चाइल्ड केयर लीव महिला संविदा कर्मियों का अधिकार, SEC डायरेक्टर पर 50 हजार का जुर्माना
समझें क्या है पूरा मामला
• संविदा महिला कर्मचारी ने चाइल्ड केयर लीव नहीं मिलने पर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
• हाई कोर्ट पहले भी कई बार महिला के पक्ष में आदेश दे चुका था।
• फिर भी राज्य शिक्षा केंद्र ने छुट्टी देने से इनकार कर दिया।
• कोर्ट ने इसे अपने आदेश की अनदेखी माना।
• अब कोर्ट ने 50 हजार रुपए का जुर्माना लगाते हुए छुट्टी देने का आदेश दिया।
संविदा महिला कर्मचारियों के अधिकारों पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है। जबलपुर हाई कोर्ट ने कहा कि संविदा कर्मचारी भी चाइल्ड केयर लीव की हकदार हैं। अदालत ने साफ किया कि कोर्ट के आदेश से ऊपर कोई विभागीय सर्कुलर नहीं हो सकता। इसी वजह से राज्य शिक्षा केंद्र के डायरेक्टर हरजिंदर सिंह (आईएएस हरजिंदर सिंह) पर 50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया।
महिला कर्मचारी को क्यों जाना पड़ा फिर से कोर्ट
अधिवक्ता निखिल तिवारी ने बताया कि यह मामला आयशा शेख से जुड़ा है। उन्होंने चाइल्ड केयर लीव के लिए आवेदन दिया था। विभाग ने 16 जुलाई 2026 को उनका आवेदन खारिज कर दिया। विभाग ने कहा कि संविदा कर्मचारियों के लिए ऐसी छुट्टी का नियम नहीं है। इसके बाद महिला कर्मचारी फिर हाई कोर्ट पहुंचीं।
पहले भी कई बार मिल चुका था कोर्ट से राहत
सुनवाई में सामने आया कि यह पहला मामला नहीं था। महिला कर्मचारी पहले भी कई बार कोर्ट पहुंच चुकी थीं। साल 2020 से लेकर 2026 तक अलग-अलग याचिकाओं में उन्हें राहत मिली। डिवीजन बेंच ने भी उनके पक्ष में फैसला दिया। सुप्रीम कोर्ट ने भी उस फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद भी विभाग ने आदेश लागू नहीं किया।
कोर्ट ने विभाग की दलील क्यों नहीं मानी
राज्य की ओर से बताया गया कि नया आवेदन मिलने पर छुट्टी (child care leave mp) दे दी जाएगी। लेकिन कोर्ट ने रिकॉर्ड देखा। अदालत ने पाया कि पहले भी कई आदेश दिए जा चुके थे। इसके बावजूद विभाग बार-बार वही कारण बताकर आवेदन खारिज करता रहा। कोर्ट ने इसे गंभीर लापरवाही माना।
जस्टिस विशाल धगट ने क्या कहा
जस्टिस विशाल धगट ने कहा कि अदालत कानून की व्याख्या करती है। विभाग को कोर्ट के आदेश मानने होंगे। केवल सरकारी सर्कुलर का सहारा लेकर आदेश टालना (महिला कर्मचारी अवकाश) सही नहीं है। अदालत ने कहा कि बार-बार दिए गए फैसलों की अनदेखी स्वीकार नहीं की जा सकती।
संविधान और बच्चों के हित पर भी हुई चर्चा
अधिवक्ता निखिल तिवारी के मुताबिक कोर्ट ने अपने पुराने फैसले का भी जिक्र किया। अदालत ने कहा कि संविधान बच्चों की सुरक्षा और महिलाओं के अधिकारों की बात करता है। चाइल्ड केयर लीव का उद्देश्य बच्चों की देखभाल सुनिश्चित करना है। इसलिए इस अधिकार को केवल नियमित कर्मचारियों तक सीमित नहीं रखा जा सकता।
240 दिन की छुट्टी का भी दिया था आधार
कोर्ट ने पहले के फैसलों का हवाला दिया। उसमें कहा गया था कि संविदा महिला कर्मचारी भी 240 दिन की चाइल्ड केयर लीव की हकदार हो सकती हैं। अदालत ने मातृत्व लाभ कानून और संविधान की भावना को भी आधार बनाया। इसी वजह से महिला को राहत देने के निर्देश दोहराए गए।
डायरेक्टर पर 50 हजार रुपए का जुर्माना
हाई कोर्ट ने राज्य शिक्षा केंद्र के डायरेक्टर हरजिंदर सिंह पर 50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया। अदालत ने कहा कि यह राशि 30 दिन के भीतर हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के पास जमा करनी होगी। समय पर राशि जमा नहीं होने पर मामला फिर कोर्ट में रखा जाएगा।
महिला कर्मचारी को तुरंत राहत देने का आदेश
कोर्ट ने 16 जुलाई 2026 का आदेश रद्द कर दिया। साथ ही विभाग को तुरंत चाइल्ड केयर लीव मंजूर करने का निर्देश दिया। आदेश की प्रति प्रमुख सचिव और महाधिवक्ता को भी भेजने के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही याचिका का निपटारा कर दिया गया।
इस फैसले का क्या असर होगा
यह फैसला केवल एक कर्मचारी तक सीमित नहीं माना जा रहा। इससे दूसरे संविदा कर्मचारियों को भी राहत मिल गई है। यदि किसी कर्मचारी को केवल संविदा होने के कारण चाइल्ड केयर लीव से वंचित किया गया है, तो वह इस फैसले का सहारा ले सकता है। यह आदेश विभागों को भी कोर्ट के फैसलों का पालन करने का स्पष्ट संदेश देता है। हालांकि हाई कोर्ट के आदेश के बाद भी सरकारी कर्मचारियों की हठधर्मिता एक बड़ा सवाल खड़ा कर रही है।
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