क्या फिर से लौटने वाले हैं कैश वाले दिन? जानें डिजिटल पेमेंट पर क्यों छिड़ा घमासान

Amresh Kushwaha | Sept 23, 2026, 13:47 IST
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UPI बंद तो 2 हजार से ऊपर पेमेंट कैसे करें
UPI बंद तो 2 हजार से ऊपर पेमेंट कैसे करें

आज मध्य प्रदेश में व्यापारी नो-UPI डे मना रहे हैं। दो हजार रुपए से ऊपर पेमेंट पर 0.4% MDR लगने के विरोध में यह कदम है। जानें आज पेमेंट कैसे करें, कैश की जरूरत पड़े तो क्या करें...

समझें क्या है पूरा मामला...

  • दो हजार रुपए से ऊपर UPI पेमेंट पर अब 0.4 प्रतिशत चार्ज लगेगा।
  • इसके विरोध में आज मध्य प्रदेश में नो-UPI डे मनाया जा रहा है।
  • दुकानदार UPI स्कैनर पर काला कपड़ा बांधकर विरोध जता रहे हैं।
  • यह सरकारी आदेश नहीं, बल्कि व्यापारियों का सांकेतिक विरोध है।
  • असली फैसला 15 से 16 अक्टूबर के आसपास सामने आ सकता है।
आज मध्य प्रदेश के कई बाजारों में अजीब नजारा दिख रहा है। दुकानदारों ने अपने UPI स्कैनर पर काला कपड़ा बांध दिया है। यह उनका एक अनोखा तरीका है विरोध जताने का।दरअसल 15 सितंबर को एक बड़ा एलान हुआ था। अब दो हजार रुपए से ज्यादा के यूपीआई पेमेंट पर 0.4 प्रतिशत MDR (मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी Merchant Discount Rate) लगेगा।

इसी फैसले के खिलाफ आज देशभर में व्यापारी विरोध कर रहे हैं। मध्य प्रदेश में इसे नो-UPI डे नाम दिया गया है। आइए स्टेप बाय स्टेप समझते हैं कि आज आपके लिए क्या मायने रखता है।

क्या आज UPI बंद रहेगा

सबसे पहली और जरूरी बात समझ लीजिए। यह कोई सरकारी आदेश नहीं है। यह सिर्फ व्यापारिक संगठनों का सांकेतिक विरोध है। इसका मतलब है कि हर दुकान पर UPI बंद नहीं रहेगा। सिर्फ वही दुकानदार UPI मना करेंगे, जिन्होंने इस अभियान में हिस्सा लिया है।

भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर और सागर में यह विरोध चल रहा है। अकेले इंदौर में 100 से ज्यादा व्यापारिक संगठन इसमें शामिल हैं। यहां रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन ने पोस्टर अभियान भी शुरू किया है। इनका लक्ष्य चार दिन में 10 लाख लोगों तक पहुंचना है। काला कपड़ा दिखने का मतलब सीधा है।

दुकानदार बता रहा है कि आज वह UPI नहीं ले रहा। कुछ दुकानों पर यह पूरे दिन के लिए है। कुछ जगह यह सिर्फ प्रतीकात्मक तरीका है। इसलिए खरीदारी से पहले दुकानदार से एक बार जरूर पूछ लें।

पेमेंट के दूसरे विकल्प

अगर आज किसी दुकान पर UPI नहीं चला तो घबराने की जरूरत नहीं है। कैश, डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड जैसे विकल्प मौजूद हैं। मान लीजिए आपको पांच हजार रुपए की खरीदारी करनी है। दुकानदार यदि UPI नहीं ले रहा, तो कार्ड या नकद से भुगतान किया जा सकता है। नो-UPI डे का मतलब नो-डिजिटल-पेमेंट डे बिल्कुल नहीं है।

कार्ड और दूसरे माध्यम आज भी काम कर सकते हैं। हालांकि यह हर दुकान पर अलग-अलग हो सकता है। इंदौर रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अक्षय जैन का कहना है कि यह अभियान UPI के खिलाफ बिल्कुल नहीं है। उनके मुताबिक छोटे दुकानदारों को इससे ज्यादा नुकसान होगा। इसलिए वे शांतिपूर्ण तरीके से सरकार तक अपनी बात पहुंचाना चाहते हैं।

कैश निकालने पर शुल्क

यदि आपको आज ज्यादा कैश निकालना पड़े तो एक बात जान लें। RBI (भारतीय रिजर्व बैंक यानी Reserve Bank Of India) के नियम के मुताबिक अपने बैंक के ATM से महीने में पांच बार निकासी मुफ्त है। दूसरे बैंक के ATM पर बड़े शहरों में तीन बार और छोटे शहरों में 5 बार मुफ्त निकासी मिलती है।

इसके बाद हर निकासी पर 23 रुपए तक शुल्क और टैक्स लग सकता है। इसलिए यदि आज ज्यादा कैश की जरूरत पड़े, तो सीमा का ध्यान रखें। वरना जेब पर छोटा सा अतिरिक्त बोझ भी पड़ सकता है।

कैश निकालने पर शुल्क
कैश निकालने पर शुल्क


प्रदेश पर कितना असर

अब सवाल है कि इस विरोध का मध्य प्रदेश पर कितना असर पड़ेगा। मध्य प्रदेश में हर महीने करीब 63 हजार 628 करोड़ रुपए का UPI कारोबार होता है। इसमें इंदौर अकेले 11 हजार 329 करोड़ रुपए के साथ सबसे आगे है। भोपाल में यह आंकड़ा छह हजार 635 करोड़ रुपए है।

