बैतूल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू बोलीं; जनजातीय समाज पूरे देश के लिए प्रेरणा
समझें क्या है पूरा मामला
- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू बैतूल पहुंचीं।
- ब्रह्मकुमारीज ने महासम्मेलन आयोजित किया।
- आदिवासी सशक्तिकरण पर मुख्य चर्चा हुई।
- विकसित भारत के लिए तीन मूल आधार बताए।
- राज्यपाल और मंत्री कार्यक्रम में मौजूद रहे।
अध्यात्म से बनेगा नया भारत
बैतूल के लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम में गुरुवार को एक ऐतिहासिक कार्यक्रम हुआ। ब्रह्मकुमारीज संस्थान (Brahma Kumaris) ने यहां 'आध्यात्मिक जागृति द्वारा आदिवासी समाज का सशक्तिकरण' विषय पर महासम्मेलन आयोजित किया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस महासम्मेलन का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलित करके किया। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान के साथ हुई। इसके बाद कलाकारों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं।
राष्ट्रपति ने क्या कहा
राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संबोधन में कहा कि विकसित भारत के निर्माण की यात्रा अध्यात्म, सामाजिक समरसता और पर्यावरण संरक्षण पर आधारित होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक शिक्षा इंसान के जीवन में शांति और संतुलन लाती है।
इससे पूरे समाज में सकारात्मक बदलाव आता है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को याद करते हुए उनके एक प्रसिद्ध कथन का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कश्मीर से कन्याकुमारी तक देश का हर हिस्सा भारत की आत्मा का अभिन्न अंग है। राष्ट्र निर्माण में सभी समुदायों की समान भागीदारी जरूरी है।
जनजातीय समाज है पूरे देश के लिए मिसाल
राष्ट्रपति ने जनजातीय समाज की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय ने अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को पीढ़ी दर पीढ़ी बचाकर रखा है।
उनके अनुसार जनजातीय समाज में संवेदना, सहयोग, ईमानदारी और मानवीय मूल्यों की गहरी जड़ें हैं। यही मूल्य पूरे देश के लिए प्रेरणा का काम करते हैं।
राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि आदिवासी समुदाय का जल, जंगल और जमीन के संरक्षण का नजरिया आज के दौर में पूरे समाज के लिए अनुकरणीय है। उन्होंने ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाने और पर्यावरण बचाने को जनआंदोलन बनाने की अपील की।
2047 का संकल्प और महासम्मेलन की उम्मीद
राष्ट्रपति ने भरोसा जताया कि यह महासम्मेलन जनजातीय समाज के सशक्तिकरण को नई दिशा देगा। उन्होंने सभी से मिलकर काम करने की अपील की ताकि 2047 तक विकसित भारत का संकल्प पूरा हो सके।
मंच पर कौन-कौन रहे मौजूद
इस महासम्मेलन की अध्यक्षता मध्यप्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने की। इसके अलावा केंद्रीय राज्यमंत्री दुर्गादास उईके और प्रदेश के राज्यमंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल भी मंच पर मौजूद रहे। संस्था के ओडिशा प्रभारी डॉ. नथमल और माउंट आबू से आईं लीना बहन व शैलजा बहन ने भी कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
राष्ट्रपति का एमपी दौरा क्यों है खास?
देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज 18 जून से मध्यप्रदेश दौरे पर हैं। राष्ट्रपति का यह दौरा पांच दिनों का होगा। 18 जून से 22 जून के बीच वे एमपी के चार अलग-अलग जिलों में जाएंगी। हर जिले में कुछ खास कार्यक्रम तय हैं। कहीं आदिवासी सम्मेलन है तो कहीं योग दिवस, कहीं धार्मिक आयोजन तो कहीं वन्यजीव भ्रमण। यह दौरा कई मायनों में ऐतिहासिक माना जा रहा है।
जबलपुर में योग दिवस और दीक्षांत समारोह
जानकारी के अनुसार राष्ट्रपति 20-21 जून को जबलपुर में रहेंगी। बता दें कि 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस है। जबलपुर में इस दिन बड़ा आयोजन प्रस्तावित है। राष्ट्रपति इस आयोजन में शामिल होंगी।
इसके अलावा जबलपुर में एक विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह भी होगा। राष्ट्रपति इसमें मुख्य अतिथि होंगी। राज्यपाल मंगुभाई पटेल समारोह की अध्यक्षता करेंगे।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार विशिष्ट अतिथि के रूप में रहेंगे। यह दीक्षांत समारोह करीब दो दशकों बाद किसी राष्ट्रपति की मौजूदगी में हो रहा है।
इससे पहले 2006 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम इस विश्वविद्यालय के 21वें दीक्षांत समारोह में आए थे। इस बार 141 छात्र-छात्राओं को कुल 240 स्वर्ण पदक दिए जाएंगे। साथ ही, 182 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि मिलेगी।
श्योपुर में कूनो का वन्यजीव भ्रमण
21 और 22 जून को राष्ट्रपति श्योपुर जाएंगी। वे ग्वालियर एयरपोर्ट से सीधे वहां पहुंचेंगी। 21 जून को दोपहर करीब तीन बजे वे कूनो नेशनल पार्क में होंगी। रात वहीं ठहरेंगी। 22 जून की सुबह कूनो का भ्रमण करेंगी। सुबह दस बजे वहां से रवाना हो जाएंगी।
श्योपुर में आईएएस शीला दाहिमा की अध्यक्षता में बैठक हो चुकी है। 20 से 22 जून के बीच कराहल-विजयपुर अनुभाग क्षेत्र को नो फ्लाइंग जोन घोषित किया गया है। कूनो रेस्टहाउस के आसपास साफ-सफाई और सैनिटाइजेशन के निर्देश दिए गए हैं।
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