ईंधन संकट से निपटने की बड़ी तैयारी: बीना में बनेगा देश का सबसे बड़ा तेल भंडार
मार्च 2026 में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने पर भारत के सामने ईंधन संकट खड़ा हो गया था। इससे देश के कम तेल भंडार की कमजोरी सामने आई। अब मध्य प्रदेश के सागर जिले स्थित बीना और राजस्थान के बीकानेर में नए रणनीतिक तेल भंडार बनाने की योजना है।
बीना जिलाका भंडार देश के कुल रणनीतिक तेल भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा संभालेगा। इससे उत्तर भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।
होर्मुज संकट ने खोली भारत की कमजोरी
मार्च 2026 में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से भारत में ईंधन संकट जैसे हालात बन गए थे। ज्यादा आयात, कम रिजर्व और सप्लाई का एक ही रास्ता होने से ऊर्जा आपूर्ति चेन प्रभावित हुई। इस घटना ने साफ कर दिया कि भारत का मौजूदा तेल भंडार बहुत कम है।
केंद्र सरकार ने 1990 के दशक में ही इस खतरे को भांपकर स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व यानी एसपीआर बनाने की योजना बनाई थी। लेकिन तीन दशकों में यह काम काफी धीमी रफ्तार से चला। अभी भारत के पास सिर्फ 9.5 दिन का रणनीतिक कच्चा तेल भंडार है। यह भंडार तीन भूमिगत चट्टानी गुफाओं में रखा गया है। इसका संचालन इंडियन स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व लिमिटेड करती है। रिफाइनरियों के 65 दिन के अतिरिक्त स्टॉक को जोड़ने के बाद भी यह अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के 90 दिन के मानक से काफी कम है।
मध्य प्रदेश के बीना को क्यों चुना गया
सागर जिले का बीना देश के बीचोंबीच स्थित है। यहां पहले से भारत-ओमान रिफाइनरी लिमिटेड का ढांचा मौजूद है। इसी वजह से बीना को नए रणनीतिक तेल भंडार के लिए बेहद उपयोगी माना जा रहा है। मौजूदा तीनों रिजर्व दक्षिण भारत के तटीय इलाकों में हैं। इसलिए उत्तर भारत की रिफाइनरियों के पास आपातकाल के लिए नजदीकी भंडार नहीं है।
बीना और बीकानेर के प्रस्तावित रिजर्व मिलकर देश के कुल रणनीतिक तेल भंडार का करीब 48.90 प्रतिशत हिस्सा संभालेंगे। यह मौजूदा क्षमता से लगभग दोगुना होगा। इससे मध्य प्रदेश देश की ऊर्जा सुरक्षा नीति में एक अहम राज्य बनकर उभरेगा।
बीना में कितनी क्षमता का भंडार प्रस्तावित है
रिपोर्ट के मुताबिक बीना में करीब 50 लाख टन क्षमता का रिजर्व प्रस्तावित है। वहीं राजस्थान के बीकानेर में 56 लाख टन क्षमता का रिजर्व प्रस्तावित है। दोनों जगहों को मिलाकर करीब 106 लाख टन क्षमता के रिजर्व की संभावना तलाशी जा रही है।
देश में पहले से तीन एसपीआर केंद्र चालू हैं। कर्नाटक के मंगलूरु में 15 लाख टन और पादुर में 25 लाख टन क्षमता है। आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में 13.3 लाख टन क्षमता है। ओडिशा के चांडीखोल में 40 लाख टन क्षमता का रिजर्व प्रस्तावित है और इसी साल वहां काम शुरू हो सकता है। मंगलूरु और पादुर के भंडारों का भी विस्तार होगा।
इन सभी योजनाओं के पूरा होने पर देश की कुल एसपीआर क्षमता 216.8 लाख टन हो जाएगी। इससे तेल की उपलब्धता 9.5 दिन से बढ़कर करीब 40 दिन तक पहुंच जाएगी।
बीकानेर में नमक की परतों में जमा होगा तेल
देश के मौजूदा तेल भंडार भूगर्भीय चट्टानों को तोड़कर बनी गुफाओं में हैं। लेकिन बीकानेर में तेल जमीन से सैकड़ों फीट नीचे नमक की परतों यानी सॉल्ट कैवर्न में रखने पर विचार हो रहा है। इस तकनीक में जमीन में पानी डालकर नमक घोला जाता है। घोल बाहर निकालने की प्रक्रिया कई बार दोहराई जाती है, जिससे जमीन के नीचे खोखली गुफाएं बन जाती हैं।
ऊर्जा विशेषज्ञ सुरेश बी. रेड्डी के मुताबिक बीकानेर-बाड़मेर में इस तरह भंडारण की लागत 3,000 से 5,000 रुपए प्रति टन आएगी। यह चट्टानी गुफाओं की लागत का करीब एक-तिहाई है। एक गुफा में 1 से 5 लाख टन तक तेल रखा जा सकता है। अमेरिका भी टेक्सास और लुइसियाना की नमक गुफाओं में करीब 9.88 करोड़ टन कच्चा तेल स्टोर करता है।
मध्य प्रदेश के लिए इसका क्या मतलब है
बीना में प्रस्तावित रिजर्व से मध्य प्रदेश देश की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति का अहम केंद्र बन सकता है। भारत-ओमान रिफाइनरी का पहले से मौजूद ढांचा प्रोजेक्ट को तेजी से आगे बढ़ाने में मदद कर सकता है। इससे राज्य में रोजगार और औद्योगिक गतिविधियां भी बढ़ने की संभावना है। साथ ही उत्तर भारत की रिफाइनरियों को संकट के समय नजदीकी सप्लाई मिल सकेगी।
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