भ्रष्टाचार मामला : कोर्ट ने नगर निगम अपर आयुक्त रिश्वत केस में दिए दोबारा जांच के आदेश

Sanjay Sharma | Apr 11, 2026, 19:31 IST
Photograph: (THESOOTR)
BHOPAL. भोपाल नगर के अपर आयुक्त द्वारा रिश्वत लेने के केस में लोकायुक्त को दोबारा जांच करनी होगी। कोर्ट ने जांच में हुई कमी को देखते हुए यह आदेश दिया है।

News in short

  • कोर्ट ने क्लोजर रिपोर्ट खारिज की।
  • जांच में कई खामियां सामने आईं।
  • रिश्वत मांग साबित नहीं हुई।
  • नए साक्ष्य जुटाने के आदेश।
  • जांच एजेंसी को निर्देश जारी।

News in Detail

भोपाल नगर निगम अपर आयुक्त कमलेंद्र सिंह परिहार द्वारा बालाजी साइबर फर्म के संचालक सौरभ गुप्ता से की रिश्वत मांग की थी। रिश्वत नगर निगम क्षेत्र में कौशल विकास प्रशिक्षण के भुगतान के बदले में मांगी गई थी।



गुप्ता ने परिहार के 83500 की पहली किश्त देकर शिकायत लोकायुक्त में की थी। इस शिकायत पर लोकायुक्त द्वारा कार्रवाई कर केस दर्ज किया गया था। इसी केस में क्लोजर रिपोर्ट पेश की गई थी।



लोकायुक्त की जांच पर उठे सवाल

लोकायुक्त द्वारा पेश क्लोजर रिपोर्ट खारिज होने से अब जांच पर सवाल उठ रहे हैं। लोकायुक्त ने सौरभ गुप्ता की शिकायत पर नगर निगम भोपाल के रिश्वत मांग का केस दर्ज किया था।



यह रिश्वत प्रशिक्षण कार्य के बदले दिसम्बर 2022 में हुए भुगतान के बड़े में मांगी गई थी। हालांकि, जांच एजेंसी अपर आयुक्त को रंगे हाथ।नहीं पकड़ पाई, लेकिन उसकी रिश्वत मांगने की बातचीत ऑडियो-वीडियो के रूप में रिकॉर्ड हुई थी। लोकायुक्त के अधिकारी ने इसे पर्याप्त सबूत न मानते हुए क्लोजर रिपोर्ट पेश की थी।



जांच की कई खामियां आईं सामने

अदालत ने जांच रिपोर्ट में कई कमियां पाई। कई अहम पहलुओं की जांच नहीं हुई। शिकायतकर्ता की भूमिका स्पष्ट नहीं की गई। उसके पद और कार्य की पुष्टि नहीं हुई। संबंधित कंपनियों से जानकारी नहीं जुटाई गई। इन कमियों ने जांच को कमजोर बना दिया।



रिश्वत मांगने की रिकॉर्डिंग की हुई अनदेखी

जांच में रिश्वत मांग का स्पष्ट प्रमाण नहीं मिला। हालांकि बातचीत की रिकॉर्डिंग मौजूद थी। अदालत ने इसे गंभीरता से लिया। रिकॉर्डिंग को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इससे जांच की दिशा प्रभावित होती है।



सबूतों की कमी के बहाने बनाई क्लोजर रिपोर्ट

अदालत ने कहा कि केवल सबूतों की कमी काफी नहीं। यह साबित होना जरूरी है कि अपराध हुआ ही नहीं। जांच एजेंसी को और प्रयास करना चाहिए था। अदालत ने संतुलित निर्णय लेने पर जोर दिया।



कोर्ट ने दिए नए सिरे से जांच के निर्देश

कोर्ट ने विस्तृत जांच के निर्देश दिए। संबंधित कंपनियों से जानकारी जुटाने को कहा गया। शिकायतकर्ता की भूमिका स्पष्ट करने को कहा गया। अन्य संभावित साक्ष्य भी जुटाने को कहा गया। इससे मामले में नई दिशा मिलेगी।



भ्रष्टाचार के मामलों पर कोर्ट की सख्ती

यह फैसला भ्रष्टाचार मामलों में अहम है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जांच पूरी होनी चाहिए। अधूरी जांच स्वीकार नहीं होगी। इससे एजेंसियों की जवाबदेही बढ़ेगी। पारदर्शिता को भी मजबूती मिलेगी।



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