सैकड़ों गाड़ियों के काफिले से पहुंचे नेता, BJP ऑफिस के बाहर अचानक शुरू हो गया ई-रिक्शा संस्कार

Jitendra Shrivastava | May 12, 2026, 18:32 IST
Photograph: (THESOOTR)
BHOPAL. भोपाल में मोदी की पेट्रोल-डीजल बचत अपील के बाद देश को लगा कि शायद अब नेता भी सादगी का संदेश देंगे, लेकिन मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में जो हुआ, उसने लोगों को हंसने, चिढ़ने और तंज कसने का मौका दे दिया।

राजनीति में संदेश कैसे इवेंट बनते हैं और अपील कैसे फोटो ऑप में बदल जाती है, इसका शानदार नमूना भोपाल में देखने को मिला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक हालातों को देखते हुए देशवासियों से पेट्रोल-डीजल के संयमित इस्तेमाल की अपील की है। देश को लगा कि शायद अब नेता भी सादगी का संदेश देंगे, लेकिन मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में जो हुआ, उसने लोगों को हंसने, चिढ़ने और तंज कसने का मौका दे दिया।



मामला निगम-मंडलों में हुई नई नियुक्तियों का है। मंगलवार,12 मई को कई नवनियुक्त अध्यक्ष पदभार ग्रहण करने के लिए भोपाल पहुंचे थे। मध्यप्रदेश लघु उद्योग निगम के अध्यक्ष सत्येंद्र भूषण सिंह, मध्यप्रदेश खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष पंकज जोशी और मध्यप्रदेश कुश समाज कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष प्रभु दयाल कुशवाहा ने कार्यभार संभाला।



इससे पहले कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा और किस्सा सैकड़ों लोगों ने देखा। दरअसल, नेताजी अपने समर्थकों, स्वागत टोलियों, फूलमालाओं और लग्जरी गाड़ियों के लंबे काफिलों के साथ भोपाल पहुंचे थे। पेट्रोल-डीजल तब तक धड़ल्ले से जलता रहा, जब तक काफिला बीजेपी कार्यालय के बाहर नहीं पहुंच गया। जैसे ही कैमरे ऑन हुए और मीडिया की नजर पड़ी, अचानक सबको प्रधानमंत्री मोदी का संदेश याद आ गया।



बस फिर क्या था... बीजेपी दफ्तर के मेन गेट से अंदर तक करीब 50 से 80 मीटर की दूरी ई-रिक्शा से तय की गई। नेता ई-रिक्शा में ऐसे बैठकर पहुंचे मानो देश में ईंधन बचाने की क्रांति यहीं से शुरू होने वाली हो। बाद में बाकायदा मीडिया के सामने बाइट दी गई कि प्रधानमंत्री मोदी की अपील को शिरोधार्य करते हुए ई-रिक्शा का उपयोग किया गया है।



इन सबके बीच बीजेपी दफ्तर के बाहर का नजारा इस त्याग की असली कहानी बता रहा था। लिंक रोड पर नेताओं के काफिलों ने ऐसा जाम लगाया कि करीब दो घंटे तक आम लोग गाड़ियों में फंसे रहे। सड़क पर पेट्रोल और डीजल फूंकती एसयूवी, लग्जरी कारें और स्वागत वाहन कतार में खड़े थे, जबकि अंदर ढोल-ताशों के बीच सादगी का उत्सव मनाया जा रहा था।





BJP OFFICE

कार्यक्रम खत्म होने के बाद दृश्य...

एक-एक ई-रिक्शा में 10-10 नेता लदे हुए बाहर निकले। आगे फूल बरसाने वाली गाड़ी पेट्रोल पी रही थी, पीछे लग्जरी गाड़ियों का काफिला धुआं उड़ा रहा था और बीच में ई-रिक्शा संयम का प्रतीक बना हुआ था। ऐसा लग रहा था मानो पेट्रोल बचाने का पूरा बोझ सिर्फ उन्हीं 50 मीटर पर डाल दिया गया हो।




बीजेपी दफ्तर के बाहर मौजूद कई लोगों ने सवाल किए कि यदि पेट्रोल बचाने की शुरुआत करनी ही थी, तो क्या वह 50 मीटर के ई-रिक्शा शो से होनी थी? और यदि सादगी दिखानी थी तो फिर सैकड़ों गाड़ियों का लश्कर किस संदेश का हिस्सा था?



निगम-मंडल या शक्ति प्रदर्शन मंडल?

bjp leaders


वैसे यह पहला मौका नहीं है। निगम-मंडलों की कुर्सियां इन दिनों शक्ति प्रदर्शन का मंच बन चुकी हैं। गुना के पूर्व सांसद केपी यादव जब राज्य खाद्य आपूर्ति निगम के अध्यक्ष बनने भोपाल पहुंचे थे, तब दावा हुआ कि उनके साथ करीब 500 गाड़ियों का काफिला था। इसी तरह मध्यप्रदेश पाठ्य पुस्तक निगम के चेयरमैन सौभाग्य सिंह उज्जैन से भोपाल तक करीब 700 गाड़ियों के साथ पहुंचे थे।



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