कांग्रेस संगठन की इस पहल से संगठन मजबूत होगा या गुटबाजी फिर बनेगी ब्रेक?

Ramanand Tiwari | Mar 21, 2026, 22:28 IST
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BHOPAL: कांग्रेस मध्यप्रदेश में अपने संगठन को मजबूत करने की योजना बना रही है। अप्रैल से जिलों में नियमित बैठकें, ट्रेनिंग और मॉनिटरिंग शुरू होगी। यह कदम गुटबाजी रोकने और भाजपा से सीखने के लिए है।

मध्यप्रदेश कांग्रेस अब अपने संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए नया प्लान लेकर आ रही है। प्रदेश संगठन की पहल पर अप्रैल से जिलों में नियमित बैठकें, ट्रेनिंग और सख्त मॉनिटरिंग शुरू होगी। मकसद है नरसिंहपुर जैसी गुटबाजी की घटनाओं पर रोक और भाजपा की तर्ज पर सिस्टमैटिक कामकाज। बड़ा सवाल यह है कि क्या यह पहल जमीन पर असर दिखाएगी या पुरानी खींचतान इसे कमजोर कर देगी?



क्या है नया संगठनात्मक प्लान

अप्रैल की शुरुआत से कांग्रेस हर जिले में संगठनात्मक बैठकों का सिलसिला शुरू करेगी। अब जिला, ब्लॉक और मंडल स्तर पर नियमित मीटिंग्स अनिवार्य होंगी। हर 3 महीने में बैठक, उसकी मिनट्स और रिपोर्टिंग प्रदेश स्तर तक भेजना जरूरी किया जाएगा। पदाधिकारियों को ट्रेनिंग दी जाएगी कि संगठन धरना-प्रदर्शन से नहीं चलता। संगठन प्लानिंग, संवाद और फॉलोअप से चलता है।



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अब तक कैसे चल रहा था संगठन

अब तक कांग्रेस का संगठन ज्यादातर इवेंट-बेस्ड नजर आता रहा। नेता आते थे, भाषण होता था, कार्यकर्ता जुटते थे और फिर कार्यक्रम खत्म। सूत्रों के अनुसार, कई पदाधिकारी संगठनात्मक प्रक्रिया को गंभीरता से नहीं लेते थे। नियमित बैठक, रिपोर्टिंग और रणनीतिक फॉलोअप में कमी रही। यही कारण था कि जमीनी समन्वय कमजोर दिखा।



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नरसिंहपुर घटना ने क्यों बढ़ाई चिंता

हाल ही में नरसिंहपुर में बड़े नेता की मौजूदगी में ही दो गुट आमने-सामने आ गए। इस घटना ने पार्टी के अंदरूनी तालमेल पर सवाल खड़े कर दिए। अब संगठन की कोशिश है कि ऐसी घटनाएं सड़कों पर न दिखें और अंदर ही समन्वय बैठा लिया जाए।



क्या कहा कांग्रेस के प्रदेश संगठन प्रभारी ने ?

संगठन प्रभारी संजय कामले के मुताबिक, अप्रैल से जिलों में कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को ट्रेनिंग दी जाएगी। उन्हें पार्टी की नीति, रीति और बैठक की प्रक्रिया समझाई जाएगी। साथ ही, संगठन को सिस्टमैटिक तरीके से चलाने की प्रक्रिया भी बताई जाएगी। हर स्तर पर काम की मॉनिटरिंग होगी, और सक्रियता का आकलन किया जाएगा।



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भाजपा मॉडल से क्या सीख रही कांग्रेस

कांग्रेस अब भाजपा के संगठनात्मक ढांचे से सीख लेकर काम करना चाहती है। भाजपा में नियमित बैठकें, स्पष्ट जिम्मेदारी और फीडबैक सिस्टम मजबूत माना जाता है। कांग्रेस भी इसी तर्ज पर अपने संगठन को एक्टिव और जवाबदेह बनाने की कोशिश में है।



क्या गुटबाजी पर लगेगी लगाम?

योजना जितनी मजबूत दिख रही है, उतनी ही बड़ी चुनौती गुटबाजी है। पार्टी में हर नेता हर पहल को स्वीकार नहीं करता। अगर अंदरूनी खींचतान जारी रही, तो नई व्यवस्था कागजों तक सीमित रह सकती है। लेकिन अगर समन्वय बन गया, तो यह पहल संगठन के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हो सकती है।



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आगे क्या देखना होगा

अप्रैल से शुरू होने वाली बैठकें नियमित रूप से हो पाती हैं या नहीं, यह बड़ा सवाल है। क्या पदाधिकारी नई कार्यशैली को अपनाते हैं? क्या नरसिंहपुर जैसी घटनाओं पर रोक लगती है? सबसे अहम यह है कि संगठन में एकजुटता बढ़ती है या गुटबाजी हावी रहती है। कांग्रेस का ‘रीसेट प्लान’ कागज पर मजबूत और संतुलित नजर आता है। इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि नेता और कार्यकर्ता इसे कितनी गंभीरता से अपनाते हैं। अगर संगठनात्मक अनुशासन लागू हुआ, तो फायदा मिल सकता है। वरना यह पहल आपसी खींचतान में उलझकर रह सकती है।





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