दिग्विजय सिंह ने कहा, सोना न खरीदने की अपील बेतुकी; गौरव वल्लभ ने किया पलटवार
समझें पूर मामला...
- PM की सोना न खरीदने की अपील पर विवाद।
- सरकार सोना आयात कर रही, शुल्क 15% हुआ।
- सुनार और कारीगरों का धंधा बुरी तरह चौपट।
- गौरव वल्लभ ने कहा RBI से तुलना गलत।
- दिग्विजय बोले: एजेंडा नहीं, जनता की बात है।
मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने पीएम मोदी की सोना न खरीदने की अपील को बेतुका बताया। उन्होंने कहा कि सरकार खुद सोना आयात कर रही है और आयात शुल्क 15% कर दिया गया है। इस पर पीएम आर्थिक सलाहकार परिषद में सदस्य गौरव वल्लभ ने डॉ. गौरव वल्लभ ने पलटवार किया और दिग्विजय पर एजेंडा माइंडसेट का आरोप लगाया।
सोना अपील पर छिड़ा विवाद
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशवासियों से सोना न खरीदने की अपील की थी। इस अपील पर कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) ने तीखा विरोध जताया। उन्होंने ग्वालियर में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि यह अपील पूरी तरह बेतुकी है।
भारत में सोना खरीदना सदियों पुरानी परंपरा है। शादी-विवाह, धार्मिक आयोजनों में सोने का चढ़ावा देने की रीत है। गरीब से गरीब परिवार भी दो-चार ग्राम सोना खरीदता है।
सरकार की दोहरी नीति पर सवाल
दिग्विजय सिंह ने सोना आयात नीति (Gold Import Policy) पर सरकार को जमकर घेरा। उन्होंने कहा कि एक ओर जनता को सोना न खरीदने की सलाह दी जा रही है।
दूसरी ओर केंद्र सरकार खुद विदेशों से भारी मात्रा में सोना आयात (Gold Import) कर रही है। पहले सोने पर आयात शुल्क (Import Duty) छह प्रतिशत था। अब उसे बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया है। यह आम नागरिकों और छोटे व्यापारियों के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है।
सुनार और कारीगर बेहाल
दिग्विजय सिंह ने कहा कि इस नीति से पूरे देश के सुनार (Goldsmiths) परेशान हैं। सोना व्यापारियों का धंधा लगभग चौपट हो चुका है। केवल सुनार ही नहीं, उनके साथ काम करने वाले कारीगर भी बुरी तरह प्रभावित हैं।
बढ़ती महंगाई (Rising Inflation) के बीच इन कारीगरों का जीवन यापन मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा कि सरकार को जनता की तकलीफें समझनी चाहिए। नीतियां बनाते समय आम आदमी की परेशानियों का ध्यान रखना जरूरी है।
नीट और महंगाई पर भी हमला
दिग्विजय सिंह ने नीट पेपर लीक (NEET Paper Leak) का मामला भी उठाया। उन्होंने कहा कि 2017, 2021, 2024 और 2026 में परीक्षा में गड़बड़ी हुई। 2025 का पेपर लीक भी हुआ, लेकिन सरकार ने उसे दबा दिया।
संसद की स्थायी समिति के सुझावों को मंत्री ने नकार दिया। पेट्रोल-डीजल बचाने की बात करने वाले भाजपा नेता 200 वाहनों का काफिला लेकर चलते हैं। इससे गरीब, किसान, मजदूर और छोटे व्यापारी सबसे अधिक परेशान हैं।
गौरव वल्लभ का पलटवार
PM की आर्थिक सलाहकार परिषद में सदस्य गौरव वल्लभ ने डॉ. गौरव वल्लभ (Dr. Gaurav Vallabh) ने दिग्विजय सिंह को करारा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह क्या खुद को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से तुलना करना चाहते हैं।
RBI देश की वित्तीय स्थिरता (Financial Stability) के लिए सोना खरीदता है। यह देश की आर्थिक सुरक्षा का हिस्सा है। व्यक्तिगत रूप से सोना खरीदना और सरकारी स्तर पर सोना खरीदना बिल्कुल अलग-अलग मामले हैं। दोनों की तुलना करना तर्कसंगत नहीं है।
एजेंडा माइंडसेट का आरोप
डॉ. गौरव वल्लभ ने कहा कि दिग्विजय सिंह बहुत अनुभवी और समझदार नेता हैं। वे उन्हें व्यक्तिगत रूप से जानते हैं और उनके अनुभव का सम्मान करते हैं। लेकिन इस तरह के बयान देना दर्शाता है कि वे एजेंडा माइंडसेट (Agenda Mindset) से काम कर रहे हैं।
RBI नोट भी छापता है, क्या दिग्विजय सिंह वह भी कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियां देश की आर्थिक भलाई के लिए बनाई जाती हैं। इन्हें राजनीतिक चश्मे से नहीं देखना चाहिए।
राजनीतिक बहस का असर
इस पूरी बहस ने देश में सोना नीति (Gold Policy) और सरकार की आर्थिक नीतियों पर चर्चा छेड़ दी है। सुनार संगठनों ने भी सरकार से आयात शुल्क घटाने की मांग की है।
आम नागरिक चाहते हैं कि सरकार उनकी परंपराओं और आजीविका का सम्मान करे। कांग्रेस इस मुद्दे को आगामी चुनावों तक जोर-शोर से उठाती रहेगी। NSUI और कांग्रेस कार्यकर्ता देशभर में आंदोलन जारी रखने की तैयारी में हैं।
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