इलेक्ट्रिक वाहन कितने खतरनाक? भारत के बड़े हादसे और सुरक्षा के नियम
News In Short
- 2022 के बाद तीन साल में ईवी से जुड़े 23 हजार 865 सड़क हादसे दर्ज हुए हैं।
- तमिलनाडु में इलेक्ट्रिक स्कूटर में आग लगने से पिता और बेटी की मौत हो गई थी।
- EV में आग की बड़ी वजह बैटरी में ‘थर्मल रनअवे’ प्रक्रिया है, जो शुरू होने पर लगातार फैलती जाती है।
- केंद्र सरकार ने EV सुरक्षा के लिए नए मानक और टेस्टिंग नियम लागू किए हैं।
- गलत चार्जर, खराब सॉकेट और लोकल बैटरी EV को जानलेवा बना सकते हैं।
News In Detail
EV का बाजार बढ़ा, तो खतरे भी सामने आए
पेट्रोल‑डीजल की बढ़ती कीमत और प्रदूषण की चिंता ने लोगों को ईवी की ओर तेजी से मोड़ा है। दोपहिया से लेकर कार और बस तक, हर सेगमेंट में ईवी की बिक्री बढ़ रही है। लेकिन इसी के साथ ईवी से जुड़े सड़क हादसों और आग के मामलों का रिकॉर्ड भी बन रहा है।
2022 के बाद से देशभर में ईवी वाले 23 हजार 865 सड़क हादसों का डेटा दर्ज हुआ है। इनमें बड़ी संख्या में मौतें और घायल भी शामिल हैं।
यह आंकड़ा बताता है कि ईवी आम हो चुके हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा पर उतना ही ध्यान देना होगा, जितना किसी पेट्रोल‑डीजल वाहन पर दिया जाता है।
भारत के बड़े हादसे जिन्होंने जगाया
देश में कई घटनाओं ने ईवी सुरक्षा को राष्ट्रीय बहस का मुद्दा बना दिया। मार्च 2022 में तमिलनाडु के वेल्लोर में 49 वर्षीय दुरैवर्मा और उनकी 13 साल की बेटी मोहना प्रीति की मौत उस समय हुई जब उनका ओकिनावा इलेक्ट्रिक स्कूटर घर के अंदर रात में चार्जिंग (Electric Car Charging Station) पर लगा था।
पुलिस जांच में शुरुआती कारण पुराने और कमजोर बिजली सॉकेट में शॉर्ट सर्किट बताया गया, जिसके बाद स्कूटर में आग भड़की और कमरे में धुआं भर गया। दोनों की मौत दम घुटने से हुई, उनके शरीर पर गंभीर जलन के निशान भी नहीं मिले।
इसी दौर में पुणे के लोहेगांव इलाके में Ola (Ola Electric Scooter) S1 Pro स्कूटर सड़क किनारे खड़ा था, अचानक उसमें आग लग गई और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
इसके अलावा ओकिनावा, Ola (Ola Electric Scooter), Pure EV और Jitendra जैसे ब्रांड के कई स्कूटर अलग‑अलग शहरों में जलते दिखे, जिससे लोगों में डर और सरकार पर दबाव दोनों बढ़ा।
EV में आग क्यों लगती है?
