ये हैं मोहन की टीम के 9 ताकतवर चेहरे: सत्ता, संगठन और रणनीति की धुरी हैं ये किरदार
13 दिसंबर 2023 को जब डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, तब बहुत कम लोगों को अंदाजा था कि प्रदेश की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हो चुका है। अब 13 जून 2026 को उनकी सरकार ने अपने पांच वर्षीय कार्यकाल का आधा सफर पूरा कर लिया है।
इन ढाई वर्षों में डॉ. मोहन यादव ने अपनी अलग कार्यशैली और संगठन से लेकर सरकार तक मजबूत पकड़ का परिचय दिया है। राजनीति में कोई भी नेतृत्व अकेले नहीं चलता। सत्ता के शिखर पर दिखाई देने वाला चेहरा भले एक हो, पर उसकी सफलता के पीछे कई ऐसे लोग होते हैं, जो रणनीति बनाते हैं, सलाह देते हैं, संगठन और सरकार के बीच पुल का काम करते हैं। साथ ही प्रशासनिक मशीनरी को गति देते हैं और संकट के समय भरोसेमंद सहयोगी बनकर खड़े रहते हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के आसपास भी ऐसे ही कुछ चेहरे हैं, जिन्हें राजनीतिक गलियारों में उनकी टीम के सबसे प्रभावशाली लोगों के रूप में देखा जाता है। कोई वैचारिक मार्गदर्शक है, कोई प्रशासनिक स्तंभ, कोई संगठन का सूत्रधार तो कोई वर्षों पुराना विश्वासपात्र।
द सूत्र की खास खबर में जानिए डॉ. मोहन यादव के उन नौ प्रमुख चेहरों को, जिन्हें राजनीतिक हलकों में उनके नौ रत्न भी कहा जाता है।
1. सुरेश सोनी: राजनीतिक यात्रा के सबसे बड़े मार्गदर्शक
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक सुरेश सोनी को डॉ. मोहन यादव के राजनीतिक जीवन का सबसे प्रभावशाली चेहरा माना जाता है। राजनीतिक विश्लेषकों और संघ से जुड़े जानकारों की राय में दोनों का रिश्ता केवल संगठनात्मक नहीं, बल्कि अभिभावक और शिष्य जैसा है।
मोहन यादव कम उम्र से ही संघ से जुड़े रहे हैं और सक्रिय स्वयंसेवक रहे हैं। संघ के एक पदाधिकारी ने द सूत्र को बताया कि सुरेश सोनी हमेशा मोहन के राजनीतिक विकास पर नजर रखते रहे हैं।
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी लंबे समय से रही है कि वर्ष 2013 में विधानसभा टिकट सुनिश्चित कराने के लिए सुरेश सोनी स्वयं नागपुर और भोपाल तक सक्रिय रहे थे। उसी चुनाव में मोहन यादव पहली बार विधायक बने।
2018 में उन्होंने दोबारा जीत दर्ज की। इसके बाद 2023 में भाजपा की प्रचंड जीत के बाद मुख्यमंत्री पद के लिए उनके नाम की चर्चा को मजबूती देने में भी सुरेश सोनी की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। सोनी को हम मोहन यादव का वैचारिक अभिभावक भी कह सकते हैं।
2. डॉ. श्रीराम तिवारी: संस्कृति और विचार के प्रमुख सलाहकार
मुख्यमंत्री के सांस्कृतिक सलाहकार डॉ. श्रीराम तिवारी उन लोगों में शामिल हैं, जिनकी भूमिका सरकार के वैचारिक और सांस्कृतिक एजेंडे को दिशा देने में सबसे महत्वपूर्ण है। उज्जैन निवासी डॉ. तिवारी वीर भारत न्यास के न्यासी सचिव और महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ के निदेशक हैं।
इतिहास, संस्कृति, धर्म और भारतीय परंपराओं पर उनकी गहरी पकड़ है। विक्रमादित्य काल, उज्जैन की प्राचीन विरासत और मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने के प्रयासों में वे लगातार सक्रिय रहे हैं। मुख्यमंत्री ने स्वयं उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी है।
3. हेमंत खंडेलवाल: सरकार और संगठन के बीच मजबूत कड़ी
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को मुख्यमंत्री के सबसे भरोसेमंद राजनीतिक सहयोगियों में गिना जाता है। बैतूल से विधायक खंडेलवाल को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के पीछे भी डॉ. मोहन यादव की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है।
दिलचस्प बात यह है कि हेमंत खंडेलवाल और डॉ. मोहन यादव दोनों के राजनीतिक मार्गदर्शक सुरेश सोनी ही हैं। यही कारण है कि दोनों के बीच बेहतर तालमेल दिखाई देता है। सरकार और संगठन के बीच समन्वय, दिल्ली में होने वाली बैठकों, राजनीतिक रणनीतियों और संगठनात्मक फैसलों में उनकी भूमिका लगातार बढ़ी है।
