स्पोर्ट्स कोटे के कारतूसों की कालाबाजारी पर एक्शन, 80% तक घटी लिमिट

Aman Vaishnav | Jun 14, 2026, 12:23 IST
स्पोर्ट्स कोटे के कारतूसों की कालाबाजारी पर एक्शन
भोपाल में खेल कोटे के कारतूसों की कालाबाजारी के खुलासे के बाद जिला प्रशासन ने नियमों को सख्त कर दिया है। अब शूटर्स को सालभर में सिर्फ 1000 कारतूस ही मिलेंगे। साथ ही गन लाइसेंस की संख्या भी सीमित कर दी गई है।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • भोपाल में स्पोर्ट्स कोटे के कारतूसों अवैध इस्तेमाल हो रहा था।
  • इस खुलासे के बाद जिला प्रशासन ने कारतूसों के कोटे को कम कर दिया है।
  • इस मामले में एक ही परिवार के पांच शूटर्स के लाइसेंस पहले ही निरस्त किए जा चुके हैं।
  • इसमें हथियार बेचने वाली शाह आर्मरी की भी गड़बड़ियां सामने आई थी।
  • नियम बदलने के लिए राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है।

दरअसल राजधानी भोपाल कुछ समय पहले ही एक बड़ा खुलासा हुआ था। खुलासे में पता चला था कि भोपाल में स्पोर्ट्स कोटे के कारतूसों का अवैध इस्तेमाल हो रहा था।



इस खुलासे के बाद जिला प्रशासन ने कारतूस जारी करने की सीमा तय कर दी है। अब एक शूटर को साल में सिर्फ एक हजार कारतूस ही मिलेंगे।



कारतूस कोटे पर लगी लिमिट

भोपाल जिला प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। अब एक शूटर को एक बार में अधिकतम 500 कारतूस दिए जाएंगे। पूरे साल में यह सीमा एक हजार कारतूस तक रहेगी।



पहले यह स्थिति बिल्कुल अलग थी। एक शूटर साल भर में 15 हजार से लेकर एक लाख तक कारतूस ले सकता था। इतने कारतूस कहां जाते थे इसका कोई हिसाब नहीं था।



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हर कारतूस का देना होगा हिसाब

बता दें कि अब सिर्फ कारतूस लेना ही काफी नहीं होगा। शूटर्स को अब बताना होगा कि ये कारतूस किस प्रतियोगिता के लिए चाहिए। यह भी बताना होगा कि इनका इस्तेमाल किस शूटिंग रेंज में होगा।



वहीं यदि किसी को एक हजार से ज्यादा कारतूस चाहिए तो उसे खेल संचालक से मंजूरी लेनी होगी। बिना अनुमति के अतिरिक्त कोटा नहीं मिलेगा।



गन की संख्या भी घटाई

प्रशासन ने हथियारों की संख्या पर भी रोक लगाई है। नेशनल और इंटरनेशनल स्तर के खिलाड़ियों को अब सिर्फ दो गन के लाइसेंस मिलेंगे। पहले ये खिलाड़ी आठ से 10 तक हथियार रख सकते थे।



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कानून बदलने का प्रस्ताव

जानकारी के अनुसार जिला प्रशासन ने राज्य सरकार को एक प्रस्ताव भेजा है। इसमें कारतूसों के खोखों का रिकॉर्ड रखने के लिए कानून में बदलाव की मांग की गई है। यह कानून बना तो खर्च हुए हर कारतूस का हिसाब रखना जरूरी होगा।



एक परिवार के पांच सदस्यों पर केस

बता दें कि खुलासे के बाद भोपाल के तत्कालीन कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह के निर्देश पर पांच लोगों के हथियार लाइसेंस रद्द किए थे। ये पांचों एक ही परिवार के हैं। इनके नाम शाहिद अहमद, शाहजेब अहमद, शफीक अहमद, शहरयार अहमद और सोहेल अहमद हैं।



भोपाल क्राइम ब्रांच ने 13 जुलाई 2025 को इन सभी पर मामला दर्ज किया था। मामला सामने आने के बाद ही प्रशासन ने इनके लाइसेंस निलंबित कर दिए थे।



31 लाख कारतूस और कोई रिकॉर्ड नहीं

जानकारी के अनुसार भोपाल में हर साल लगभग 31 लाख कारतूस शूटरों को दिए जाते थे। यह कारतूस प्रैक्टिस और प्रतियोगिता के नाम पर जारी होते थे। इनका उपयोग कहां हुआ इसका कोई पक्का रिकॉर्ड नहीं है।



न तो खोखों की गिनती होती थी और न ही प्रैक्टिस का ब्यौरा लिया जाता था। इसी खामी का फायदा उठाकर लाखों कारतूस बाजार और अपराध जगत तक पहुंचते थे।



सेल्फ डिफेंस लाइसेंस से खेल कोटे तक का सफर

जांच में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई थी। कई खिलाड़ियों ने पहले सेल्फ डिफेंस के नाम पर लाइसेंस लिया था। बाद में उन्होंने खेल कोटे का फायदा उठाकर चार-चार हथियार तक जोड़ लिए।



कई लोग सालों से किसी भी टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं ले रहे थे। इसके बावजूद उनके नाम पर स्पोर्ट्स कैटेगरी में हथियार और कारतूस (शूटिंग कारतूस) दर्ज थे। कुछ मामलों में खिलाड़ियों ने प्रतियोगिता तो खेली, लेकिन कारतूस खरीद का कोई रिकॉर्ड नहीं दिखाया।



शाह आर्मरी पर भी उठे सवाल

खुलासा होने के बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया। इसके बाद हथियार बेचने वाली शाह आर्मरी की भी गड़बड़ियां सामने आईं। इस आर्मरी के रिकॉर्ड में भी अनियमितताएं पाई गई थी।



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