चौकीदार-चपरासी ने मांगा नियमित वेतन, पंचायत राज संचालक ने कहा, झुंझना नहीं जो थमा दें

Sanjay Sharma | Jan 05, 2026, 23:18 IST
chowkidar peon regular salary
मध्य प्रदेश के पंचायतकर्मी सरकार की बेरुखी से नाराज हैं। इन कर्मियों को महीनों से वेतन नहीं मिल रहा। विभाग उन्हें दो से तीन टुकड़ों में भुगतान कर रहा है।

BHOPAL. कभी जिन्हें सरकार अपनी तीसरी आंख बताती थी अब वे चौकीदार ही सरकार पर बोझ बन गए हैं। काम करने के बावजूद इन चौकीदार, चपरासी, पंप ऑपरेटर जैसे पंचायतकर्मियों को महीनों से वेतन ही नहीं मिल रहा है।



मामूली वेतन होने के बावजूद विभाग दो से तीन टुकड़ों में रुपए दे रहा है। इससे नाराज हजारों पंचायतकर्मी सोमवार को भोपाल पहुंचे। उन्होंने अरेरा हिल्स स्थित पंचायत विभाग के विकास भवन का घेराव किया।



पंचायतकर्मियों ने सरकार की बेरुखी और अधिकारियों के पक्षपात पर नाराजगी जताई। पंचायत राज डायरेक्टर ने कहा कि सरकार के पास झुंझुना नहीं है। इस बयान से पंचायतकर्मियों में नाराजगी दिखी।



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वेतन देने में सरकार का हाथ तंग

प्रदेश की पंचायतों में हर छोटे- बड़े काम को करने वाले कर्मचारी सरकार द्वारा उन पर ध्यान न देने से नाराज हैं। पंचायतकर्मियों में चौकीदार, पंप ऑपरेटर, सफाईकर्मी और चपरासी शामिल हैं। ये कर्मी 2 से 4 हजार रुपए के मामूली वेतन पर काम करते हैं।



ग्राम सभा की मुनादी हो या अफसरों का दौरा, ये दिन रात लगे रहते हैं। पिछले कुछ महीनों से सरकार इन कर्मियों को नियमित वेतन देने में असमर्थ है। विभाग ने बड़ी संख्या में कर्मियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। इससे 23 हजार पंचायतों में काम करने वाले एक लाख से ज्यादा अस्थायी कर्मचारी नाराज हैं।



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सड़क पर उतरकर किया प्रदर्शन

पंचायतों से राजधानी में जमा हुए इन कर्मियों ने सोमवार सुबह विकास भवन का घेराव किया। हाथ में तिरंगा और बैनर लेकर पंचायतकर्मी अरेरा हिल्स पहुंचे। उन्होंने एक किलोमीटर लंबी मानव श्रृंखला बनाई और प्रदर्शन किया।



पंचायतकर्मियों का कहना था कि उन्हें मामूली वेतन मिलता है, लेकिन वह भी विभाग नहीं दे पा रहा है। कभी हजार-बारह सौ रुपए मिलते हैं, तो कभी पंद्रह सौ रुपए। पंचायतों में करोड़ों रुपए के काम के लिए बजट है, लेकिन दो-चार हजार रुपए का वेतन देने के लिए राशि नहीं है। कई कर्मचारियों को चार से छह महीने तक वेतन नहीं मिला है।



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तीसरी आंख को किया नजरअंदाज

प्रदर्शन में शामिल पंचायतों के चौकीदारों ने कहा पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान उन्हें सरकार की तीसरी आंख कहते थे। हालांकि उनके समय में भी चौकीदारों की हालत खराब ही रही और उसे सुधारने सरकार ने कोई ध्यान नहीं दिया। अब पिछले कुछ महीनों से सरकार की यही तीसरी आंख परेशान है।



पंचायत का हर छोटा- बड़ा काम कराने के लिए तो अधिकारी उन्हें दौड़ते रहते हैं लेकिन वेतन के नाम पर बजट का रोना रोने लगते हैं। इससे अधिकारियों और सरकार की मंशा और पक्षपात साफ झलक रहा है। यदि ऐसा ही चलता रहा, तो पंचायतों के मामूली कर्मचारी प्रदेश में बड़ा आंदोलन करेंगे।



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सरकार के हाथ में भी कुछ नहीं

पंचायत राज विभाग के संचालक आईएएस छोटे सिंह ने पत्र की मांग की है। उन्होंने कहा सरकार में किसी के हाथ में ऐसा नहीं कि आपको झुंझुना थमा दे और आपको मिल जाएगा। पंचायत राज विभाग डेव्लपमेंट का विभाग है।



आईएएस छोटे सिंह ने कहा कि स्कीम आती है तो पैसा आता है, बंद होती है तो पैसा बंद हो जाता है। उन्होंने कहा कि किसी स्कीम में कर्मचारी लिया गया है, तो स्कीम बंद होने पर बाहर किया जाएगा। कोई भी कर्मचारी नियमित नहीं है।



छोटे सिंह ने पंचायतकर्मियों से कहा कि अगर वे ज्ञापन देना चाहते हैं तो दे सकते हैं। पंचायतकर्मियों का कहना था कि पंचायतें कोई स्कीम नहीं हैं, फिर चौकीदार और दूसरे कर्मचारी कैसे स्कीम के तहत भर्ती हो सकते हैं।



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