बिलौआ खदानों पर HC सख्त, कलेक्टर से पूछा- अवैध खनन की जिम्मेदारी किसकी?
समझें क्या है पूरा मामला…
- बिलौआ और रफादपुर में खनन को लेकर हाईकोर्ट में मामला चल रहा है।
- अदालत ने कई खदानों के काम पर रोक लगाई है।
- खदान क्षेत्र की ड्रोन रिकॉर्डिंग अदालत में दिखाई गई।
- कलेक्टर रुचिका चौहान सुनवाई के दौरान कोर्ट में मौजूद रहीं।
- खनिज अधिकारियों से जुड़ी जांच के दस्तावेज भी रखे गए।
बिलौआ और रफादपुर की खदानों का मामला फिर गरमा गया है। ग्वालियर हाईकोर्ट में मंगलवार को इस मामले की लंबी सुनवाई हुई। कलेक्टर रुचिका चौहान भी सुनवाई के दौरान कोर्ट में मौजूद रहीं। अदालत में खदान क्षेत्र की ड्रोन रिकॉर्डिंग दिखाई गई। इस रिकॉर्डिंग से खदानों की मौजूदा स्थिति समझने की कोशिश हुई।
खनन क्षेत्र के साथ क्रेशर इलाकों की तस्वीरें भी देखी गईं। मामले में खनिज विभाग के काम पर भी सवाल उठे। खनिज अधिकारियों से जुड़ी जांच के दस्तावेज कोर्ट में रखे गए। बिलौआ और रफादपुर की खदानों पर क्यों है विवाद यह मामला खनन पट्टों और कथित अवैध खनन से जुड़ा है।
खदानों के पट्टों के नवीनीकरण पर उठे सवाल
सुनवाई में अदालत ने खदानों का रिकॉर्ड मंगवाया था।रिकॉर्ड की जांच में कई सवाल सामने आने की बात कही गई। इसके बाद अदालत ने कई खदानों पर रोक लगाई। पहले 16 खदानों में खनन रोकने का आदेश सामने आया था। अदालत अब पूरे इलाके की स्थिति पर नजर रख रही है।
ड्रोन से खदानों की तस्वीरें क्यों कराई गईं
अदालत ने खनन क्षेत्र की वास्तविक स्थिति जाननी चाही। इसके लिए पूरे इलाके की ड्रोन रिकॉर्डिंग कराई गई। रिकॉर्डिंग में खदानों और क्रशर क्षेत्रों को देखा गया। इससे जमीन पर चल रही गतिविधियों की जानकारी मिल सकती है।
अदालत ने रिकॉर्डिंग को सुनवाई के दौरान देखा। कलेक्टर और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी भी रही। कोर्ट में रिकॉर्डिंग देखने के बाद बहस आगे बढ़ी।
क्यों अहम रही कलेक्टर की मौजूदगी
हाईकोर्ट ने मामले में जिला प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। अदालत ने अवैध खनन रोकने की जिम्मेदारी पर जोर दिया है। इसी वजह से कलेक्टर की मौजूदगी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
कलेक्टर सुनवाई के दौरान प्रशासन की ओर से मौजूद रहीं। उनके सामने खनन क्षेत्र की स्थिति पर चर्चा हुई। अदालत ने निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल पूछे।
खनिज विभाग ने निगरानी बढ़ाने के उपाय बताए
खनिज विभाग ने खदानों पर कैमरे लगाने की बात कही। इन कैमरों से खदान और क्रशर क्षेत्र पर नजर रखी जाएगी। वाहनों की निगरानी के लिए वजन मशीन लगाने का सुझाव आया। इससे ओवरलोड वाहनों की पहचान आसान हो सकती है। वाहन निकलते समय उसका वजन दर्ज किया जा सकेगा। इस व्यवस्था से अवैध परिवहन पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
बिलौआ के बाद बिजौली रास्ते की भी चर्चा
सुनवाई में खनिज परिवहन के रास्तों पर भी चर्चा हुई। बताया गया कि सख्ती के बाद रास्ता बदलने की बात सामने आई। गिट्टी ले जाने वाले वाहन बिजौली तरफ जाने लगे हैं। इससे सिर्फ एक जगह निगरानी करना पर्याप्त नहीं होगा। पूरे परिवहन मार्ग पर निगरानी जरूरी हो सकती है। अदालत के सामने यही पहलू भी महत्वपूर्ण बन गया है।
खनिज अधिकारियों से जुड़ी जांच का मुद्दा उठा
सुनवाई में खनिज अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठे। याचिकाकर्ता की ओर से कुछ दस्तावेज अदालत में रखे गए। इन दस्तावेजों में जांच से जुड़े रिकॉर्ड शामिल बताए गए। तत्कालीन अधिकारी घनश्याम यादव का नाम भी चर्चा में आया। उनसे जुड़ी शिकायतों और जांच का रिकॉर्ड पेश किया गया।
वर्तमान प्रभारी अधिकारी पंकज मिश्रा का नाम भी आया। उनसे जुड़ी लोकायुक्त जांच के दस्तावेज पेश होने की बात है। यह जांच अभी आरोप तय होने के बराबर नहीं मानी जा सकती। जांच का अंतिम नतीजा सामने आना बाकी है। अदालत अब रिकॉर्ड और जमीनी स्थिति दोनों देख रही है इस मामले में सिर्फ कागजी रिकॉर्ड ही नहीं देखा जा रहा।
अदालत ने जमीन पर वास्तविक स्थिति जानने की कोशिश की। इसी वजह से ड्रोन रिकॉर्डिंग को अहम माना जा रहा है। अदालत के सामने रिकॉर्डिंग और सरकारी दस्तावेज दोनों रखे गए। सुनवाई में सुबह से शाम तक बहस चलने की जानकारी है। मामले में आगे भी अदालत की निगरानी बनी रह सकती है। अब खनन क्षेत्र में निगरानी व्यवस्था पर नजर रहेगी।
अदालत की सख्ती से प्रशासन पर बढ़ा दबाव
बिलौआ क्षेत्र में खनन को लेकर पहले भी कार्रवाई हुई है। प्रशासन ने अवैध खनिज परिवहन पर वाहन जब्त किए हैं। फरवरी में बिलौआ क्षेत्र में बड़ी कार्रवाई भी हुई थी। उस दौरान अवैध बोल्डर मिलने की जानकारी सामने आई थी।
हाईकोर्ट की मौजूदा सुनवाई ने मामले को फिर चर्चा में ला दिया। अब प्रशासन को अदालत के निर्देशों का पालन करना होगा। खनन और परिवहन पर निगरानी इसका बड़ा हिस्सा रहेगी।
मामले में आगे क्या हो सकता है
अदालत आगे सरकारी रिकॉर्ड और जांच की स्थिति देख सकती है। ड्रोन रिकॉर्डिंग से मिली जानकारी भी महत्वपूर्ण हो सकती है। खनिज विभाग की निगरानी योजना पर भी नजर रहेगी।
खदानों में नियमों के पालन की जांच जारी रह सकती है। लोकायुक्त से जुड़े रिकॉर्ड पर भी अदालत विचार कर सकती है। फिलहाल मामले में अंतिम फैसला आना बाकी है। अगली सुनवाई में तस्वीर और साफ हो सकती है।
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