धार भोजशाला केस में सर्वे पर उठाए सवाल, तर्क दिए यह मामला जनहित का नहीं
Indore: धार भोजशाला केस पर इंदौर हाईकोर्ट में चल रही अंतिम सुनवाई में सोमवार 27 अप्रैल को इंटरवीनर पक्ष की ओर से सीनियर एडवोकेट शोभा मेनन ने तर्क रखे। उन्होंने सरकार और एएसआई की रिपोर्ट को संदेहास्पद बताया। साथ ही कहा कि इस केस की सुनवाई सिविल कोर्ट में होना चाहिए क्योंकि यह जनहित का मुद्दा नहीं बल्कि टाइटल स्वामित्व का मामला है।
यह एक दीवानी मामला है
वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील देते हुए कहा कि याचिकाकर्ताओं ने जनहित याचिका दायर की है, जबकि यह स्पष्ट रूप से दीवानी का मामला है। उन्होंने तर्क देते हुए मांग की है कि इस तरह की याचिका पर याचिकाकर्ता पर हाईकोर्ट को भारी कॉस्ट लगानी चाहिए।
याचिकाकर्ता ने गलत जानकारी दी
मेनन ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ताओं ने खुद को समाजसेवी बताया और अपनी पूरी जानकारी छिपाई है। पहले इसी तरह की याचिका साल 1997 में भी थी और तब सिविल सूट दायर करने की स्वतंत्रता के साथ वापस ली गई थी। लेकिन सिविल कोर्ट में कोई वाद दायर नहीं किया गया।
सरकार के तर्क और सर्वे पर भी सवाल
अधिवक्ता मेनन ने एएसआई और सरकार के तर्क पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पहले विवादित स्थल को मंदिर और मस्जिद दोनों ही नहीं बताया गया था। लेकिन अब एएसआई ने सर्वे में केवल मंदिर बताया।
वीडियो फुटेज पेश किए गए
वहीं एएसआई के अधिवक्ता सुनील जैन ने भोजशाला सर्वे की वीडियो फुटेज सील्ड हार्ड ड्राइव में हाईकोर्ट में पेश कर दी।इससे सभी पक्षकार देख सकते हैं। य़ह सर्वे 96 दिन तक चला था। अभी आगे भी सुनवाई होगी जिसमें शोभा मेनन अपनी दलीलें आगे भी रखेंगी।
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