अफसरों की लेट-लतीफी पर सीएम मोहन सख्त: कहा- समय तय, तो फिर देरी क्यों?

Amresh Kushwaha | Jul 04, 2026, 11:50 IST
अफसरों की लेट-लतीफी पर सीएम मोहन यादव सख्त
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अफसरों की लेट-लतीफी पर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने सुबह 10 से शाम 6 बजे तक ड्यूटी का कड़ाई से पालन करने और बायोमेट्रिक अटेंडेंस लागू करने के निर्देश दिए हैं।

राज्य सरकार के कामकाज को और अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बनाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक बड़ा कदम उठाया है। शासकीय कार्यालयों में अधिकारियों और कर्मचारियों की लेट-लतीफी को लेकर मुख्यमंत्री ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है।



शुक्रवार, 03 जुलाई को मंत्रालय में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई थी। इस दौरान उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि जब कार्यालय में उपस्थिति का समय सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक निर्धारित है, तो फिर इसका पालन क्यों नहीं किया जा रहा है?



पहले बड़े अफसर पेश करें मिसाल

मुख्यमंत्री ने बैठक में साफ तौर पर निर्देश दिए कि मंत्रालय, विंध्याचल भवन और सतपुड़ा भवन में अधिकारियों और कर्मचारियों की समय पर उपस्थिति और रवानगी सुनिश्चित करने के लिए बायोमेट्रिक अटेंडेंस की व्यवस्था को अनिवार्य रूप से लागू किया जाए।



उन्होंने कहा कि जो लोग नियमों का उल्लंघन करते हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जरूरत है। सीएम ने नसीहत देते हुए कहा कि समय की पाबंदी के मामले में सबसे पहले वरिष्ठ अधिकारी स्वयं मिसाल पेश करें। इसके बाद ही अधीनस्थ कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित कराएं। इसके साथ ही सरकार की संवैधानिक वैधता को बढ़ावा देने के लिए सभी कार्यों को तय समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।



समीक्षा बैठक में इनपर भी हुई चर्चा

भेल की जमीन वापस लेने के लिए केंद्र से होगा तालमेल

समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने भोपाल स्थित भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड यानी भेल (BHEL) की जमीन का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि भेल की जो जमीन वर्तमान में उपयोग नहीं हो रही है, उसे राज्य सरकार के पास वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की जाए। इसके लिए केंद्रीय भारी उद्योग मंत्रालय के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर आवश्यक कदम उठाए जाएं।



महाकालेश्वर मंदिर में पुजारियों के नए पद और अग्निवीरों को 20% आरक्षण

धार्मिक और युवाओं के रोजगार के मोर्चे पर भी मुख्यमंत्री ने कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। उन्होंने उज्जैन के प्रमुख तीर्थ स्थल महाकालेश्वर मंदिर में पुजारियों के नए पद सृजित करने के निर्देश दिए है। सीएम ने स्पष्ट किया कि इन पुजारियों की व्यवस्था और मानदेय का प्रबंधन मंदिर के बजट से ही किया जाए। इसके अतिरिक्त, देश की सेवा करने वाले अग्निवीरों के हक में बड़ा फैसला लिया है। पुलिस के सशस्त्र बल में आरक्षक पदों पर भर्ती के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण की प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।



मंदाकिनी नदी जोड़ो परियोजना को जल्द मिलेगा अंतिम रूप

धार्मिक नगरी चित्रकूट और पुरातत्व से जुड़े विकास कार्यों को लेकर भी मुख्यमंत्री गंभीर दिखे। उन्होंने कहा कि सती अनुसुइया मंदिर परिसर, मल्टीफैसिलिटी सेंटर और गुप्त गोदावरी मंदिर परिसर के विकास कार्यों को शीघ्र पूरा किया जाए।



मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि बहुप्रतीक्षित मंदाकिनी नदी जोड़ो परियोजना को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार ने अपनी सहमति दे दी है। जल्द ही दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच एक संयुक्त बैठक आयोजित कर इस पूरी परियोजना को अंतिम रूप दे दिया जाएगा।



धार्मिक स्थलों पर बढ़ेंगी जनसुविधाएं

मध्य प्रदेश के प्रमुख धार्मिक और आध्यात्मिक केंद्रों जैसे अमरकंटक, चित्रकूट, ओंकारेश्वर, महेश्वर, दतिया, ओरछा और मैहर के कायाकल्प को लेकर भी बैठक में रूपरेखा तैयार की गई। मुख्यमंत्री ने इन सभी धार्मिक स्थलों पर धर्मशालाओं, अन्न क्षेत्र, प्याऊ और अन्य जनसुविधाओं के निर्माण को तेजी से बढ़ावा देने के निर्देश दिए हैं।



इन जनहितैषी निर्माण कार्यों को गति देने के लिए बिजली शुल्क में छूट देने और अन्य आवश्यक वित्तीय संसाधनों को खोजने के रास्ते तलाशने के लिए भी कहा गया है।



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