बड़े पापा CMHO हैं, काम 100% होगा... चाय की दुकान से चलता रहा फर्जीवाड़े का खेल
समझें क्या है पूरा मामला...
- सीएमएचओ डॉ. जीएस चौहान का नाम लेकर भतीजे ने लोगों से पैसे लिए।
- जयदीप खुद को सीएमएचओ का भतीजा बताता था।
- उसने नौकरी लगवाने के नाम पर लाखों रुपए वसूले हैं।
- पैसे लेने के बाद ना नौकरी दी, ना पैसे लौटाए।
- कलेक्टर की जांच समिति में यह मामला उजागर हुआ है।
सीएमएचओ के नाम पर वसूली
सीएमएचओ (Chief Medical and Health Officer) डॉ. जीएस चौहान को अब सस्पेंड किया जा चुका है। उन्हीं के नाम पर उनके कथित भतीजे जयदीप ने बड़ा खेल खेला। जयदीप खुद को सीएमएचओ का भतीजा बताता था। वह लोगों से कहता था कि उसके बड़े पापा सीएमएचओ हैं। इसी दावे के दम पर वह नौकरी पक्की होने की गारंटी देता था।
सीएमएचओ बंगला, अस्पताल का स्टोर रूम और जिला अस्पताल के पीछे की चाय दुकान, इन तीन जगहों पर ही अधिकतर सौदे हुए। यहीं पर लोगों से लाखों रुपए लिए गए। इसके बदले ट्रांसफर, अटैचमेंट और नियुक्तियों में गड़बड़ी की गई। कुछ मामलों में गलत तरीके से वेतन भी निकाला गया। कुछ जगह फर्जी अटेंडेंस तक लगवाई गई।
कैसे हुआ खुलासा
यह पूरा मामला मंदसौर की तत्कालीन कलेक्टर (आईएएस अदिति गर्ग) द्वारा बनाई गई जांच समिति के सामने खुला है। समिति के सामने कई पीड़ितों ने अपने बयान दर्ज कराए। अंगारी गांव के बबलूसिंह, बनी गांव के वीरेंद्रसिंह और हनुमंतिया गांव के गोवर्धनलाल ने शिकायत दर्ज कराई। तीनों ने बताया कि नौकरी के नाम पर उनसे मोटी रकम ली गई। हैरानी की बात यह रही कि कर्मचारियों की वेरिफिकेशन प्रक्रिया दफ्तर में नहीं होती थी।
यह प्रक्रिया दलालों के घर पर की जाती थी। इससे साफ लगता है कि यह पूरा नेटवर्क बड़े स्तर पर काम कर रहा था। समिति में डिप्टी कलेक्टर अनिता चौकोटिया, अतिरिक्त जिला पंचायत सीईओ आरपी सिंह पंवार, कोषालय अधिकारी सुनील डावर, जिला पंचायत लेखाधिकारी सुरेशचंद्र भारती और ई-गवर्नेस सोसायटी प्रबंधक वैभव बैरागी शामिल रहे।
केस 1: बेटे की नौकरी नहीं लगी
सीतामऊ तहसील के अंगारी गांव में रहने वाले बबलूसिंह का मामला सबसे पहले सामने आया। उन्होंने बताया कि बेटे शिवराजसिंह की नौकरी लगवाने के लिए जयदीप को 70 हजार रुपए दिए। जयदीप ने भरोसा दिलाया कि सीएमएचओ उसके बड़े पापा हैं। मौके पर एक शपथ पत्र भी लिखवाया गया था। इसमें लिखा था कि नौकरी के बदले कोई रकम नहीं ली गई। बबलूसिंह के अनुसार पैसे देने के बावजूद बेटे को नौकरी नहीं मिली।
केस 2: 11 लोगों से 7.70 लाख वसूले
ग्राम बनी के वीरेंद्रसिंह का मामला इससे भी बड़ा है। उन्होंने बताया कि जयदीप ने सिक्योरिटी सर्विस में नौकरी लगवाने की गारंटी दी। इसके लिए 11 लोगों के नाम पर कुल सात लाख 70 हजार रुपए लिए गए थे। एक परिचित के घर पर सभी की वेरिफिकेशन भी करवाई गई। बाद में जयदीप ने रकम न लेने का शपथ पत्र मांगना शुरू किया। इसी बात से वीरेंद्रसिंह को शक हुआ। आखिर में ना रकम वापस मिली, ना शपथ पत्र मिला और ना ही किसी को नौकरी दी गई।
