एमपी में फाइव डे वर्किंग पर संकट, सीएम मोहन यादव ने बता दी ऑफिस पहुंचने की टाइमिंग
5 पॉइंट में समझें खबर के मायने...
- मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने फाइव डे वर्किंग को लेकर सख्त रुख अपनाया है।
- सीएम ने कहा कि समय पर काम न होने पर फाइव डे वर्किंग बंद हो सकता है।
- सरकारी दफ्तरों का समय सुबह 10 से शाम 6 बजे तक रहेगा।
- हाजिरी के लिए बायोमेट्रिक तकनीक का इस्तेमाल अनिवार्य होगा।
- 12 जनवरी से 31 मार्च तक संकल्प से समाधान अभियान चलेगा।
फाइव डे वर्किंग पर क्या बोले सीएम?
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने बुधवार को अहम बैठक में कहा कि कोविड काल से फाइव डे वर्किंग लागू है। कर्मचारी चाहते हैं कि यह आगे भी जारी रहे। इसके लिए उन्हें बढ़े हुए काम के वक्त का पालन करना होगा। अनुशासन न होने पर सरकार इसे बंद करने पर विचार करेगी। यह बैठक संकल्प से समाधान अभियान को लेकर हुई थी। इसमें मुख्य सचिव अनुराग जैन और डीजीपी कैलाश मकवाना भी मौजूद थे।
दफ्तरों में बायोमेट्रिक हाजिरी अनिवार्य
सीएम ने कहा कि सरकारी दफ्तर सुबह 10 बजे खुल जाने चाहिए। काम शाम 6 बजे तक चलना चाहिए। इसके लिए बायोमेट्रिक हाजिरी और तकनीक का उपयोग होगा। जनता के काम अनुशासन के साथ किए जाने चाहिए।
संकल्प से समाधान अभियान
प्रदेश में 12 जनवरी से नया अभियान शुरू होगा। स्वामी विवेकानंद की जयंती पर संकल्प से समाधान शुरू होगा। यह अभियान 106 सरकारी योजनाओं पर केंद्रित होगा। इसका मुख्य उद्देश्य सरकारी पेंडेंसी को पूरी तरह खत्म करना है। सरकार के 2 साल पूरे होने पर यह पहल हो रही है।
चार चरणों में चलेगा समाधान शिविर
यह अभियान 31 मार्च 2026 तक चलेगा। पहले चरण में 12 जनवरी से घर-घर जाकर आवेदन लेंगे। दूसरे चरण में 16 फरवरी से क्लस्टर स्तर पर शिविर लगेंगे। तीसरे चरण में ब्लॉक स्तर पर शिकायतों का निपटारा होगा। अंतिम चरण में 26 मार्च से जिला स्तर पर शिविर लगेंगे।
आगामी 5 वर्षों की कार्य योजना
सीएम ने सभी विभाग प्रमुखों से रिपोर्ट मांगी है। उन्हें अगले 5 साल की कार्य योजना तैयार करनी होगी। सरकार अगले 3 साल के बजट की व्यवस्था कर रही है। सड़क, अस्पताल और सिंचाई परियोजनाओं की समेकित योजनाएं बनेंगी। इन सभी का दस्तावेजीकरण करना अनिवार्य होगा।
निष्कर्ष- इस खबर का निष्कर्ष यह है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शासन व्यवस्था में अनुशासन और जवाबदेही को सर्वोपरि रखा है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि सरकारी कर्मचारियों को 'फाइव डे वर्किंग' की सुविधा तभी मिलेगी, जब वे निर्धारित समय (10 से 6 बजे) का पालन करेंगे और बायोमेट्रिक हाजिरी के जरिए अपनी सक्रियता साबित करेंगे।
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