कॉलेज छोड़ साइबर ठगों से मिलाया हाथ, इंदौर के डेवलपर ने 2800 फर्जी ऐप बेच कराई करोड़ों की ठगी
कैसे सामने आया ठगी का यह खेल?
बता दें कि पंकज पेशे से एक सॉफ्टवेयर डेवलपर है, लेकिन उसने अपनी समझ का इस्तेमाल गलत रास्ते पर किया। वह इंजीनियरिंग कॉलेज के दूसरे साल में ही पढ़ाई छोड़ चुका था। शुरुआत में उसने गेमिंग ऐप बनाना सीखा था। इसी दौरान उसने एपीके फाइलें तैयार करने की तरकीब समझी। इसके बाद धीरे-धीरे साइबर ठगों के नेटवर्क से जुड़ गया।
पुलिस की जांच में यह बात सामने आई है कि पंकज पिछले 3 साल से साइबर अपराधियों (Cyber Crime) को ऐसे खतरनाक ऐप बेच रहा था। उसने अब तक दो हजार 805 एपीके फाइलें ठगों को दीं। इन्हीं फाइलों के जरिए ठगों ने देशभर में 9 हजार 673 लोगों को अपने जाल में फंसाया।
इन लोगों से अब तक 15 करोड़ 75 लाख रुपए की ठगी का हिसाब मिल चुका है। दूसरी ओर जांच अधिकारियों का मानना है कि असल आंकड़ा इससे कई गुना ज्यादा जा सकता है।
किन नामों से आपके पास आ रही ये फाइलें?
साइबर ठग लोगों को डराने या लालच देने के लिए जरूरी सरकारी और वित्तीय सेवाओं का सहारा लेते हैं। पंकज ने इन्हीं कामों के नाम पर फर्जी फाइलें बनाई थीं।
- पेंशन कार्ड वेरिफिकेशन : बुजुर्गों को पेंशन बंद होने का डर दिखाकर फाइल भेजी जाती है।
- सीनियर सिटीजन कार्ड : वरिष्ठ नागरिकों को सरकारी छूट या पहचान पत्र के नाम पर फंसाया जाता है।
- आरटीओ चालान : गाड़ी का चालान कटने का फर्जी मैसेज भेजकर जुर्माना भरने के नाम पर ऐप डलवाया जाता है।
- क्रेडिट कार्ड वेरिफिकेशन और अपडेट : बैंक कार्ड बंद होने या रिवॉर्ड पॉइंट का झांसा देकर फाइल इंस्टॉल कराई जाती है।
जैसे ही कोई व्यक्ति इन फाइलों को अपने फोन में डालता है ठगों को फोन का पूरा कंट्रोल मिल जाता है। वे फोन में आने वाले जरूरी मैसेज, पर्सनल डेटा और बैंक का ओटीपी आसानी से चुरा लेते हैं।
फर्जी फाइलों से सुरक्षित कैसे रहें?
थोड़ी सी सावधानी आपको इस बड़े नुकसान से बचा सकती है। फोन का इस्तेमाल करते वक्त इन बातों का खास ध्यान रखें।
- फाइल का नाम जरूर जांचें: अगर व्हाट्सएप या टेक्स्ट मैसेज पर आई किसी फाइल के नाम के आखिर में .apk लिखा दिखाई दे, तो उसे बिल्कुल भी इंस्टॉल न करें।
- मैसेज पर भरोसा न करें: बैंक, बिजली विभाग, केवाईसी, ट्रैफिक चालान, पेंशन या किसी सरकारी योजना के नाम से आए अनजान लिंक या फाइल को तुरंत डिलीट कर दें।
- ऑफिशियल प्लेटफॉर्म ही चुनें: कोई भी जरूरी ऐप हमेशा Google Play Store या संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ही डाउनलोड करें।
- फोन की सुरक्षा सेटिंग: अपने फोन की सेटिंग्स में जाकर अननोन सोर्स से ऐप इंस्टॉल वाले ऑप्शन को हमेशा बंद रखें।
ठगी होने पर सबसे पहले क्या करें?
कभी धोखे से ऐसा ऐप इंस्टॉल हो जाए या खाते से पैसे कट जाएं, तो घबराने की जगह तुरंत ये कदम उठाएं...
- इंटरनेट तुरंत बंद करें: सबसे पहले अपने फोन का मोबाइल डेटा और वाई-फाई बंद कर दें। इसके अलावा फोन को Flight Mode पर डाल दें।
- बैंक को तुरंत सूचना दें: अपने बैंक के हेल्पलाइन नंबर पर तुरंत कॉल करें। अपने एटीएम कार्ड, क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग और यूपीआई को तुरंत ब्लॉक करवाएं।
- हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें: भारत सरकार के साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर तुरंत कॉल करके अपनी शिकायत दर्ज कराएं।
- ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें: राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल cybercrime.gov.in पर जाकर पूरी घटना का ब्योरा, मैसेज के स्क्रीनशॉट और बैंक ट्रांजैक्शन की रसीद के साथ शिकायत दर्ज कराएं।
- नजदीकी थाने जाएं: अपने नजदीकी साइबर सेल या पुलिस थाने में जाकर लिखित शिकायत दें।
FAQ
- साइबर ठगी होने पर सबसे पहले कहां शिकायत करें?
तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें, अपने बैंक को फोन करके खाते और कार्ड ब्लॉक करवाएं, और cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। - एपीके फाइल क्या होती है?
यह एंड्रॉइड फोन में ऐप इंस्टॉल करने वाली फाइल होती है। अनजान जगह से आई एपीके फाइल में वायरस हो सकता है, जो फोन का डाटा और ओटीपी चुरा लेता है। - फर्जी एपीके फाइल को कैसे पहचानें?
अगर व्हाट्सएप या मैसेज पर आई फाइल के नाम के आखिर में .apk लिखा हो, तो समझ जाएं कि यह खतरनाक हो सकती है। इसे कभी इंस्टॉल न करें।