पूर्व आईएएस अरविंद जोशी और टीनु जोशी पर ED का एक्शन, क्रिकेट अकादमी समेत 22.46 करोड़ जब्त
समझें क्या है पूरा मामला...
- ED ने पूर्व आईएएस अरविंद जोशी की संपत्ति अटैच की है।
- यह संपत्ति करीब 22.46 करोड़ रुपए की है।
- मामला भोपाल की क्रिकेट अकादमी से जुड़ा है।
- अरविंद जोशी और टीनु जोशी पूर्व IAS अधिकारी है।
- यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत हुई है।
ED (Directorate of Enforcement) ने भोपाल में बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने भोपाल जोनल ऑफिस के जरिए एक प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी किया है। यह ऑर्डर 30 जून 2026 को जारी किया गया है। इसके तहत करीब 22.46 करोड़ रुपए की संपत्ति अटैच की गई है।
इस संपत्ति में एक क्रिकेट अकादमी शामिल है। इसके साथ ही होटल और रिजॉर्ट भी अटैच किए गए हैं। यह सारी संपत्ति भोपाल के सेमरी बजयफात गांव में स्थित है। इसके नीचे की जमीन भी अटैचमेंट में शामिल है। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत हुई है। यह मामला दिवंगत अरविंद जोशी और अन्य लोगों से जुड़ा है।
कैसे शुरू हुई जांच
यह पूरा मामला एक FIR (First Information Report) से शुरू हुआ था। यह एफआईआर स्पेशल पुलिस एस्टेब्लिशमेंट, लोकायुक्त, भोपाल ने दर्ज की थी। यह केस दिवंगत अरविंद जोशी और टीनु जोशी के खिलाफ दर्ज हुआ था। दोनों मध्य प्रदेश कैडर के पूर्व IAS (Indian Administrative Service) अधिकारी थे। दोनों के पास करीब 41 करोड़ 87 लाख रुपए की संपत्ति पाई गई थी। यह संपत्ति उनकी आय के मुकाबले काफी ज्यादा बताई गई है। इसे लेकर पहले भी कई शिकायतें मिली थीं। जांच एजेंसियों को कई सबूत भी मिले थे। इनसे पता चला कि दोनों ने अपने पद का गलत इस्तेमाल किया है। जांच में सामने आया कि उन्होंने भ्रष्ट तरीके अपनाए थे।
बेनामी संपत्ति और फर्जी करार का खुलासा
जांच में कई नई बातें सामने आई हैं। अरविंद जोशी ने अपने नाम पर भी संपत्ति बनाई थी। इसके साथ ही परिवार और करीबी लोगों के नाम पर भी संपत्ति खरीदी गई। इसके लिए अपराध की कमाई यानी प्रोसीड्स ऑफ क्राइम (Proceeds of Crime) का इस्तेमाल हुआ था।
जांच एजेंसी ने बेनामी संस्थाओं और फर्जी करार का भी पता लगाया है। इनका इस्तेमाल असली मालिकाना हक छिपाने के लिए किया गया था। इससे गैरकानूनी कमाई को साफ पैसा दिखाने की कोशिश हुई। जांच में यह भी सामने आया कि फेथ क्रिकेट क्लब का पूरा कामकाज दिवंगत अरविंद जोशी संभालते थे। क्रिकेट अकादमी और इससे जुड़े ढांचे में जो पैसा लगा, वह उनकी गैरकानूनी कमाई से आया था। यह पैसा उनके सहयोगी रघवेंद्र सिंह तोमर के जरिए लगाया गया।
पहले भी हुई थी कार्रवाई
यह पहली बार नहीं है जब ED ने इस मामले में कार्रवाई की है। इससे पहले भी एजेंसी ने करीब 13 करोड़ 60 लाख रुपए की संपत्ति अटैच की थी। इस मामले में जांच एजेंसी ने भोपाल की स्पेशल कोर्ट (PMLA) में प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट भी दाखिल की है। यानी कोर्ट में मामला आगे बढ़ चुका है।
एजेंसी अब भी इस केस में जांच जारी रखे हुए है। बाकी बची गैरकानूनी कमाई की पहचान की जा रही है। जरूरत पड़ने पर आगे और संपत्ति भी अटैच हो सकती है। जांच एजेंसी का कहना है कि यह प्रक्रिया लगातार चल रही है।
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