ग्वालियर में तीन हजार 316 करोड़, जबलपुर में दो हजार 809 करोड़ और उज्जैन में दो हजार 730 करोड़ रुपए है। धार और देवास में यह क्रमश: एक हजार 857 करोड़ और एक हजार 584 करोड़ रुपए है। इंदौर और भोपाल मिलाकर हर महीने 17 हजार 963 करोड़ रुपए का कारोबार करते हैं।

यह प्रदेश के कुल UPI कारोबार का करीब 28 प्रतिशत है। वहीं RBI के आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश के 170 करेंसी चेस्ट (बैंकों के नकदी केंद्र) से हर महीने करीब 22 हजार 12 करोड़ रुपए कैश निकलता है।

यानी औसतन रोज करीब 733 करोड़ रुपए कैश की निकासी होती है। ये दोनों आंकड़े सीधे एक जैसे नहीं हैं। लेकिन इनसे डिजिटल और कैश सिस्टम का पैमाना समझ आता है। सरकार के मुताबिक करीब 96 प्रतिशत छोटे UPI पेमेंट दो हजार रुपए से कम के हैं। इसलिए चाय-नाश्ते जैसी छोटी खरीदारी पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

UPI बंद तो 2 हजार से ऊपर पेमेंट कैसे करें
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MDR का बोझ किस पर

एक जरूरी सवाल यह भी है कि क्या दुकानदार ग्राहक से यह चार्ज अलग से ले सकता है। जवाब है नहीं। MDR दुकानदार की अपनी लागत है, ग्राहक पर अलग से नहीं डाला जा सकता। यानी पांच हजार रुपए का सामान लिया तो पांच हजार रुपए ही देने होंगे।

बिल में अलग से UPI चार्ज नहीं जोड़ा जा सकता। लेकिन व्यापारियों का कहना है कि व्यवहार में यह उतना आसान नहीं है। थोक किराना कारोबारी विवेक साहू के मुताबिक कई कारोबार में मुनाफा एक प्रतिशत भी नहीं बचता।

यदि दिन में 10 बड़े पेमेंट आएं, तो एक दुकान पर तीन हजार रुपए तक का बोझ पड़ सकता है। ऐसे में हो सकता है दुकानदार सीधे पैसा न मांगकर UPI लेना ही बंद कर दे। या फिर सामान का दाम थोड़ा बढ़ा दे।

यदि कोई दुकानदार सीधे अतिरिक्त पैसा मांगे, तो इसकी शिकायत बैंक या पेमेंट ऐप में की जा सकती है। इंदौर और भोपाल के आंकड़ों से भी असर समझा जा सकता है। यहां हर महीने करीब तीन हजार 591 करोड़ रुपए के पेमेंट दो हजार रुपए से ऊपर के माने जाते हैं। इस पर 0.4 प्रतिशत की दर से करीब 14.4 करोड़ रुपए महीने का MDR बन सकता है। हालांकि यह राष्ट्रीय स्तर के अनुमान पर आधारित आंकड़ा है, असली वसूली नहीं।

आगे क्या हो सकता है

आज का विरोध सिर्फ एक दिन का सांकेतिक कदम है। लेकिन इसका असर आगे भी बना रह सकता है। जहां ज्यादातर बिल दो हजार रुपए से ऊपर के बनते हैं, वहां असर ज्यादा होगा। भोपाल के थोक किराना बाजार में 90 प्रतिशत से ज्यादा लेनदेन इसी दायरे में आते हैं। सर्राफा कारोबार में तो यह आंकड़ा 95 प्रतिशत से भी ऊपर है।

ऑटोमोबाइल बुकिंग में तो लगभग हर पेमेंट इस दायरे में आएगा। पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन का कहना है कि हर बड़े ट्रांजेक्शन पर करीब 5.90 रुपए का खर्च आएगा। अगर MDR वापस नहीं लिया गया तो 16 अक्टूबर से पंपों पर बड़ा UPI पेमेंट पूरी तरह बंद हो सकता है।

यह पूरा विवाद ठीक त्योहारी सीजन शुरू होने पर उठा है। भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स ने प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को पत्र लिखकर जीरो-MDR की मांग की है। असली तस्वीर 15 से 16 अक्टूबर के आसपास साफ हो सकती है। तभी पता चलेगा कि कितने व्यापारी वाकई UPI छोड़ते हैं।

यह खबर क्यों जरूरी है

यह खबर सीधे आम लोगों की रोजमर्रा की खरीदारी से जुड़ी है। हर व्यक्ति को यह जानने का हक है कि पेमेंट के नियम कब और क्यों बदल रहे हैं। व्यापारियों का विरोध जताने का तरीका शांतिपूर्ण और वैध है, जो संविधान में मिले अभिव्यक्ति के अधिकार का हिस्सा है।

साथ ही यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि ग्राहकों से गलत तरीके से अतिरिक्त पैसा न लिया जाए। यह रिपोर्ट सरकारी आंकड़ों, RBI के नियमों और व्यापारी संगठनों के पक्ष को साथ रखकर तैयार की गई है। इसका मकसद किसी पक्ष को गलत ठहराना नहीं, बल्कि पाठकों को सही और उपयोगी जानकारी देना है। डिजिटल भुगतान से जुड़ी पारदर्शिता आम उपभोक्ता के हित में बेहद जरूरी है।

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