भोपाल वेटलैंड विवाद: NGT सख्त, भोपाल नगर निगम पर ₹20 हजार का जुर्माना
Sanjay Dhiman | Jul 09, 2026, 23:00 IST
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भोपाल वेटलैंड मामले में NGT ने आदेशों की अनदेखी करने पर भोपाल नगर निगम पर ₹20 हजार का जुर्माना लगाया है। निगम को अतिक्रमण, अवैध निर्माण और कचरा डंपिंग मामले में कार्रवाई रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए हैं। अगली सुनवाई 22 जुलाई को होगी।
भोपाल के भोज वेटलैंड संरक्षण मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण यानी NGT ने सख्त रुख अपनाया है। NGT की सेंट्रल जोन बेंच ने भोपाल नगर निगम पर ₹20 हजार का जुर्माना लगाया है।
यह कार्रवाई निगम द्वारा न्यायाधिकरण के पुराने आदेशों का पालन नहीं करने पर की गई है। मामले की सुनवाई 9 जुलाई 2026 को हुई थी।
सुनवाई के दौरान NGT की पीठ ने भोपाल नगर निगम की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई। पीठ में न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी शामिल थे।
न्यायाधिकरण ने कहा कि आदेशों के बावजूद कार्रवाई रिपोर्ट जमा नहीं करना गंभीर लापरवाही है। इसके बाद नगर निगम पर आर्थिक दंड लगाया गया।
इस मामले में आवेदक राशिद नूर खान की ओर से अधिवक्ता हर्षवर्धन तिवारी ने पक्ष रखा। उन्होंने NGT को बताया कि निगम को पहले भी कई निर्देश दिए गए थे।
अधिवक्ता ने बताया कि लगातार पांच आदेश जारी होने के बाद भी नगर निगम ने कोई Action Taken Report यानी कार्रवाई रिपोर्ट पेश नहीं की।
उन्होंने यह भी बताया कि पिछली सुनवाई में NGT ने निगम को स्पष्ट चेतावनी दी थी। इसके बावजूद अधिकारियों की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
NGT ने मामले को गंभीर मानते हुए नगर निगम को जिम्मेदार ठहराया। साथ ही ₹20 हजार का जुर्माना जमा करने का आदेश दिया।
अब इस मामले में अगली सुनवाई 22 जुलाई 2026 को होगी। इसमें निगम को अपनी कार्रवाई और जवाब पेश करना होगा।
भोपाल वेटलैंड यानी भोज वेटलैंड लंबे समय से पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यह क्षेत्र रामसर साइट के रूप में अंतरराष्ट्रीय पहचान रखता है।
भोज वेटलैंड भोपाल शहर की जल व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां का बड़ा तालाब शहर के पेयजल स्रोतों में प्रमुख है।
आवेदन में आरोप लगाया गया है कि वेटलैंड क्षेत्र में कई जगह अवैध गतिविधियां चल रही हैं। इनमें अतिक्रमण, स्थायी निर्माण और कचरा डंपिंग शामिल हैं।
इसके अलावा जमीन भराव यानी Land Filling और प्राकृतिक जल प्रवाह रोकने की शिकायत भी की गई है।
आवेदक का कहना है कि इन गतिविधियों से भोज वेटलैंड के पर्यावरण और जैव विविधता को नुकसान पहुंच रहा है।
इस मामले में NGT पहले भी संबंधित विभागों को निर्देश दे चुका है। न्यायाधिकरण ने अतिक्रमण की पहचान करने के आदेश दिए थे।
इसके साथ ही सीमांकन और अवैध निर्माण हटाने के लिए भी कहा गया था। अधिकारियों को पूरी कार्रवाई की रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए थे।
आवेदक ने NGT में कई स्थानों की जानकारी भी प्रस्तुत की है। इसमें खसरा नंबर और सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर जानकारी दी गई है।
NGT का उद्देश्य वेटलैंड क्षेत्र को सुरक्षित रखना है। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे क्षेत्र जल संरक्षण और जैव विविधता के लिए जरूरी होते हैं।
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यह कार्रवाई निगम द्वारा न्यायाधिकरण के पुराने आदेशों का पालन नहीं करने पर की गई है। मामले की सुनवाई 9 जुलाई 2026 को हुई थी।
सुनवाई के दौरान NGT की पीठ ने भोपाल नगर निगम की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई। पीठ में न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी शामिल थे।
न्यायाधिकरण ने कहा कि आदेशों के बावजूद कार्रवाई रिपोर्ट जमा नहीं करना गंभीर लापरवाही है। इसके बाद नगर निगम पर आर्थिक दंड लगाया गया।
पांच आदेशों के बाद भी नहीं दी गई रिपोर्ट
अधिवक्ता ने बताया कि लगातार पांच आदेश जारी होने के बाद भी नगर निगम ने कोई Action Taken Report यानी कार्रवाई रिपोर्ट पेश नहीं की।
उन्होंने यह भी बताया कि पिछली सुनवाई में NGT ने निगम को स्पष्ट चेतावनी दी थी। इसके बावजूद अधिकारियों की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
NGT ने मामले को गंभीर मानते हुए नगर निगम को जिम्मेदार ठहराया। साथ ही ₹20 हजार का जुर्माना जमा करने का आदेश दिया।
अब इस मामले में अगली सुनवाई 22 जुलाई 2026 को होगी। इसमें निगम को अपनी कार्रवाई और जवाब पेश करना होगा।
भोज वेटलैंड में अतिक्रमण और पर्यावरण नुकसान का मामला
भोज वेटलैंड भोपाल शहर की जल व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां का बड़ा तालाब शहर के पेयजल स्रोतों में प्रमुख है।
आवेदन में आरोप लगाया गया है कि वेटलैंड क्षेत्र में कई जगह अवैध गतिविधियां चल रही हैं। इनमें अतिक्रमण, स्थायी निर्माण और कचरा डंपिंग शामिल हैं।
इसके अलावा जमीन भराव यानी Land Filling और प्राकृतिक जल प्रवाह रोकने की शिकायत भी की गई है।
आवेदक का कहना है कि इन गतिविधियों से भोज वेटलैंड के पर्यावरण और जैव विविधता को नुकसान पहुंच रहा है।
NGT ने पहले भी दिए थे कार्रवाई के निर्देश
इसके साथ ही सीमांकन और अवैध निर्माण हटाने के लिए भी कहा गया था। अधिकारियों को पूरी कार्रवाई की रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए थे।
आवेदक ने NGT में कई स्थानों की जानकारी भी प्रस्तुत की है। इसमें खसरा नंबर और सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर जानकारी दी गई है।
NGT का उद्देश्य वेटलैंड क्षेत्र को सुरक्षित रखना है। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे क्षेत्र जल संरक्षण और जैव विविधता के लिए जरूरी होते हैं।
भोपाल वेटलैंड संरक्षण क्यों है जरूरी?
- भोज वेटलैंड केवल पानी का स्रोत नहीं है। यह हजारों पक्षियों और जलीय जीवों का प्राकृतिक आवास भी है।
- वेटलैंड क्षेत्र बारिश के पानी को नियंत्रित करने में मदद करता है। इससे शहर में जल संतुलन बना रहता है।
- पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि अतिक्रमण और अवैध निर्माण से वेटलैंड की क्षमता प्रभावित होती है।
- इसी वजह से Wetland Protection Rules 2017 के तहत ऐसे क्षेत्रों की सुरक्षा जरूरी मानी गई है।
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