दतिया में टिकट की घोषणा होते ही भाजपा में भूचाल! क्या संगठन के सामने खड़ी हो गई सबसे बड़ी परीक्षा?
समझें क्या है पूरा मामला
- भाजपा ने दतिया से डॉ. नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया।
- टिकट बदलने के बाद कार्यकर्ताओं के विरोध और इस्तीफों की खबरें सामने आईं।
- कई स्थानीय पदाधिकारियों और पार्षदों के इस्तीफे की चर्चाएं तेज हैं।
- संगठन के सामने असंतोष को नियंत्रित करने की चुनौती खड़ी हो गई है।
- अब सबकी नजर भाजपा नेतृत्व के अगले कदम पर है।
आशुतोष तिवारी को टिकट
दतिया विधानसभा उपचुनाव में भाजपा ने डॉ. नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी को टिकट दिया है। उम्मीदवार बदलने के बाद पार्टी के भीतर असंतोष सामने आया है। टिकट फैसले के विरोध में प्रदर्शन और इस्तीफों की खबरें आई हैं। कार्यकर्ताओं की नाराजगी से संगठन की चिंता बढ़ी है। अब भाजपा के सामने असंतोष को संभालने की चुनौती है। इसका असर चुनावी मुकाबले पर पड़ सकता है।
टिकट बदला और सियासी पारा चढ़ गया
दतिया में भाजपा के उम्मीदवार बदलने का फैसला सामने आते ही राजनीतिक माहौल पूरी तरह बदल गया। जिस सीट पर लंबे समय तक डॉ. नरोत्तम मिश्रा भाजपा का सबसे बड़ा चेहरा रहे, वहां अचानक नए उम्मीदवार की घोषणा ने समर्थकों को चौंका दिया। इसी के बाद विरोध प्रदर्शन और नाराजगी की खबरों ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा शुरू कर दी।
इस्तीफों की खबरों से बढ़ी संगठन की चिंता
राजनीतिक चर्चाओं के बीच कई स्थानीय पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के इस्तीफे की खबरें सामने आई हैं। कुछ रिपोर्टों में जिलाध्यक्ष रघुवीर सरण सहित अन्य पदाधिकारियों तथा पार्षदों द्वारा विरोध जताने की बात भी कही जा रही है। यदि यह असंतोष लगातार बढ़ता है तो भाजपा के लिए चुनावी रणनीति पर इसका असर पड़ सकता है।
क्या अनुशासन की होगी परीक्षा?
भाजपा स्वयं को अनुशासित संगठन मानती है। ऐसे में टिकट वितरण के बाद खुले विरोध ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि पार्टी नेतृत्व नाराज कार्यकर्ताओं को मनाने की कोशिश करता है या संगठनात्मक स्तर पर कोई सख्त कदम उठाता है।
आशुतोष तिवारी पर क्यों जताया भरोसा?
आशुतोष तिवारी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्ठभूमि से आते हैं। वे भोपाल-सागर संभाग में संभागीय संगठन मंत्री रह चुके हैं। भाजपा सरकार के दौरान मध्य प्रदेश गृह निर्माण मंडल के अध्यक्ष भी रहे और उन्हें मंत्री दर्जा प्राप्त था। उन्हें केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के करीबी नेताओं में भी माना जाता है।
क्या सर्वे रिपोर्ट बनी बदलाव की वजह?
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, दतिया में एक केंद्रीय सर्वे टीम ने क्षेत्र का फीडबैक जुटाया था। चर्चा है कि इसी फीडबैक के आधार पर पार्टी नेतृत्व ने उम्मीदवार बदलने का फैसला लिया। हालांकि भाजपा ने आधिकारिक रूप से टिकट बदलने का विस्तृत कारण सार्वजनिक नहीं किया है।
नरोत्तम मिश्रा के लिए बड़ा झटका
टिकट घोषणा से पहले तक डॉ. नरोत्तम मिश्रा लगातार जनसंपर्क और समाज प्रमुखों के साथ बैठकों में सक्रिय थे। बताया जाता है कि उन्होंने नामांकन पत्र भी खरीद लिया था। ऐसे में अंतिम समय में टिकट बदलने का फैसला उनके समर्थकों के लिए अप्रत्याशित माना जा रहा है।
दतिया का बदला हुआ चुनावी समीकरण
दतिया में पिछले डेढ़ दशक तक डॉ. नरोत्तम मिश्रा भाजपा का सबसे बड़ा चेहरा रहे हैं। उन्होंने लगातार जीत दर्ज कर इस सीट को भाजपा का मजबूत गढ़ बनाया था। अब नए उम्मीदवार के साथ भाजपा मैदान में है, जबकि कांग्रेस अपनी बढ़त बरकरार रखने की कोशिश करेगी। ऐसे में यह उपचुनाव दोनों दलों के लिए प्रतिष्ठा का मुकाबला बनता जा रहा है।
सबसे बड़ा सवाल अब यही
दतिया में उठे असंतोष को भाजपा कितनी जल्दी नियंत्रित कर पाती है, यही आने वाले दिनों की सबसे बड़ी राजनीतिक परीक्षा होगी। यदि संगठन नाराज कार्यकर्ताओं को साथ लाने में सफल रहता है तो चुनावी नुकसान टल सकता है। लेकिन यदि असंतोष लंबा खिंचता है तो विपक्ष इसे बड़ा चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश करेगा। फिलहाल दतिया की सियासत में सबसे ज्यादा चर्चा टिकट बदलने के फैसले और उसके बाद पैदा हुई राजनीतिक हलचल की ही है।
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