छिंदवाड़ा कफ सिरप कांड : मासूमों की मौत के आरोपी डॉक्टर की हाईकोर्ट से जमानत खारिज

Neel Tiwari | Feb 17, 2026, 17:45 IST
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High Court rejects bail of doctor accused of death of 26 children
Photograph: (the sootr)

छिंदवाड़ा कफ सिरप कांड में 30 बच्चों की मौत के आरोपी डॉ. प्रवीण सोनी की जमानत याचिका कोर्ट ने खारिज कर दी है। जबलपुर हाईकोर्ट ने इसे गंभीर अपराध माना है।

News in Short

  • छिंदवाड़ा कफ सिरप कांड में आरोपी डॉ. प्रवीण सोनी की जमानत याचिका खारिज।
  • जहरीली ‘कोल्ड्रिफ’ सिरप से 30 से ज्यादा बच्चों की किडनी फेल होने से हुई थी मौत।
  • सरकारी लैब में 46.28% डायथिलीन ग्लाइकोल (DEG) मिला, जबकि सीमा 0.1%।
  • नागपुर के डॉक्टर ने पहले ही दी थी 1998 दिल्ली कांड जैसी चेतावनी।
  • पत्नी की मेडिकल दुकान से जबरन दवा दिलाने और कमीशन लेने के आरोप।

Intro

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ ने छिंदवाड़ा के चर्चित कफ सिरप कांड में बड़ा फैसला सुनाया है। 30 से अधिक बच्चों की मौत के मामले में मुख्य आरोपी डॉक्टर प्रवीण सोनी की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी गई है।

जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल ने मामले को “अत्यंत गंभीर और संवेदनशील” बताते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने डॉक्टर प्रवीण सोनी सहित सौरभ कुमार जैन, राजेश कुमार सोनी और डॉक्टर प्रवीण सोनी की पत्नी ज्योति सोनी की जमानत भी खारिज कर दी है।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की मुख्यपीठ जबलपुर में सुनवाई के दौरान जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल ने साफ कहा कि यह मामला सामान्य मेडिकल लापरवाही का नहीं है।

अदालत ने माना कि जब 30 से अधिक मासूम बच्चों की जान चली गई हो और सार्वजनिक स्वास्थ्य के साथ इस तरह का खिलवाड़ हुआ हो, तब आरोपी को जमानत देना न्यायोचित नहीं माना जा सकता।

कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए नियमित जमानत याचिका सिरे से खारिज कर दी। आपको बता दें कि यह आदेश कोर्ट के द्वारा 2 फरवरी को सुरक्षित किया गया था और अब 17 फरवरी को यह आदेश जारी हुआ है।



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जहरीली ‘कोल्ड्रिफ’ सिरप बना मौत का कारण

जांच में सामने आया कि बच्चों को ‘कोल्ड्रिफ’ नामक कफ सिरप दी गई थी। सरकारी लैब रिपोर्ट में इस सिरप में 46.28% डायथिलीन ग्लाइकोल (DEG) पाया गया, जबकि सुरक्षित सीमा महज 0.1% होनी चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार DEG बच्चों के लिए जानलेवा जहर की तरह काम करता है और इससे किडनी फेल हो सकती है। यही कारण था कि दर्जनों बच्चों की हालत बिगड़ती गई और उनकी मौत हो गई।

1998 दिल्ली कांड जैसी चेतावनी, फिर भी नहीं रुके

अभियोजन ने अदालत को बताया कि नागपुर के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. प्रवीण खापेकर ने 11 सितंबर 2025 को ही फोन पर चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि बच्चों के लक्षण 1998 के दिल्ली कांड जैसे लग रहे हैं, जिसमें जहरीली सिरप से 33 बच्चों की मौत हुई थी। इसके बावजूद आरोपी डॉक्टर ने सिरप लिखना बंद नहीं किया। इतना ही नहीं, दिसंबर 2023 में केंद्र सरकार ने 4 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए ऐसी फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन दवाओं पर रोक लगा दी थी, लेकिन इस प्रतिबंध का भी पालन नहीं किया गया।

कमीशन का खेल, पत्नी का मेडिकल स्टोर और गंभीर आरोप

मामले में आर्थिक लाभ का पहलू भी सामने आया है। अभियोजन के अनुसार, डॉक्टर की पत्नी ज्योति सोनी ‘अपना मेडिकल स्टोर’ संचालित करती हैं, जो क्लिनिक के पास ही है। आरोप है कि हर सिरप की बोतल पर 10% कमीशन लिया जाता था और मरीजों के परिजनों पर दबाव डालकर उसी दुकान से दवा खरीदवाई जाती थी।

जब बच्चों की मौत का मामला सामने आने लगा, तब जहरीली सिरप के स्टॉक को खत्म करने और सबूत मिटाने की साजिश रचने के भी आरोप लगे हैं। पुलिस जांच में इस एंगल की भी गहराई से पड़ताल की जा रही है।

बचाव पक्ष की दलीलें खारिज

बचाव पक्ष ने दलील दी थी कि डॉक्टर केवल दवा प्रिस्क्राइब कर रहे थे और मिलावट के लिए दवा निर्माता जिम्मेदार है। लेकिन हाईकोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि जब संभावित खतरे की जानकारी थी और चेतावनी भी मिल चुकी थी, तब निजी लाभ के लिए बच्चों की जान जोखिम में डालना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।

यह मामला अब पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है। 30 मासूमों की मौत ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। हाईकोर्ट के इस सख्त रुख से साफ है कि न्यायालय ऐसे मामलों में किसी तरह की ढिलाई के मूड में नहीं है।

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