भोपाल वेटलैंड पर NGT सख्त, छह साल की चुप्पी पर अधिकारियों को फटकार
समझें क्या है पूरा मामला
- भोज वेटलैंड (बड़ा तालाब) अतिक्रमण मामला 2020 से लंबित है।
- छह साल बाद भी ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
- एनजीटी ने देरी पर कड़ी नाराजगी जताई।
- इसे कानून के शासन का अनादर बताया।
- निगम और कलेक्टर को सख्त निर्देश मिले।
किसने की पैरवी
आवेदक की ओर से अधिवक्ता हर्षवर्धन तिवारी ने पक्ष रखा। मध्य प्रदेश सरकार की ओर से प्रशांत एम. हारने पेश हुए। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से डॉ. सपना अग्रवाल उपस्थित रहीं। भोपाल नगर निगम की ओर से गुंजन चौकसे और दिशा चौकसे ने पक्ष रखा।
एनजीटी ने क्यों लगाई फटकार
सुनवाई में एनजीटी ने कहा कि यह मामला 2020 से लंबित है। इतने साल बीतने के बाद भी अधिकारियों ने कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की। न्यायाधिकरण ने कहा कि इससे साफ पता चलता है कि अधिकारियों को कानून के शासन का कोई सम्मान नहीं है।
एनजीटी ने यह भी बताया कि पहले भी उच्च न्यायालयों ने इस विषय पर विचार किया था। एक उच्च स्तरीय समिति बनाकर वेटलैंड क्षेत्र की पहचान के निर्देश भी दिए गए थे। इसके बावजूद आज तक वेटलैंड क्षेत्र का सही निर्धारण नहीं हो सका।
अवैध निर्माण बचाने की आशंका
न्यायाधिकरण ने गहरी चिंता जताते हुए कहा कि यह देरी शक पैदा करती है। एनजीटी के अनुसार, ऐसा लगता है कि प्रतिबंधित वेटलैंड क्षेत्र में हुए अवैध निर्माणों को बचाने की कोशिश हो रही है। यह टिप्पणी मामले की गंभीरता को दिखाती है।
छोटे अतिक्रमण हटे, बड़े बाकी
सुनवाई में अधिवक्ता हर्षवर्धन तिवारी ने बताया कि कुछ छोटे अतिक्रमण जरूर हटाए गए हैं। लेकिन बड़े और प्रभावशाली अतिक्रमणों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि इसका सही जवाब सिर्फ भोपाल नगर निगम ही दे सकता है।
इस पर नगर निगम ने खुद माना कि वेटलैंड, निजी भूमि और कुछ सरकारी भूमि पर भी अतिक्रमण मौजूद हैं। निगम ने यह भी बताया कि कुछ मामलों में हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश लागू हैं।
निगम को याद दिलाया गया कर्तव्य
एनजीटी ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेशों का पालन जरूरी है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि अवैध निर्माण और पर्यावरण उल्लंघन को यूं ही चलने दिया जाए। न्यायाधिकरण ने साफ कहा कि निगम का कानूनी दायित्व है कि हर निर्माण की जांच करे।
निगम को यह देखना होगा कि कौन सा निर्माण वेटलैंड नियम, 2017 के तहत प्रतिबंधित क्षेत्र में आता है। एनजीटी ने कहा कि सिर्फ फैसला न लेना या कार्रवाई टालना अधिकारियों के कर्तव्य से बचने का बहाना नहीं हो सकता।
एनजीटी का अंतिम निर्देश
अंत में एनजीटी ने भोपाल नगर निगम और कलेक्टर, भोपाल को स्पष्ट निर्देश दिया। फुल टैंक लेवल (FTL – Full Tank Level) और बफर जोन के भीतर सभी अतिक्रमण हटाने के आदेश दिए गए। साथ ही अगली सुनवाई से पहले विस्तृत प्रगति रिपोर्ट पेश करने को कहा गया है।
राज्य शासन की ओर से भी अगली सुनवाई से पहले जरूरी कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है। अब सबकी नजर अगली सुनवाई और निगम की कार्रवाई पर टिकी है।
FAQ
- एनजीटी ने भोपाल वेटलैंड मामले में क्या कहा?
एनजीटी ने कहा कि यह मामला छह साल से लंबित है। अधिकारियों ने अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं की। इसे कानून के शासन का अनादर बताया गया। - एनजीटी ने क्या निर्देश दिए हैं?
एनजीटी ने निगम और कलेक्टर को FTL और बफर जोन के अतिक्रमण हटाने को कहा। साथ ही अगली सुनवाई से पहले प्रगति रिपोर्ट मांगी गई है।
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