भोपाल कारतूस केस में एक्शन तेज, 5 लोगों के लाइसेंस सस्पेंड, अब शूटर्स की कुंडली खंगालेंगे अफसर

भोपाल में खेल कोटे के तहत कारतूसों का अवैध इस्तेमाल सामने आने के बाद प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। भोपाल कलेक्टर ने पांच आरोपियों के शस्त्र लाइसेंस निरस्त कर दिए हैं।

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Sourabh Bhatnagar
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Illegal Use of Sports Ammunition in Bhopal 5 Gun Licenses Suspended and Investigation Ongoing
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मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में खेल कोटे के कारतूसों का अवैध इस्तेमाल हो रहा है। इस खुलासे के बाद अब प्रशासन ने सख्ती शुरू कर दी है। भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने पांच आरोपियों के शस्त्र लाइसेंस निरस्त कर दिए हैं। इन सभी पर आपराधिक केस दर्ज हैं। 

वहीं, नेशनल और इंटरनेशनल टूर्नामेंट खेलने वाले शूटर्स के कारतूसों के हेरफेर की आशंका पर शुरू हुई जांच भी पूरी हो गई है। इस बीच 80 रजिस्टर्ड शूटर्स में से 75 ने प्रशासन के सामने अपना रिकॉर्ड पेश किया है। पांच शूटर्स खुद पेश नहीं हुए, लेकिन उन्होंने रिकॉर्ड भेज दिया है। जांच में हथियार बेचने वाली शाह आर्मरी की भी गड़बड़ियां सामने आईं। प्रशासन ने डीलर का लाइसेंस निरस्त करने के लिए सरकार को चिट्ठी लिखी है।

पांच लोगों पर दर्ज है एफआईआर 

अब प्रशासन ने तय किया है कि जिन खिलाड़ियों का आपराधिक रिकॉर्ड मिलेगा, उनके लाइसेंस निरस्त किए जाएंगे। इसके लिए प्रशासन ने पुलिस, आबकारी और फॉरेस्ट विभाग से शूटर्स का रिकॉर्ड मांगा है। इस क्रम में जिला प्रशासन ने कार्रवाई भी शुरू कर दी है। 

भोपाल कलेक्टर के निर्देश पर पांच शस्त्र लाइसेंस निलंबित किए गए हैं। इनमें शाहिद अहमद, शाहजेब अहमद, शफीक अहमद, शहरयार अहमद और सोहेल अहमद शामिल हैं। इन पर केस दर्ज है। भोपाल क्राइम ब्रांच ने पांचों पर 13 जुलाई 2025 को धारा 08/22 एनडीपीएस एक्ट में केस दर्ज कर प्रकरण जांच में लिया था। अब यह जानकारी सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने इनके शस्त्र लाइसेंस सस्पेंड कर दिए हैं। ये पांचों लोग एक ही परिवार के हैं।

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अब तक निगरानी ही नहीं हो रही थी

गौरतलब है कि भोपाल में हर साल तकरीबन 31 लाख कारतूस शूटर्स को जारी होते हैं। ये कारतूस खिलाड़ियों को प्रैक्टिस और प्रतियोगिता के नाम पर जारी किए जाते हैं, लेकिन उनका उपयोग कहां हुआ, इसका कोई पुख्ता रिकॉर्ड नहीं है। न कारतूसों के खोखों की गिनती हो रही है और न ही प्रैक्टिस का पूरा ब्यौरा लिया जा रहा है। इसी ढिलाई का नतीजा है कि लाखों कारतूस बाजार और अपराध जगत तक पहुंचने की आशंका है। मामले का खुलासा होने के बाद प्रशासन कार्रवाई कर रहा है। 

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कई के पास सेल्फ डिफेंस का लाइसेंस 

जांच का दायरा जब बढ़ा तो तस्वीर और चौंकाने वाली सामने आई है। कई ऐसे खिलाड़ी मिले हैं, जिन्होंने मूल रूप से सेल्फ डिफेंस के नाम पर लाइसेंस लिया और बाद में खेल कोटे का फायदा उठाकर चार-चार हथियार तक जोड़ लिए। कई सालों से किसी टूर्नामेंट में हिस्सा न लेने के बावजूद इन खिलाड़ियों के पास स्पोर्ट्स कैटेगरी में हथियार और कारतूस दर्ज रहे। ऐसे भी मामले सामने आए जहां खिलाड़ी ने प्रतियोगिता खेली जरूर, लेकिन कारतूस खरीदने का कोई रिकॉर्ड नहीं दिखाया। साफ है कि खेल कैटेगरी का लाइसेंस यहां हथियार रखने और कारतूस खरीदने की खुली छूट बन चुका था।

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