केस 3: 9.10 लाख की तीन किस्त
हनुमंतिया गांव के गोवर्धनलाल चंद्रवंशी का मामला सबसे विस्तृत है। उन्होंने बताया कि नौकरी के लिए पहले सीएमएचओ डॉ. चौहान से संपर्क किया। सीएमएचओ ने उन्हें भतीजे जयदीप का नंबर देकर आगे बात करने को कहा। जयदीप ने प्रति व्यक्ति 70 हजार रुपए मांगे। उसने सिर्फ दो दिन में पूरी रकम देने की शर्त रखी। गोवर्धनलाल ने बताया कि उन्होंने सीएमएचओ बंगले पर तीन लाख 50 हजार रुपए नगद दिए।
इसके बाद अस्पताल के पीछे गुर्जर टी स्टॉल पर तीन लाख रुपए और दिए गए। तीसरी बार अस्पताल के स्टोर रूम में दो लाख 60 हजार रुपए दिए गए। इस तरह कुल मिलाकर नौ लाख 10 हजार रुपए की वसूली हुई। जयदीप ने कुछ लोगों को काम पर तो रखवाया, लेकिन उन्हें वेतन नहीं मिला। शिकायत करने पर जयदीप ने कॉल तक अटेंड करना बंद कर दिया।
सीएमएचओ का जवाब
इस पूरे विवाद पर सीएमएचओ डॉ. चौहान ने जांच समिति के सामने अलग ही बयान दिया। उन्होंने कहा कि जयदीप उनका भतीजा नहीं, बल्कि उनका ड्राइवर है। यह बयान पीड़ितों के दावों से बिल्कुल उलट है। पीड़ितों ने बार-बार कहा कि जयदीप खुद को सीएमएचओ का भतीजा बताता रहा। सीएमएचओ के इस बयान ने मामले को और उलझा दिया है। जांच समिति अब दोनों पक्षों के बयानों का मिलान कर रही है।
अब आगे क्या होगा
सीएमएचओ डॉ. जीएस चौहान को इस मामले में पहले ही सस्पेंड किया जा चुका है। अब कमिश्नर स्तर पर दोषियों की पहचान के लिए जांच जारी है। जिन कर्मचारियों की गलत नियुक्ति हुई, उनकी सूची भी खंगाली जा रही है। फर्जी अटेंडेंस और गलत वेतन आहरण के मामलों की भी अलग से जांच हो सकती है। पीड़ितों को उम्मीद है कि उन्हें इंसाफ मिलेगा और उनकी रकम वापस होगी। प्रशासन ने साफ किया है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
यह खबर क्यों जरूरी है
यह खबर आम लोगों के भरोसे और सरकारी सिस्टम की पारदर्शिता से जुड़ी है। सरकारी अफसर के नाम पर नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी होना गंभीर मामला है। इससे गरीब और जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक नुकसान होता है। यह मामला भ्रष्टाचार, फर्जी नियुक्ति और सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग को उजागर करता है।
ऐसी खबरें प्रशासन को जवाबदेह बनाती हैं और पीड़ितों की आवाज तक पहुंचाती हैं। साथ ही यह समाज को सतर्क करती है कि नौकरी के नाम पर होने वाली ठगी से बचें। पारदर्शी जांच और सख्त कार्रवाई से भविष्य में ऐसी घटनाएं रुक सकती हैं।
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