धार भोजशाला में सुप्रीम कोर्ट से स्टे नहीं, पास की जमीन पर कर सकेंगे जुमे की नमाज
धार भोजशाला मामले में मंगलवार, 14 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। जेबरान अंसारी, फिरोज शेख और अयाज की याचिका पर यह मामला सुनवाई के लिए आया था। मुस्लिम पक्ष ने हाईकोर्ट इंदौर के फैसले पर रोक लगाने और पहले जैसी स्थिति बहाल करने की मांग की थी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस मांग को खारिज कर दिया।
यह दी गई वैकल्पिक व्यवस्था
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने यह व्यवस्था दी है कि परिसर के बाहर पास की जमीन पर नमाज अदा की जा सकती है। इसके लिए हर शुक्रवार दोपहर 1 से तीन बजे तक की मंजूरी रहेगी। अब इस मामले में तीन सप्ताह बाद फिर सुनवाई होगी। जस्टिस जे. बागची और जस्टिस वी. मोहना ने केस की सुनवाई की। वहीं हिंदू पक्ष की ओर से विष्णु शंकर जैन, विनय जोशी, शासन की ओर से महाधिवक्ता (एजी) प्रशांत सिंह व अन्य अधिवक्ता उपस्थित थे।
15 मई को हुआ था फैसला
धार भोजशाला को लेकर इंदौर हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला 15 मई को आया था। इसमें हिंदुओं को पूजा का पूरा अधिकार मिला और साल 2003 के आदेश को रद्द कर दिया गया है। जस्टिस विजय शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच ने 242 पेज का विस्तृत आदेश दिया था। इसमें परिसर को मां सरस्वती देवी के मंदिर के स्वरूप को मान्य किया है। साथ ही कहा कि मुस्लिम पक्षकार को मस्जिद निर्माण के लिए जमीन आवंटन के लिए राज्य सरकार को आवेदन देना होगा। राज्य सरकार इस पर कानून के अनुसार विचार कर धार जिले में स्थाई भूमि आवंटन पर विचार कर सकती है।
साथ ही 2003 का आदेश निरस्त
इसके साथ ही मुस्लिम पक्ष को एएसआई डायरेक्टर के जिस 7 अप्रैल 2003 के आदेश से यहां पर नमाज के अधिकार मिले थे, उसे खत्म कर दिया गया है। इस पूरे आदेश को ही हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। इसके तहत हिंदुओं के पूजा के अधिकार को प्रतिबंधित किया गया था और मुस्लिमों को नमाज की मंजूरी मिली हुई थी।
ये खबरें भी पढ़िए...
धार की ऐतिहासिक मूर्ति सरस्वती की नहीं, मां गायत्री की निकली, 900 साल पुराना भ्रम टूटा!
MP News. महाकाल लोक की तर्ज पर सरस्वती लोक: भोजशाला परिसर की हो रही ड्रोन से मैपिंग
मध्यप्रदेश: भोजशाला की सुरक्षा में बड़ी चूक! गर्भगृह में चुपके से रखी वाग्देवी की प्रतिमा
बीजेपी विधायक टी राजा ने भोजशाला में की आरती, बोले- अयोध्या के बाद दूसरी बड़ी जीत