डेली कॉलेज केस सुप्रीम कोर्ट में, एक पक्ष ने बताया जीत, दूसरे ने कहा भ्रामक प्रचार, आखिर हुआ क्या?
समझें क्या है पूरा मामला...
- डेली कॉलेज के चुनाव और संविधान संशोधन को लेकर विवाद हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
- पूर्व छात्र विक्रम खंडेलवाल ने हाईकोर्ट में याचिका खारिज होने के बाद सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।
- सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान याचिका वापस ले ली गई।
- डेली कॉलेज प्रबंधन ने इसे कानूनी मजबूती और अपनी जीत बताया है।
- विरोधी पक्ष ने कहा कि मामला हाईकोर्ट में अब भी लंबित है।
डेली कॉलेज में चुनाव के पहले हाईकोर्ट में कई याचिकाएं लगीं, जिनमें पूर्व छात्र विक्रम खंडेलवाल की भी याचिका थी। याचिका खारिज होने के बाद वह सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। जस्टिस नरसिम्हा और जस्टिस अरविंद कुमार की बेंच में सुनवाई हुई।
इसमें बाद में याचिका वापस ले ली गई, क्योंकि हाईकोर्ट बेंच ने पहले ही नरेंद्र सिंह बिड़वाल की याचिका पर इसमें जांच रिपोर्ट तलब की है। साथ ही बोर्ड के नीतिगत फैसलों पर रोक लगाई हुई है।
डेली कॉलेज प्रबंधन क्या बोला
इस मामले में डेली कॉलेज प्रबंधन ने प्रेस नोट जारी किया है। इसमें कहा कि डेली कॉलेज को सुप्रीम कोर्ट से अहम कानूनी मजबूती मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि डेली कॉलेज में अध्ययन कर चुके एल्युमनाई (ओल्ड डेलियंस) की संस्था को प्रशासनिक संचालन में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप या संचालनात्मक अधिकार प्राप्त नहीं है। इसके बाद याचिकाकर्ता ने पिटीशन वापस ले ली।
कानूनविदों के अनुसार यह टिप्पणी काफी अहम है, क्योंकि लंबे समय से डेली कॉलेज बोर्ड की वैधानिकता पर सवाल उठाए जा रहे थे। इससे साफ होता है कि डेली कॉलेज के विरुद्ध खड़ा किया गया नैरेटिव कमजोर हो गया है। इससे संस्था की 155 साल पुरानी गरिमा संरक्षित होती है। संस्था की छवि को लगातार गलत तरह से प्रभावित किया जा रहा है।
विरोधी पक्ष द्वारा ये तर्क दिए गए
वहीं इन दावों पर पूर्व छात्रों ने अपने स्तर पर सूचना जारी की। उन्होंने कहा कि यह भ्रामक प्रचार है। कानूनी कार्रवाई को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस केस को समर वेकेशन के बाद सुनने की बात कही थी। इस पर याचिकाकर्ता ने याचिका वापस ले ली, क्योंकि हाईकोर्ट में केस की तारीख लगी है। याचिका वापस लेना किसी की हार या जीत नहीं होता है। हाईकोर्ट का अंतरिम आदेश कि बोर्ड नीतिगत फैसला नहीं करेगा, वह अभी भी लागू है। किसी एक कार्रवाई को बढ़ा-चढ़ाकर पेश नहीं किया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट में आखिर हुआ क्या था?
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में केस लगा और बेंच ने सुनवाई शुरू की। इस पर बेंच ने याचिकाकर्ता के अधिवक्ता से पूछा कि किसी एल्युमनाई एसोसिएशन को इसमें दखल देने का क्या अधिकार है? इस पर डेली कॉलेज के अधिवक्ता ने कहा कि कॉलेज सोसायटी में प्रावधान है कि एल्युमनाई की ओर से दो सदस्य बोर्ड में प्रतिनिधित्व करते हैं।
इस पर बेंच ने कहा कि मैनेजमेंट के संबंध में एल्युमनाई एसोसिएशन के पास क्या अधिकार है? क्या आपने पैसे का योगदान दिया है या कॉलेज की स्थापना की है? इससे हटकर असल अधिकार क्या है, पहले इसका जवाब दीजिए।
इस पर अधिवक्ता ने कहा कि हमारा अधिकार वोट देना और दो प्रतिनिधियों को चुनना है, जो बोर्ड में प्रतिनिधित्व देंगे। इस पर बेंच ने कहा कि यह तो बस एक एसोसिएशन है, जो हर कॉलेज संस्था का होता है। इससे क्या आप कहेंगे कि आप मैनेजमेंट का हिस्सा हैं?
फिर बेंच ने कहा कि समर वेकेशन के बाद सुनेंगे। इस पर अधिवक्ता ने कहा कि हम याचिका वापस लेना चाहते हैं। हाईकोर्ट में केस चल रहा है और हम पहले ही इसे वहां रखना चाहते थे। इसके बाद याचिका वापस ले ली गई।
याचिका से संतुष्ट नहीं दिखा सुप्रीम कोर्ट
इस याचिकापरजिस तरह से करीब 3 मिनट तक सुनवाई हुई और सुप्रीम कोर्ट ने तीखे औरनाराजगी भरेसवाल उठाए हैं। इससे जाहिर हैकिइस याचिका के उद्देश्य से सुप्रीम कोर्टकीबेंच संतुष्ट नहीं थी। इन सवालों के बीचहीअधिवक्ता ने कहा किवेयाचिका वापस लेना चाहते हैं।
ये खबरें भी पढ़िए...
डेली कॉलेज में क्या बैठेगा रिसीवर? हाईकोर्ट ने सुनवाई में कहा- लग रहा है चुनाव में किसी का फेवर हुआ
डेली कॉलेज बोर्ड के नीतिगत फैसले लेने पर हाईकोर्ट से रोक, विक्रम और प्रियव्रत की जीत खतरे में आई