ्रष्टाचार का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। लोकायुक्त पुलिस ने शुक्रवार, 13 मार्च को निगम पर दस्तक दी और करोड़ों रुपए के फर्जी भुगतान के मामले में बड़ी कार्रवाई की।



इस पूरे खेल के केंद्र में निगम के अपर आयुक्त गुणवंत सेवतकर का नाम आया है, जिनके खिलाफ अब कानूनी शिकंजा कस गया है।



सॉफ्टवेयर बना भ्रष्टाचार का हथियार

लोकायुक्त एसपी दुर्गेश राठौर के मुताबिक, आरोप है कि SAP सॉफ्टवेयर की मदद ली गई ताकि सिस्टम में ऐसे ई-बिल तैयार किए जा सकें जिनका हकीकत में कोई वजूद ही नहीं था। बिना किसी वास्तविक काम के, केवल कागजों और डिजिटल एंट्री के जरिए करोड़ों रुपए अपने परिचितों और रिश्तेदारों की फर्मों के खाते में ट्रांसफर कर दिए गए।



10 साल का काला चिट्ठा हुआ जब्त

शुक्रवार सुबह करीब 10:30 बजे लोकायुक्त की टीम ने एक साथ नगर निगम के तीन प्रमुख ठिकानों पर छापेमारी की। इसमें लिंक रोड-2 स्थित मुख्य कार्यालय, कंप्यूटर शाखा, डाटा सेंटर और फतेहगढ़ स्थित पुराना कार्यालय शामिल है।



टीम ने पिछले 10 साल के दस्तावेज और सर्वर का पूरा डाटा जब्त कर लिया है। जांच का दायरा इतना बड़ा है कि इसमें कई और बड़े अधिकारियों और फर्मों के चेहरे बेनकाब होने की उम्मीद है।



ऐसे हुआ करोड़ों का हेर फेर

जांच में चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि जलकार्य, सामान्य प्रशासन और केंद्रीय वर्कशॉप जैसे विभागों के नाम पर वाहनों की मरम्मत और पेंटिंग के फर्जी बिल बनाए गए। मजेदार (या कहें दुखद) बात यह है कि जिन विभागों के नाम पर ये बिल फटे, उनके अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं थी। सिस्टम में ई-बिल जेनरेट हुए और पैसा सीधे ठेकेदारों की जेब में चला गया, जबकि जमीन पर एक ईंट भी नहीं रखी गई थी।



नवंबर 2025 से शुरू हुई जांच, मार्च में दर्ज हुई FIR

नगर निगम में चल रहे इस फर्जीवाड़े की शिकायत नवंबर 2025 में लोकायुक्त को मिली थी। महीनों चली गोपनीय जांच और सबूतों को जुटाने के बाद, जब तथ्य सही पाए गए तो 9 मार्च 2026 को अपर आयुक्त गुणवंत सेवतकर के खिलाफ भ्रष्टाचार, आपराधिक षड्यंत्र और धोखाधड़ी की गंभीर धाराओं में FIR दर्ज की गई। कोर्ट से सर्च वारंट मिलते ही शुक्रवार को एक्शन लिया गया।



कमिश्नर की सहमति से हुआ भुगतान- अपर आयुक्त

कार्रवाई के बीच अपर आयुक्त गुणवंत सेवतकर ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि लेखा शाखा (Accounts Branch) सीधे बिल पास नहीं करती। उन्होंने तर्क दिया कि बिल संबंधित विभागों से वेरिफिकेशन के बाद आते हैं। फंड की उपलब्धता को देखते हुए नगर निगम आयुक्त से चर्चा के बाद ही अंतिम भुगतान किया जाता है।



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