4. नीरज मंडलोई: मुख्यमंत्री कार्यालय के सबसे अहम प्रशासनिक स्तंभ
1993 बैच के वरिष्ठ आईएएस नीरज मंडलोई मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) हैं और प्रशासनिक व्यवस्था के सबसे महत्वपूर्ण चेहरों में शामिल हैं। उनका पारिवारिक और प्रशासनिक दोनों ही बैकग्राउंड मजबूत रहा है।
इनके दादा भगवत शरण मंडलोई मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय की कार्यप्रणाली, नीति निर्माण, प्रशासनिक समन्वय और शासन की प्राथमिकताओं को जमीन पर उतारने में उनकी भूमिका केंद्रीय मानी जाती है।
5. राजेश कुशवाहा: बचपन के दोस्त, सबसे भरोसेमंद साथी
राजनीति में कुछ रिश्ते पद और प्रतिष्ठा से ऊपर होते हैं। राजेश कुशवाहा का नाम उन्हीं लोगों में शामिल है। वे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के बचपन के मित्र हैं और व्यक्तिगत स्तर पर बेहद करीबी माने जाते हैं। वे ज्यादा लाइमलाइट में नजर नहीं आते, लेकिन राजनीतिक हलकों में उनकी भूमिका को प्रभावशाली माना जाता है। पर्दे के पीछे रहकर समन्वय और भरोसे के साथ काम करना उनकी पहचान है। अभी वे सम्राट विक्रमादित्य शोध संस्थान में सदस्य हैं। विक्रम यूनिवर्सिटी में सीनेट मेंबर और संभागीय क्रिकेट एसोसिएशन में उपाध्यक्ष हैं।
6. अशोक कड़ेल: संघ और सरकार के बीच संवाद का महत्वपूर्ण सूत्र
वरिष्ठ शिक्षाविद् अशोक कड़ेल लंबे समय से डॉ. मोहन यादव के संपर्क में हैं। मध्य प्रदेश हिंदी ग्रंथ अकादमी के पूर्व निदेशक और संचालक रहे कड़ेल उज्जैन से जुड़े हैं। जब डॉ. मोहन यादव उच्च शिक्षा मंत्री थे, तभी से दोनों के बीच निकट संबंध रहे हैं।
संघ से जुड़े विषयों और समन्वय के मामलों में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। वे उन लोगों में हैं, जो संगठन और सरकार के बीच संवाद को सहज बनाए रखने में योगदान देते हैं।
7. डॉ. निशांत खरे: राजनीतिक रणनीति के युवा चेहरे
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्ठभूमि से आने वाले डॉ. निशांत खरे वर्तमान में भाजपा मध्य प्रदेश के उपाध्यक्ष हैं। वे पहले युवा आयोग के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। संगठनात्मक रणनीति, राजनीतिक प्रबंधन और चुनावी गणित पर उनकी पकड़ मानी जाती है।
इंदौर से आने वाले निशांत खरे की भूमिका इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि मुख्यमंत्री स्वयं इंदौर जिले के प्रभारी हैं। पार्टी और सरकार के बीच सलाहकार की भूमिका में उन्हें सक्रिय माना जाता है। खरे राजनीतिक प्रबंधन में यादव के लिए एक भरोसेमंद और काबिल साथी के तौर पर देखे जा रहे हैं।
8. भगवती लाल राजपुरोहित: इतिहास, संस्कृति और परंपरा के संरक्षक
उज्जैन के प्रख्यात इतिहासकार, पुरातत्वविद् और संस्कृत विद्वान भगवती लाल राजपुरोहित मुख्यमंत्री के सबसे सम्मानित सलाहकारों में गिने जाते हैं। वे विक्रमादित्य शोधपीठ के पूर्व अध्यक्ष और निदेशक रह चुके हैं तथा पद्मश्री सम्मान से सम्मानित हैं।
विक्रम संवत, विक्रमादित्य काल और मालवा की ऐतिहासिक-सांस्कृतिक परंपराओं पर उनका गहरा शोध रहा है। मुख्यमंत्री सार्वजनिक कार्यक्रमों में उनके प्रति विशेष सम्मान प्रदर्शित करते रहे हैं। सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विषयों पर उनकी राय को महत्वपूर्ण माना जाता है।
9. शैलेन्द्र बरुआ: संगठन की नब्ज समझने वाले नेता
भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष शैलेन्द्र बरुआ लंबे समय से संगठन की राजनीति में सक्रिय हैं। वे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल दोनों के करीबी माने जाते हैं। पूर्व में संभागीय संगठन मंत्री रह चुके बरुआ संगठन की कार्यप्रणाली और जमीनी संरचना को गहराई से समझते हैं।
सरकार और संगठन के बीच समन्वय, पार्टी विस्तार, बैठकों और राजनीतिक कार्यक्रमों में उनकी सक्रिय भूमिका रहती है। यही वजह है कि उन्हें मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष की टीम का महत्वपूर्ण सदस्य माना जाता है।
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