कफ सिरप कांड: हाईकोर्ट से दो आरोपियों को जमानत, अभियोजन का विरोध भी नहीं आया काम
ऐसे समझें क्या है पूरा मामला...
- 30 जून 2026 को जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की एकलपीठ ने सुनाया आदेश।
- मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव सतीश वर्मा और शैलेश सिंह पांड्या को मिली जमानत।
- अभियोजन ने दोनों की भूमिका गंभीर बताते हुए जमानत का कड़ा विरोध किया।
- मामला कथित रूप से जहरीले कफ सिरप के निर्माण, प्रचार और वितरण से जुड़ा है।
- मामले की जांच और अन्य आरोपियों के विरुद्ध न्यायिक प्रक्रिया अभी भी जारी है।
कफ सिरप कांड:परासिया के चर्चित कफ सिरप मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की एकलपीठ ने मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव सतीश वर्मा और शैलेश सिंह पांड्या को जमानत दे दी।
अभियोजन ने दोनों की भूमिका गंभीर बताते हुए जमानत का विरोध किया था, लेकिन उपलब्ध तथ्यों के विश्लेषण के बाद अदालत ने राहत प्रदान कर दी।
हाईकोर्ट से दो आरोपियों को राहत
छिंदवाड़ा के बहुचर्चित परासिया कफ सिरप मामले में मंगलवार, 30 जून 2026 को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से बड़ा घटनाक्रम सामने आया। जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की एकलपीठ ने मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव सतीश वर्मा और शैलेश सिंह पांड्या की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए उन्हें जमानत प्रदान कर दी।
अदालत ने उपलब्ध तथ्यों और रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री का विश्लेषण करने के बाद दोनों आरोपियों को राहत दी। इसके साथ ही लंबे समय से न्यायिक हिरासत में बंद दोनों आरोपियों के जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है।
अभियोजन ने बताया था दोनों की भूमिका गंभीर
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष दोनों आरोपियों की भूमिका को अत्यंत गंभीर बताते हुए जमानत का कड़ा विरोध किया। अभियोजन का तर्क था कि दोनों आरोपी कथित रूप से जहरीले कफ सिरप के प्रचार-प्रसार, वितरण और डॉक्टरों तक उसकी पहुंच बनाने वाले नेटवर्क का अहम हिस्सा रहे हैं।
अभियोजन ने यह भी आशंका जताई कि आरोपियों को जमानत मिलने से मुकदमे पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है और साक्ष्यों तथा गवाहों पर असर पड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद हाईकोर्ट ने उपलब्ध तथ्यों पर विचार करते हुए उन्हें जमानत देने का आदेश पारित किया।
कब हुई थी गिरफ्तारी और क्या हैं आरोप
रिकॉर्ड के अनुसार सतीश वर्मा को 26 अक्टूबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था, जबकि शैलेश सिंह पांड्या को नवंबर 2025 में पुलिस ने हिरासत में लिया था।
दोनों तब से न्यायिक हिरासत में रहकर मुकदमे का सामना कर रहे थे। जांच एजेंसियों का आरोप है कि दोनों आरोपी कथित रूप से कोल्ड्रिफ नामक कफ सिरप के प्रचार, सप्लाई और डॉक्टरों के माध्यम से उसके प्रिस्क्रिप्शन बढ़ाने की गतिविधियों में शामिल थे। इस पूरे मामले की जांच स्वास्थ्य विभाग, पुलिस और ड्रग विभाग की संयुक्त टीम ने की थी।
डॉक्टरों और फार्मा नेटवर्क की भूमिका
जांच के दौरान दवा निर्माण, वितरण और विपणन से जुड़े कई लोगों की भूमिका सामने आने का दावा किया गया। इस मामले में मुख्य आरोपी के रूप में डॉ. प्रवीण सोनी का नाम सामने आया था। इसके अलावा ज्योति सोनी, सौरभ जैन, राजेश सोनी, सतीश वर्मा, शैलेश सिंह पांड्या सहित कई अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया गया।
अभियोजन का दावा था कि सतीश वर्मा श्रीसन फार्मास्युटिकल्स कंपनी में मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव के रूप में कार्यरत था और कंपनी तथा मुख्य आरोपी के बीच समन्वय स्थापित करने का कार्य करता था।
जांच के दौरान उसके घर से एक रजिस्टर भी बरामद होने का दावा किया गया, जिसमें डॉक्टरों को दिए गए उपहार और अन्य लाभों का विवरण दर्ज होने की बात कही गई।
28 वर्षों की सेवा का भी अभियोजन ने किया उल्लेख
अभियोजन ने अदालत को यह भी बताया कि सतीश वर्मा लगभग 28 वर्षों से कंपनी से जुड़ा हुआ था और उसे कंपनी की प्रयोगशाला संबंधी कमियों की जानकारी होने के बावजूद वह कथित रूप से दवा की बिक्री और उसके प्रिस्क्रिप्शन बढ़ाने में सक्रिय बना रहा।
अभियोजन ने इस आधार पर जमानत का विरोध किया और कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए पूर्व में कई अन्य आरोपियों की जमानत याचिकाएं भी खारिज की जा चुकी हैं। हालांकि इस बार हाईकोर्ट ने उपलब्ध सामग्री के परीक्षण के बाद दोनों आरोपियों को राहत प्रदान कर दी।
मामले की जांच और ट्रायल अभी जारी
हाईकोर्ट द्वारा जमानत दिए जाने का अर्थ आरोपों से मुक्ति नहीं है। मामले का ट्रायल अभी जारी है और जांच एजेंसियां अन्य आरोपियों के संबंध में भी कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ा रही हैं। अब इस बहुचर्चित प्रकरण में आगे की न्यायिक कार्यवाही और ट्रायल के दौरान प्रस्तुत होने वाले साक्ष्यों पर सभी की नजर रहेगी।
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