डेली कॉलेज बोर्ड के नीतिगत फैसले लेने पर हाईकोर्ट से रोक, विक्रम और प्रियव्रत की जीत खतरे में आई
Indore. डेली कॉलेज के नवनिर्मित 10 सदस्यीय बोर्ड को बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने इस मामले में लगी याचिका पर सुनवाई के बाद पाया कि चुनावी प्रक्रिया में कई खामियां रहीं। इसे देखते हुए हाईकोर्ट इंदौर ने पूरे बोर्ड के नीतिगत फैसले लेने पर रोक लगा दी है।
डेली कॉलेज के 21 मई को समाप्त हुए चुनाव के बाद फिर कानूनी लड़ाई 26 मई को हाईकोर्ट पहुंची। इस पर 29 मई को विशेष सुनवाई हुई। सभी तर्क सुनने के बाद हाईकोर्ट ने चुनाव प्रक्रिया में कई खामियां पाई, जिसे लेकर विरोधी गुट लगातार आरोप लगा रहा था। सभी तर्क सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि चुनाव 21 मई को हो चुके हैं, ऐसे में वह चुनाव नहीं रोक रहे हैं, लेकिन नवनिर्मित बोर्ड नीतिगत फैसला नहीं लेगा। हालांकि वह रूटीन काम करते रहेगा। इसमें 15 दिन में कुछ रिपोर्ट भी हाईकोर्ट ने तलब की है। फिर सुनवाई होगी।
हाईकोर्ट ने यह दिए अहम आदेश
हाईकोर्ट जस्टिस जय कुमार पिल्लई ने करीब 40 मिनट तक इस केस की सुनवाई की। यह याचिका नरेंद्र सिंह बिडवाल की ओर से लगाई गई थी। यह फाउंडर/ओल्ड डोनर कैटेगरी में उम्मीदवार थे, लेकिन इनका फार्म तकनीकी खामियां बताते हुए चुनाव मुख्य चुनाव अधिकारी (हाईकोर्ट के रिटायर जस्टिस सुशील गुप्ता) द्वारा रद्द कर दिया गया था। लेकिन हाईकोर्ट ने चुनाव अधिकारी द्वारा 3 मई को दिए गए इस आदेश को रद्द कर दिया है।
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प्रियव्रत और विक्रम पंवार उलझे
महत्वपूर्ण यह है कि इस आदेश के तहत ही फाउंडर कैटेगरी में बिड़वाल के साथ ही ठाकुर अनिरूद्ध दोतरिया के फार्म खामियां बताते हुए रिजेक्ट कर दिए गए। इसके चलते इस कैटेगरी में प्रियव्रत खिलचीपुर और विक्रम पंवार निर्विरोध विजेता हो गए। लेकिन जब 3 मई के आदेश को ही स्टे कर दिया है तो फिर यह टूबी वन कैटेगरी के दोनों चुने गए उम्मीदवार की जीत खतरे में पड़ गई है। यानी आगे जाकर इनका निर्वाचन शून्य हो सकता है।
यह थी मुख्य आपत्ति, गाइडलाइन बाद में आई
आपत्तिकर्ता द्वारा तर्क दिए गए थे कि चुनावी प्रक्रिया 21 अप्रैल से शुरू हो गई थी। इसमें नामांकन लेने के बाद फिर बाद में नामांकन व चुनाव की पूरी प्रक्रिया की गाइडलाइन जारी की गई। इसे हाईकोर्ट ने मान्य किया। हाईकोर्ट ने चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के बाद किसी भी दिशा-निर्देश को तैयार करने या संविधान में संशोधन को लागू करने की अनुमति देने की शक्तियों पर भी प्रश्न उठाया है। इसलिए तीन मई को नामांकन खारिज करने के आदेश को स्टे कर दिया गया है।
रजिस्ट्रार और पुलिस से मांगी रिपोर्ट
हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा इस संबंध में फर्म एंड सोसायटी रजिस्ट्रार को शिकायत की थी। ऐसे में वह इसकी विस्तृत जांच करें और आरोपों की लेकर सभी पक्ष सुने जाएं। साथ ही साक्ष्य व दस्तावेज के साथ 15 दिन में रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश करें। साथ ही यह भी कहा कि याचिकाकर्ता ने पुलिस को भी शिकायत की थी, इसलिए एसपी सायबर सेल भी 15 दिन के भीतर सीलबंद लिफाफे में अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश करें।
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पुलिस से इसलिए मांगी रिपोर्ट
दरअसल बिड़वाल ने अपने नामांकन फार्म खारिज होने पर पुलिस मे भी धोखाधड़ी संबंधी शिकायत की थी। उन्होंने कहा कि फार्म व दस्तावेज में छेड़छाड़ की गई है। हालांकि पुलिस ने इसकी जांच नहीं की। अब हाईकोर्ट ने इसमें रिपोर्ट तलब की है।
चुनाव के बाद बोर्ड में ये हैं 10 सदस्य
- टूबी वन यानी फाउंडर मेंबर कैटेगरी- विक्रम सिंह पंवार और प्रियव्रत खिलचीपुर
- टू बी टू यानी न्यू डोनर कैटेगरी- हरपाल सिंह उर्फ मोनू भाटिया
- ओडीए से चयनित- ओडीए के उपाध्यक्ष नवनीत बागड़ी, व नीलेश अग्रवाल
- पूर्व छात्र कैटेगरी से- निपुण अग्रवाल
- पेरेंट्स कैटेगरी से- करण नारसरिया व संजय पाहवा
- शासन से- हाईकोर्ट के रिटायर जस्टिस सुभाष काकड़े व इंदौर एएजी राहुल सेठी