सीएम मोहन यादव की बैठक में लगी मुहर, पानी सप्लाई की जिम्मेदारी अब पंचायत-निकायों के पास

Ramanand Tiwari | May 15, 2026, 15:36 IST
PHE Department
मध्य प्रदेश सरकार ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) के ढांचे में बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है। शुक्रवार को सीएम मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रालय में हुई बैठक में PHE रीऑर्गेनाइजेशन पर चर्चा हुई।

News in Short

  • MP में PHE विभाग के ढांचे में बड़ा बदलाव तय।
  • CM मोहन यादव की बैठक में रीऑर्गेनाइजेशन पर चर्चा।
  • गांव और शहरों में पानी सप्लाई जिम्मेदारियों का बंटवारा होगा।
  • सरकार का फोकस कम स्टाफ और प्रभावी संचालन पर।
  • स्थानीय निकायों को ज्यादा अधिकार और निर्णय क्षमता मिलेगी।

News in Detail

मध्यप्रदेश में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) के ढांचे में बड़ा बदलाव तय माना जा रहा है। शुक्रवार को मंत्रालय में सीएम मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में विभाग के रीऑर्गेनाइजेशन पर विस्तार से चर्चा हुई। नई व्यवस्था में गांव और शहरों में पानी सप्लाई और नेटवर्क संचालन की जिम्मेदारियों को अलग-अलग तरीके से बांटने की तैयारी है। सरकार का फोकस अब कम स्टाफ में ज्यादा प्रभावी संचालन और स्थानीय निकायों को ज्यादा अधिकार देने पर है।



करीब तीन दशक बाद PHE विभाग के कामकाज में इतना बड़ा बदलाव होने जा रहा है। इससे पहले वर्ष 1996 में भी सीवर और जल प्रबंधन से जुड़े कई काम नगरीय प्रशासन विभाग को सौंपे गए थे। अब एक बार फिर विभागीय संरचना को नए सिरे से तैयार किया जा रहा है।



इनको मिली जिम्मेदारी

इसके लिए नगरीय प्रशासन के एसीएस संजय दुबे, फाइनेंस के एसीएस मनीष रस्तोगी और पंचायत की एसीएस दीपाली रस्तोगी को जिम्मेदारी दी गई है। ये अधिकारी PHE को रीऑर्गनाइज करने का प्रस्ताव जल्द ही CS को देंगे।



क्या है सरकार का नया प्लान?

सरकार के प्रस्तावित मॉडल के अनुसार अब शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में पानी सप्लाई का संचालन अलग-अलग एजेंसियों के माध्यम से किया जाएगा।



शहरों में कौन करेगा काम?

नगरीय निकाय क्षेत्रों में पानी के वितरण यानी डिस्ट्रीब्यूशन का काम नगर निगम, नगरपालिका और नगर परिषद जैसी स्थानीय संस्थाएं संभालेंगी। हालांकि जहां पानी के स्रोत से लेकर शहर तक पाइपलाइन और नेटवर्क बिछाने का बड़ा काम होगा, वहां जल निगम और PHE की भूमिका बनी रहेगी।



गांवों में कैसे चलेगी व्यवस्था?

ग्रामीण क्षेत्रों में पानी स्रोत से पंचायत तक लाइन और कनेक्टिविटी का काम जल निगम और PHE के जरिए किया जाएगा। इसके बाद गांवों में घर-घर पानी पहुंचाने और स्थानीय संचालन की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों और पंचायती संस्थाओं के पास रहेगी। सरकार का मानना है कि स्थानीय स्तर पर संचालन से जवाबदेही बढ़ेगी और शिकायतों का समाधान तेजी से होगा।



इंजीनियरों की कमी बनी सबसे बड़ी वजह

बैठक में यह मुद्दा भी सामने आया कि PHE विभाग में मैदानी इंजीनियरों की भारी कमी है। विभाग के सिविल और मैकेनिकल दोनों विंग में स्टाफ की कमी लंबे समय से बनी हुई है। इसी कारण अब हर ब्लॉक स्तर पर कम से कम एक इंजीनियर की उपलब्धता सुनिश्चित करने का मॉडल तैयार किया जा रहा है, ताकि मेंटेनेंस और संचालन का काम प्रभावित न हो।



PHE मंत्री के पास क्या रहेगा?

नई व्यवस्था लागू होने के बाद PHE मंत्री संपत्तिया उइके (Sampatiya Uikey ) के पास मुख्य रूप से जल निगम का काम रहेगा। सूत्रों के मुताबिक जल जीवन मिशन के तहत हजारों करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट अभी जल निगम के माध्यम से चल रहे हैं। आने वाले समय में सोलर एनर्जी आधारित जल परियोजनाएं भी जल निगम को सौंपी जा सकती हैं।



30 साल बाद फिर बड़ा बदलाव क्यों?

सरकार का तर्क है कि प्रदेश में 400 से ज्यादा नगरीय निकाय हैं और कई शहरों में पानी के स्रोत तेजी से कम हो रहे हैं।


ऐसे में स्थानीय निकायों को सीधे जिम्मेदारी देकर सिस्टम को ज्यादा व्यावहारिक और जवाबदेह बनाने की कोशिश की जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी पंचायत आधारित मॉडल को मजबूत करने पर जोर है।



जल निगम के अधिकारी ने क्या कहा?

जल निगम के एमडी केबीएस चौधरी कुलसानी ने स्पष्ट किया कि PHE विभाग पूरी तरह खत्म नहीं किया जा रहा है, बल्कि उसका रीऑर्गेनाइजेशन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विभाग में इंजीनियरों और स्टाफ की कमी है। इसी वजह से जिम्मेदारियों का नया वितरण किया जा रहा है, ताकि शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में पानी सप्लाई व्यवस्था बेहतर तरीके से संचालित हो सके।



PHE रीऑर्गेनाइजेशन पर चर्चा

CM मोहन यादव की बैठक में PHE रीऑर्गेनाइजेशन पर चर्चा हुई। शहरों में पानी वितरण का काम नगरीय निकाय संभालेंगे। गांवों में पंचायतों की भूमिका बढ़ेगी। जल निगम बड़े नेटवर्क और परियोजनाओं पर काम करेगा। इंजीनियरों की कमी के चलते नया मॉडल तैयार किया गया। जल जीवन मिशन और सोलर प्रोजेक्ट जल निगम के पास रहेंगे। 1996 के बाद यह PHE ढांचे में सबसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है।



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