सीएम हाउस में तैनात पुलिसकर्मी से साइबर ठगी, एक सैकेंड में साफ 1.80 लाख
समझें क्या है पूरा मामला...
- भोपाल में सीएम हाउस के एक पुलिसकर्मी के साथ साइबर ठगी हुई।
- ठगों ने क्रेडिट कार्ड के रिवॉर्ड पॉइंट रिडीम करने का झांसा दिया।
- व्हाट्सएप पर भेजे गए लिंक से उनका ओटीपी खुद रीड हो गया।
- इस तरह उनके खाते से 1.80 लाख रुपए कट गए।
- पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
कैसे हुई ठगी की शुरुआत
दरअसल भोपाल के श्यामला हिल्स स्थित सीएम हाउस में तैनात प्रधान आरक्षक राजेंद्र सिंह परिहार के साथ साइबर ठगी हुई है। वे फिलहाल एसबीआई में प्रतिनियुक्ति पर हैं। साथ ही बैरागढ़ चिचली की अंशुल विहार कॉलोनी में रहते हैं।
जानकारी के अनुसार 18 जून की शाम ड्यूटी के दौरान उनके मोबाइल पर एक कॉल आया था। कॉल करने वाले ने खुद को एक्सिस बैंक का अधिकारी बताया था।
ठग की बातों में आत्मविश्वास झलक रहा था। ठगों ने आरक्षक को अपनी बातों में इस कदर फंसा लिया कि इससे राजेंद्र सिंह को कॉल असली लगा।
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रिवॉर्ड पॉइंट का झांसा
ठग ने कहा कि उनके क्रेडिट कार्ड में 10 हजार रिवॉर्ड पॉइंट जमा हैं। उसने बताया कि ये पॉइंट दो दिन में एक्सपायर हो जाएंगे। यह सुनकर राजेंद्र सिंह को कोई शक नहीं हुआ। उन्हें लगा कि बैंक की तरफ से ही कॉल आया है।
रिवॉर्ड पॉइंट जल्द खत्म होने की बात ने उन्हें जल्दी फैसला लेने पर मजबूर कर दिया। ठग अक्सर इसी जल्दबाजी का फायदा उठाते हैं। समय का दबाव बनाकर वे सोचने का मौका नहीं देते।
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व्हाट्सएप लिंक से सेंध
ठग ने पहले गूगल पर बैंक की वेबसाइट खोलने को कहा। फिर तकनीकी दिक्कत का बहाना बनाया। इसके बाद उसने व्हाट्सएप पर एक लिंक भेज दिया। राजेंद्र सिंह ने भरोसा करके वह लिंक खोल लिया।
लिंक खुलते ही उनसे मोबाइल नंबर और नाम भरने को कहा गया। उन्होंने सारी जानकारी भर दी। यह लिंक असल में एक फर्जी वेबसाइट थी। ऐसी वेबसाइटें असली बैंक साइट जैसी ही दिखती हैं। आम आदमी के लिए दोनों में फर्क करना मुश्किल होता है।
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ओटीपी से कटे डेढ़ लाख
जानकारी भरते ही उनका ओटीपी खुद ही रीड हो गया। कुछ ही पलों में मोबाइल पर मैसेज आया। मैसेज में एक लाख 80 हजार रुपए कटने की जानकारी थी। यह देखकर राजेंद्र सिंह के पैरों तले जमीन खिसक गई।
राजेंद्र सिंह ने फौरन बैंक के कस्टमर केयर को कॉल किया। उन्होंने अपने सभी कार्ड ब्लॉक करा दिए। हालांकि तब तक रुपए खाते से जा चुके थे।
शिकायत और जांच जारी
इसके बाद राजेंद्र सिंह ने साइबर क्राइम की हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस अब ठगी करने वाले मोबाइल नंबर की जांच कर रही है। पुलिस व्हाट्सएप लिंक और बैंक ट्रांजेक्शन की डिटेल भी खंगाल रही है।
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साइबर ठगी से कैसे बचें
बता दें कि बैंक कभी भी फोन पर ओटीपी नहीं मांगता है। रिवॉर्ड पॉइंट या कैशबैक के नाम पर आने वाले कॉल पर भरोसा न करें। किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें। शक होने पर सीधे बैंक की ऑफिशियल हेल्पलाइन पर कॉल करें।
साथ ही ठगी होने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं। नजदीकी थाने में भी सूचना दें। अपने कार्ड और बैंक खाते की जानकारी किसी से शेयर न करें।
मध्य प्रदेश पुलिस समय-समय पर साइबर अपराध से बचने के तरीके बताती रहती है। फिर भी ठग हर बार नया रास्ता खोज लेते हैं। लोगों को थोड़ी सी सावधानी से ही बड़ा नुकसान बचाया जा सकता है। कोई भी कॉल या लिंक पर भरोसा करने से पहले एक बार जरूर सोचें।
FAQ
- साइबर ठगी होने पर क्या करना चाहिए?
सबसे पहले बैंक के कस्टमर केयर को कॉल करके कार्ड ब्लॉक कराएं। इसके बाद साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं। नजदीकी थाने में भी सूचना दें।