एमपी में नर्सिंग कॉलेज के हाल बेहाल, कागजों पर चल रहा इलाज, जमीन पर सन्नाटा
Aman Vaishnav | Aug 02, 2026, 11:10 IST
एमपी में नर्सिंग कॉलेज के हाल बेहाल
मध्य प्रदेश के कई नर्सिंग कॉलेजों में मान्यता के लिए दिखाए गए अस्पताल असल में बंद निकले। इन अस्पतालों में न तो मरीज मौजूद हैं और न ही डॉक्टर या नर्सिंग स्टाफ तैनात हैं।
समझें क्या है पूरा मामला...
- भोपाल के कई नर्सिंग कॉलेजों के अस्पताल सिर्फ कागजों पर चल रहे थे।
- इन अस्पतालों में न मरीज मिले, न डॉक्टर और स्टाफ।
- कुछ जगह अचानक सफाई और पेंटिंग का काम शुरू हुआ।
- नर्सिंग काउंसिल ने कलेक्टर को 38 मामले जांच के लिए भेजे हैं।
- कलेक्टर ने तीन दिन में रिपोर्ट के लिए समिति बना दी है।
एक जांच में तो शिवराज सिंह कॉलेज के अस्पताल का सामान कबाड़ हालत में मिला। कई जगह प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के रिकॉर्ड में अस्पताल दर्ज हैं लेकिन मौके पर कोई गतिविधि नहीं दिखी।
निम्स हॉस्पिटल में सन्नाटा
भवन तो वहां मौजूद था लेकिन न कोई मरीज दिखा न डॉक्टर या स्टाफ। जांच शुरू होने के बाद अब यहां सफाई का काम शुरू हुआ है।
काया अस्पताल का सच
अब इसका नाम काया अस्पताल है। रिसेप्शन पर कोई मरीज नहीं मिला। पूरे परिसर में कोई गतिविधि नजर नहीं आई।
कैसे होता है फर्जीवाड़ा
इससे अस्पताल का सेटअप दिखता है। भवन पर बोर्ड लगाकर इमरजेंसी वार्ड और डॉक्टरों के नाम लिख दिए जाते हैं।
निरीक्षण के समय ही कुछ डॉक्टर वहां नजर आते हैं। बाकी दिनों में अस्पताल में कोई मौजूद नहीं रहता। इस तरह मान्यता तो मिल जाती है, लेकिन असली अस्पताल कहीं चलता नहीं।
कलेक्टर की सख्ती
एक्सपर्ट की राय
यह पूरा मामला सिर्फ कागजी कार्रवाई का नहीं है। इसका सीधा असर मरीजों की सुरक्षा पर पड़ता है। इसलिए इस पर सख्त कार्रवाई की जरूरत बताई जा रही है।
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