ईवी की जान उसकी बैटरी है और आग का सबसे बड़ा खतरा भी वहीं से शुरू होता है। लिथियम‑आयन बैटरी में कई छोटे‑छोटे सेल होते हैं। जब डिजाइन, मटेरियल या मैन्युफैक्चरिंग में कमी हो, या फिर ज्यादा गर्मी, शॉर्ट सर्किट या तेज झटके लगें तो बैटरी के अंदर तापमान तेजी से बढ़ सकता है।
इसी प्रक्रिया को ‘थर्मल रनअवे’ कहा जाता है। इसमें पहले एक सेल बहुत ज्यादा गर्म होता है, फिर उसकी गर्मी पास के सेल तक जाती है और एक‑एक करके पूरी बैटरी आग की चपेट में आ जाती है। यह आग सामान्य आग से अलग होती है, क्योंकि कुछ स्थितियों में यह बाहरी ऑक्सीजन के बिना भी चल सकती है और इसे बुझाने के लिए बहुत ज्यादा पानी या खास तरह के फायर फाइटिंग केमिकल की जरूरत पड़ती है।
सरकार द्वारा नियुक्त विशेषज्ञों ने कई मामलों की जांच में बैटरी सेल की क्वालिटी, पैक डिजाइन और थर्मल मैनेजमेंट में खामियां पाईं, खासकर उन कंपनियों में जो तेजी से सस्ते ईवी बाजार में ला रही थीं।
भारतीय मौसम और सड़कें, अलग चुनौती
विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत की गर्म जलवायु, लंबा समर सीजन और खराब सड़कें ईवी के लिए अलग तरह की चुनौती पैदा करते हैं। तेज गर्मी में बैटरी का तापमान पहले ही ऊंचा होता है, ऊपर से दो सवारियां, ओवरलोड और गड्ढेदार सड़कें बैटरी पैक पर अतिरिक्त दबाव डालती हैं।
अगर बैटरी पैक का डिजाइन मजबूत न हो या ग्राउंड क्लियरेंस कम हो, तो स्पीड ब्रेकर या गड्ढे से टकराने पर पैक में सूक्ष्म दरारें या इंटरनल डैमेज हो सकता है, जो आगे चलकर शॉर्ट सर्किट और आग का कारण बनता है। कई कंपनियों पर आरोप है कि उन्होंने विदेशों के डिजाइन को सीधे कॉपी किया, जबकि भारत की स्थितियों के हिसाब से पर्याप्त बदलाव नहीं किए।
सरकार ने क्या कदम उठाए?
लगातार हादसों के बाद केंद्र सरकार और रेग्युलेटर हरकत में आए। सड़क परिवहन मंत्रालय (MoRTH) ने DRDO, IISc बेंगलुरु और अन्य प्रयोगशालाओं के विशेषज्ञों के साथ मिलकर आग की घटनाओं की जांच कराई और उनकी सिफारिशें लीं। इन रिपोर्टों के आधार पर बैटरी, सेल, BMS (बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम) और चार्जिंग सुरक्षा के लिए कई तकनीकी नियम सख्त किए गए।
भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने 2024 में दो नए मानक IS 18590:2024 और IS 18606:2024 जारी किए, जो L, M और N कैटेगरी यानी दोपहिया, कार और कमर्शियल ईवी के पावरट्रेन और बैटरी सुरक्षा पर फोकस करते हैं।
इन मानकों के तहत कंपनियों को मजबूती, थर्मल मैनेजमेंट, वॉटर‑इंग्रेस और क्रैश जैसी स्थितियों के लिए सख्त टेस्ट पास करना होगा। सरकार ने साफ किया है कि ईवी को बंद करने का इरादा नहीं है, बल्कि उन्हें ज्यादा सुरक्षित बनाना लक्ष्य है।
EV का सही रखरखाव कैसे करें
अगर आपके पास ईवी है, तो कुछ चार्जिंग आदतें (charging vehicle) आपकी और परिवार की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी हैं।
- हमेशा कंपनी के ओरिजिनल या अधिकृत चार्जर और केबल ही इस्तेमाल करें। गलत या सस्ता चार्जर ओवरहीटिंग और शॉर्ट सर्किट का बड़ा कारण बन सकता है।
- जिस सॉकेट से चार्ज करते हैं, उसे इलेक्ट्रिशियन से चेक करवाएं। पुराना, ढीला या कम क्षमता वाला सॉकेट ईवी के लिए खतरनाक है, जैसा वेल्लोर केस में शक जताया गया।
- बैटरी को बार‑बार 0% तक खाली और 100% तक फुल चार्ज (EV Charging) करने से बचें, खासकर गर्मी के मौसम में। कोशिश करें कि चार्ज 20% से 80% के बीच रहे।
बंद कमरे, स्टोर रूम या गैस सिलेंडर‑किचन के पास ईवी को चार्ज न करें। बेहतर है कि खुली या हवादार जगह में चार्जिंग की जाए।
तेज धूप में, बहुत गर्मी में या टीन‑शेड के नीचे लंबे समय तक गाड़ी खड़ी न रखें। इससे बैटरी का तापमान अनावश्यक रूप से बढ़ता है।
तय समय पर अधिकृत सर्विस सेंटर से वाहन और बैटरी की जांच कराते रहें। किसी भी अजीब गंध, आवाज, धुआं, बैटरी की सूजन या दरार दिखे तो तुरंत गाड़ी बंद करें और सर्विस सेंटर संपर्क करें।
ये काम बिल्कुल न करें
कुछ गलतियां सीधे जानलेवा साबित हो सकती हैं, इन्हें सख्ती से टालना चाहिए।
खुद से ईवी की बैटरी या हाई‑वोल्टेज सिस्टम की मरम्मत करने की कोशिश न करें, साधारण मैकेनिक से भी न कराएं। ईवी सिस्टम में सैकड़ों वोल्ट का करंट होता है, जो झटके या शॉर्ट सर्किट से जान ले सकता है।
लोकल मार्केट की सस्ती या बिना सर्टिफिकेशन वाली बैटरी, बीएमएस या सेल पैक न लगवाएं। हमेशा कंपनी की अधिकृत बैटरी और पार्ट्स ही इस्तेमाल करें।
अगर वाहन में आग लगे तो पास जाकर मोबाइल से वीडियो बनाने या खुद पानी से बुझाने की कोशिश न करें। लिथियम‑आयन बैटरी की आग से जहरीली गैसें निकल सकती हैं, जो सांस के जरिए शरीर को नुकसान पहुंचाती हैं।
तुरंत 112 या फायर ब्रिगेड को फोन करें, मेन स्विच बंद कर सकें तो सुरक्षित दूरी से करें और वाहन से दूर चले जाएं।
कंपनी अगर रिकॉल नोटिस दे, तो उसे हल्के में न लें। तुरंत सर्विस सेंटर जाकर बैटरी या पार्ट्स बदलवाएं, क्योंकि यह कदम अक्सर सुरक्षा जोखिम कम करने के लिए उठाया जाता है।
भारी बारिश या बाढ़ जैसे हालात में गाड़ी को गहरे पानी में ले जाने से बचें, इससे बैटरी पैक में पानी घुसकर शॉर्ट सर्किट कर सकता है।
EV खरीदते समय क्या देखें?
- नए इलेक्ट्रिक वाहनों कोलेते समय केवल रेंज और कीमत पर ध्यान न दें, सुरक्षा को सबसे ऊपर रखें।
- कोशिश करें कि BIS के IS 18590:2024 और IS 18606:2024 जैसे मानकों के अनुरूप प्रमाणित वाहन ही लें।
- बैटरी के लिए AIS‑156 जैसे सर्टिफिकेशन की जानकारी लें और डीलर से लिखित में पुष्टि करवाएं।
- लोकल, अनजाने या बिना सर्विस नेटवर्क वाले ब्रांड की बजाय उन कंपनियों को तरजीह दें जिनके पास मजबूत आफ्टर‑सेल्स और रिकॉल‑सपोर्ट सिस्टम हो।
अंत में, ईवी खुद में दुश्मन नहीं हैं, लेकिन इनका सही उपयोग, रखरखाव और सुरक्षा मानकों का पालन न करना जरूर खतरनाक हो सकता है। आधिकारिक नियमों और साधारण सावधानियों का पालन करके आप ईंधन की बचत भी कर सकते हैं और अपनी जान‑माल की सुरक्षा भी कर सकते हैं।
सोर्स:
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH)
e-DAR पोर्टल: https://morth.nic.in
भारतीय मानक ब्यूरो (BIS)
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